शशांक चौबे मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि

पिछले दस वर्ष में ऐसा मौका तीसरी बार ही आया है जब जिले की औसत बारिश से अधिक वर्षा हुई है। वरना दस सालों में 7 बार औसत से कम बारिश होते रही है। जिसका असर जिले के जलाशयों पर पड़ता था और इससे खेती प्रभावित होती थी। इस साल हुई बारिश ने जिले की औसत साढ़े 55 इंच बारिश को सितंबर माह के पहले पखवाड़ा में ही पार कर लिया है और अब तक 59 इंच बारिश हो चुकी है। माना जा रहा है कि बारिश अभी होना है। पूरे वर्ष की जब बारिश दर्ज होगी तो यह आंकड़ा और ऊपर चला जाएगा। इस वर्ष हुई बारिश से खेती को भरपूर लाभ मिलेगा। किसानों के चेहरों में भी खुशी देखी जा रही है।

पिछले कई वर्षों से बारिश जिले में कम होती रही है। हर साल वर्षा औसत से कम होती थी। जिससे जिले में कई जगह भयावह जलसंकट का सामना भी करना पड़ रहा था। जिले में वर्ष भर की औसत बारिस 1389.6 मिलीमीटर मानी गई है। सितंबर के पहले ही पखवाड़ा में इस औसत बारिश को छू

लिया। इस वर्ष अब तक 19 सितंबर तक 1473.3 मिमी बारिश हो चुकी है। वही पिछले पांच वर्ष में यह दूसरा मौका है। वर्ष 2013 के सितंबर माह में1433.4 इंच बारिश हो चुकी थी। 2011 के सितंबर माह में 1612 मिमी बारिश हुई थी।

एक दशक के अंदर वर्ष 2013 में हुई सबसे अधिक बारिश-बारिश के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पिछले एक दशक के अंदर वर्ष 2013 सर्वाधिक वर्षा वाला वर्ष रहा है। जब वर्ष भर में कुल 1733.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। इसके बाद वर्ष 2011 में 1723 मिमी बारिश हुई थी। वर्ष 2010 में 1286 मिमी, वर्ष 2012 में 916, 2014 में 1153.3, 2015 में 1214, 2016 में 1360 मिमी, 2017 में 877.9मिमी, 2018 में 1118 मिमी कुल बारिश हुई थी। वर्ष के 2013, 2011 और इस वर्ष 2019 में ही औसत से अधिक बारिश हुई है। वरना हर वर्ष औसत से कम वर्षा होती रही है।

बारिश थमने का करने लगे इंतजार-ग्लोबल वार्मिंग का असर देश, प्रदेश के साथ ही जिले में भी पड़ रहा है। पहले की अपेक्षा जहां तापमान हर वर्ष बढ़ते ही जा रहा है। मौसम गर्म हो रहा है वहीं अनियमित व कम बारिश हो रही है। जिस कारण गर्मी के सीजन में भी जो जलस्त्रोत आमजनों की प्यास बुझाते थे। अब वे समय पूर्व ही सूख जाते हैं। नदियों में भी पानी नहीं रहता। गर्मियों में स्थिति चिंताजनक थी। भीषण गर्मी और जलसंकट का सामना जिले में भी करना पड़ रहा था।

जून- जुलाई बारिश के लिहाज से अच्छा नहीं था- लोग जल्द बारिश का इंतजार कर रहे थे। जून एवं जुलाई का पहला पखवाड़ा बारिश के लिहाज से अच्छा नहीं रहा। लेकिन उसके बाद बारिश ने जो जोर पकड़ा तो फिर रूकने का नाम नहीं ले रही है। सितंबर माह में भी अच्छी बारिश अब तक हुई है। इतनी अधिक वर्षा हो गई है कि लोग अब बारिश थमने का इंतजार कर रहे हैं लोग कहने लगे हैं कि अब बहुत हो गया। बारिश रूक जाना चाहिए।

गत वर्ष जहां खरीफ एवं रबी सीजन में भी खेतों में पानी का संकट का सामना करना पड़ा था। खरीफ फसल के अंतिम दौर में जब पानी की जरूरत थी। तो कम पानी बरसा था और रबी फसल के लिए तो संकट ही हो गया था। बारिश न होने से असिंचित क्षेत्रों में लोगों ने खेतों में दाना हीं नहीं डाला था। अनेक खेत बिना फसल के ही रह गए थे। लेकिन इस साल हुई बारिश से जिले वासियों के लिए खुशी लेकर आई है। अच्छी बारिश इस वर्ष हुई है। जिले के सभी जलस्त्रोत लबालब भर गए हैं। जिले के सभी बड़े जलाशय, कुआं, तालाब, इस समय भरे हुए हैं और बारिश होने पर कई तालाब फूटने तक की स्थिति में आ गए हैं। ऐसा पिछले कई वर्षों बाद हुआ है। वरना गर्मी आने के पहले ही इनमें पानी खत्म हो जाता था और मवेशीयों तक के लिए पानी नहीं बच रहा था। लेकिन इस वर्ष हुई बारिश से प्यासी धरती तृप्त हो गई है।

हर वर्ष बढ़ रहा है तापमान, कई प्रकार की बीमारियां भी बढ़ी- गर्मी हर साल बढ़ते जा रही है। बारिश सहनशक्ति से अधिक हो रही है। जिसके चलते कई बीमारियां भी लोगों को हो रही है। मंडला शहर में 2018 का अधिकतम तापमान जहां 45 डिग्री तक पहुंच गया था। वहीं

इस वर्ष 2019 में यह 45.6 डिग्री तक पहुंच गया था। इस साल हुई बारिश ने जहां लोगों को राहत दी है। वहीं अब वर्षा जल का पानी सहेजने के लिए भी लोग प्रेरित हुए हैं कि आने वाले समय में जलसंकट का सामना न करना पड़े इसके लिए विभिन्न उपायोग को लोग जन जागरुकता के माध्यम से अपनाने में लग गए हैं।