मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण व राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के शुभारंभ का सीधा प्रसारण कृषि विज्ञान केन्द्र में उपस्थित किसानों, ग्रामवासियों को दिखाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मधु परस्ते सरपंच गाजीपुर मंडला रही। जिन्होंने कृषकों से कृषि विज्ञान केन्द्र से तकनीकि मार्गदर्शन व पशुपालन विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त करने के लिए कहा।

एफएमडी को पूरी तरह नियंत्रण किया जाएगा : केन्द्र के प्रमुख डॉ.विशाल मेश्राम ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टीकाकरण द्वारा एफएमडी को 2025 तक पूरी तरह नियंत्रण किया जाना और 2030 तक इसका पूर्ण रूप से उन्मूलन करना तथा पशु नश्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान किया जाना है। डॉ.भारती पाठक उपसंचालक पशुचिकित्सा एवं डॉ.पीके ज्योतिषी, प्रभारी कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र ने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से कृषकों को अवगत कराया तथा उनकी समस्याओं को सुनकर उनका निदान किया। केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ.प्रणय भारती ने मुहपका-खुरपका एफएमडी को गंभीर रोग बताते हुए कहा कि यह विषाणु जनित रोग हैं जो विभक्त खुर वाले जानवरों जैसे गाय, भैंस, बकरी आदि को हो सकता है। जिसके लक्षण मुंह एवं पैर में छाले व सूजन, लंगड़ाना, दूध में कमी आदि है। इससे बचाव हेतु हर 6 माह में पशु को टीका लगवाना चाहिए जबकि ब्रूसेलोसिस के नियंत्रण हेतु 4 से 8 माह के उपर के मादा पशु को जीवन काल में एक बार टीका लगवाना चाहिए।