मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि

कृषि विज्ञान केन्द्र मंडला द्वारा किसानों व आम जनता को गाजर घास के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य गाजरघास जागरूकता व उन्मूलन सप्ताह का आयोजन 16 से 22 अगस्त तक किया जा रहा है। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख डॉ.विशाल मेश्राम ने बताया कि गाजर घास या चटक चांदनी (पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस) एक घास है जो बड़े आक्रामक तरीके से फैलती है। इस खरपतवार का भारत में प्रवेश तीन दशक पूर्व अमेरिका या कनाडा से आयात किए गए गेहूं के साथ हुआ। यह हर तरह के वातावरण में तेजी से उगकर फसलों के साथ साथ मनुष्य और पशुओं के लिए भी गंभीर समस्या बन जाती है।

एक पौधा पैदा करता है 25000 बीज

प्रत्येक पौधा लगभग 25000 बीज पैदा करता है जो शीघ्र ही जमीन में गिरने के बाद प्रकाश और अंधकार में नमी पाकर अंकुरित हो जाते हैं। यह पौधा 3-4 माह में ही अपना जीवन चक्र पूरा कर लेता है। एक वर्ष में इसकी 3 से 4 पीढ़ियां पूरी हो जाती हैं। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. प्रणय भारती ने गाजर घास को मनुष्य और पशुओं के लिए भी एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इस विदेशी खरपतवार के स्पर्श मात्र से खुजली व एलर्जी की गंभीर समस्या तो पैदा ही होती है। साथ ही इसके परागण दमा, अस्थमा व निमोनिया रोगों को बढ़ाने व घातक प्रभाव उत्पन्न करने वाले होते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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