मंडला (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पदस्थ डाक्टर इलाज नहीं रेफर पर भरोसा करते हैं हद तो तब हो जाती है जब ओपीडी के बाद डाक्टर स्वयं मरीज के स्वजन को उसे निजी अस्पताल में दिखाने की सलाह देते हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिला अस्पताल में कुछ डाक्टर के बारे में यहां तक कहा जाता है ओपीडी में नहीं बल्कि साहब के प्राइवेट क्लीनिक में बेहतर इलाज किया जाता है इस संबंध में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि वह स्वयं सेवी संस्थान से जुड़े लोगों ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन को अवगत भी कराया बावजूद इसके हर बार यह कह कर मामले को टाल दिया जाता है कि यह पूरा प्रकरण सिविल सर्जन के अधिकार क्षेत्र में आता है हाला की पटरी से उतर चुकी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं जिले वासियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है छोटी बीमारी का इलाज जहां हुआ जिला मुख्यालय में स्थित निजी अस्पताल में कराते हैं वही बड;ी बीमारियों के लिए उन्हें नागपुर या फिर जबलपुर का रुख करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनकः जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं किस कदर बिगड; चुकी है इसके उदाहरण आए दिन देखने-सुनने के लिए मिलते रहते हैं, सबसे खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है, यहां इलाज के लिए डाक्टर सहित अन्य पर्याप्त स्टॉफ नहीं होने से छोटी-छोटी बीमारियों में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।बिछिया निवासी मनोज मार्को ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज की सुविधाएं नहीं होने से जरूरत पड़ने पर मरीज को मंडला या जबलपुर ले जाना पड़ता है। गणेश सोनी बताते हैं कि जब मरीज को के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया जाता है तो यहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, कई बार तो मंडला जिला अस्पताल ले जाने पर मरीज को यहां से भी जबलपुर रेफर कर दिया जाता है जिससे किराया- भाड़ा लगाकर मरीज को जबलपुर ले जाना पड़ता है। कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।

गर्भ में ही नवजात की हो गई मौतः गत दिनों घुघरी के एक गांव में प्रसूता महिला को जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां से उसे जबलपुर रेफर कर दिया और समय में इलाज नहीं मिलने से महिला के गर्भ में ही नवजात की मौत हो गई थी।

जननी वाहन में डिलेवरी की सुविधा नहीं: एक माह पूर्व ही प्रदेश में 108 एंबुलेंस का नया ठेका हुआ है। पूर्व में 108 एंबुलेंस में चालक के साथ एक इएमटी भी मौजूद रहते थे जो जरूरत पड़ने पर प्रसूताओं की डिलेवरी भी करा लेते थे कई बार ऐसी स्थितियां आ जाती हैं कि अस्पताल पहुंचने से पहले प्रसव पीड;ा शुरू हो जाती है, एंबुलेंस में ही महिलाओं की डिलेवरी कराने के कई मामले सामने आ चुके हैं। अब यह व्यवस्था भी एंबुलेंस में नहीं मिल पाएगी। क्योंकि जिन 108 एंबुलेंस का जननी वाहन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उन वाहनों में सिर्फ चालक ही होते हैं, यदि अचानक प्रसव पीड;ा अधिक बढ;ती है तो बड;ी समस्या बन सकती है। हालांकि 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 108 एंबुलेंस का चालक भी इतना प्रशिक्षित रहता है कि अचानक जरूरत पड़ने पर महिला की डिलेवरी करा सकता है। बताया गया कि हाल में ही इस तरह के कुछ मामलों में चालक ने डिलेवरी कराई भी है।

मिल जाता है राजनीतिक लाभः बताते चलें कि अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर मंडला कलेक्टर हर्षिका सिंह द्वारा पूर्व में सिविल सर्जन का प्रभाव में बदलाव किया गया था हालांकि जिस सिविल सर्जन को पद से पृथक किया गया था वह राजनीतिक अप्रोच लगाकर एक बार पुनः सिविल सर्जन बन गए। जिसके बाद व्यवस्था एक बार फिर पटरी से उतर गई है।

किया जा रहा नजरअंदाजः इन दिनों जिले का जिला अस्पताल मानो खुद बीमार चल रहा है। ब्लड बैंक से लेकर पैथोलॉजी वार्ड में मरीजों का इलाज मरीजों को मिलने वाला भोजन सभी में अव्यवस्था हावी है। जिसे दुरुस्त करने की जवाबदारी खुद स्वास्थ्य विभाग की है वहीं विभाग अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार साबित हो रहा है।

मिल रहे हैं कोरोना मरीजः आपको बताते चलें कि जून माह में अब तक जिले में कुल 12 कोरोना मरीज मिल चुके हैं। जिनकी जानकारी स्वयं जिला प्रशासन दे रहा है ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त रखने के बजाज खुद जिला अस्पताल की व्यवस्था को मजाक बना दिया गया है।

जांच के आदेशः जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को मिलने वाले भोजन के निर्देश शिकायतों को लेकर सीएमएचओ द्वारा जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है उक्त कमेटी में फूड इंस्पेक्टर सहित दो अन्य चिकित्सक को शामिल किया गया है जो कि अचौक निरीक्षण कर जांच करेंगे।

वर्जन

जिला अस्पताल से शिकायतें मिलती रहती हैं हम शिकायत का निराकरण भी करते हैं रही बात रेफर करने की तो गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाता है। जिसके पीछे मंशा यह होती है कि उनको बेहतर इलाज मिल सके।

डॉ श्रीनाथ सिंह, सीएमएचओ, मंडला।

Posted By: Nai Dunia News Network

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