मंडला (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मौसम की बेरुखी ने जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में प्रमुख रूप से धान की खेती होती है। बारिश की कमी के कारण धान रोपने का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। जिले में इस बार 1.70 लाख हेक्टेयर में धान बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। म-ा, कोदो कुटकी, ज्वार, दलहनी व तिलहनी फसल सभी का लक्ष्य कुल रकबा 336.85 हेक्टेयर निर्धारित है। कम बारिश होने से किसान चिंतित है।

नर्सरी तैयार, बारिश का इंतजारः अब तक जो बारिश हुई उसमें किसानों ने किसी तरह नर्सरी तो तैयार कर ली है लेकिन अब बारिश नहीं होने से नर्सरी में उग आए धान के पौधों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में अधिकांश किसान आज भी बारिश पर ही निर्भर है जो किसान संपन्न हैं वे पंप लगाकर किसी तरह खेतों में पानी की व्यवस्था कर लेते हैं लेकिन ऐसा कर पाना हरेक किसान के लिए संभव नहीं है। मौसम के जानकारों का कहना है कि समय-समय पर हवा चलने से मानसून के बरसने में रुकावट आ रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले सप्ताह से सतत बारिश के आसार हैं। वहीं बादलों की मौजूदगी व हवा के बीच जनजीवन उमस-गर्मी से जूझ रहा है। बारिश के इंतजार में जून माह के अंतिम सप्ताह तक खरीफ फसलों की बोवनी रफ्तार नहीं पकड; पा रही है। खेतों को तैयार कर किसान अब तेज व सतत बारिश का इंतजार कर रहे है। बम्हनी, डिठौरी बेल्ट में धान की खेती सबसे अधिक की जाती है। इस क्षेत्र के किसान बारिश पूर्व से तैयारियां शुरू कर देते हैं लेकिन इस साल अभी तक बारिश नहीं होने के कारण आधे क्षेत्र में भी धान का रोपा नहीं लग पा रहा है। यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो रोपा न लगने से धान का रकबा जिले में सीमित हो सकता है। साथ ही किसानों को नुकसान हो जाएगा।

आसपास के जलस्रोतों का सहाराः किसानों ने बताया कि बारिश की राह देख रहे हैं वहीं बोनी का समय निकला जा रहा है इसलिए आसपास के जल स्रोतों से पंप के माध्यम से पानी खेतों में लाकर सिंचाई की जा रही है, किसानों ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व जो बारिश हुई, उससे ऐसा लग रहा था कि मानो अब लगातार बारिश होगी तो कुछ किसानों ने खेतों में बुआई कर दी तो कुछ किसानों ने अपने खेत के एक हिस्से में नर्सरी तैयार के लिए बुआई कर दी, लेकिन अब बारिश नहीं होने से जहां खेतों में पड़े धान के बीजों को पक्षी चट कर रहे हैं तो वहीं नर्सरी के पौधे भी मुरझाने लगे हैं। जिन किसानों के पास पंप की व्यवस्था है वे खेत में नमी बनाए रखने के लिए पंपों से सिंचाई कर रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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