मंडला (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्तमान में चल रहे कोरोना संक्रमण काल के द्वारा लाकडाउन की स्थिति में जिले के कृषकों तक कृषि की उन्नत तकनीकीयों जिससे आने वाले खरीफ मौसम में अधिक पैदावार प्राप्त की जा सके। इस हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र मंडला के वैज्ञानिकों एवं रिलांयस फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में आनलाइन एवं डायल ऑउट कांफ्रेंस कॉल के माध्यम से पहुंचाने का सतत कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र मंडला एवं रिलायंस फाउंडेशन द्वारा मंडला विकासखंड के ग्रामों बाजा-बोरिया, बेहंगा, भवंरदा, बिछुआ, धोरा नाला, मलधा आदि ग्राम पंचायतों के 55 कृषकों को खेती की उन्नत तकनीकी से परिचित करवाया गया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ विशाल मेश्राम ने बताया कि धारवाड़ या उन्नत सघनीकरण या एसपीआइ पद्धति अरहर के अधिक उत्पादन हेतु उन्नत तकनीक है। इसमें बहुत कम बीज एक हेक्टेयर (ढाई एकड़) की बुवाई हेतु केवल 2 किलोग्राम लगता है। जब कि पारंपरिक देशी विधि में बुवाई हेतु 10-12 किग्रा बीज लगता है। इस विधि में रोपणी पॉलिथिन बैग में तैयार की जाती है। नर्सरी के लिए मजबूत छिद्रयुक्त पॉलिथिन प्रयोग की जाती है। प्रत्येक थैली में छनी हुई स्वास्थ्य मिट्टी तथा कंपोस्ट खाद 60ः40 के अनुपात में मिलाकर भरा जाता है। मिश्रण में सिंगल सुपर फास्फेट और म्यूरेट ऑफ पोटास मिलाया जाता है। प्रत्येक थैली में मिश्रण भरकर हल्की सिंचाई की जाती है तथा इसमें एक-एक उपचारित बीज प्रत्येक पॉलिथिन में लगाया जाता है। अर्धधूप-अर्धछांव वाले स्थान में रखकर प्रत्येक दूसरे दिन झारे की सहायता से हल्की सिंचाई शाम के समय की जाती है। इससे अरहर की परिपक्वता जल्दी आ जाती है। 25 से 30 दिनों पश्चात पौधों की खेत में रोपाई की जाती है। खेत में पौधे से पौधे की दूरी 3 फिट और कतार से कतार की दूरी 4 फिट रखी जाती है। रोपाई के 20 से 25 दिन पश्चात प्रत्येक पौधे की शीर्ष कलिका तोड़ दी जाती है। जिसके फलस्वरूप पौधे में शाखाएं अधिक निकलती है। इस विधि से खेती करने पर 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टयर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। अंत में किसानों के प्रश्नों ग्राम बाजा बोरिया के उमाकांत मरावी, ग्राम ईष्वरपुर के राजेश द्वारा धान में खरपतवार एवं दीमक नियंत्रण में धान की बालियों में गठानों की रोकथाम एवं धान की बालियों में दाने नहीं बनने की समस्या रखी गई। जिसका इस आनलाइन वर्कशाप में मुख्य मार्गदर्शक केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल मेश्राम एवं डॉ. आरके सिंह आत्मा परियोजना मंडला द्वारा त्वरित निदान किया गया। इस प्रशिक्षण में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आरपी अहिरवार, डॉ प्रणय भारती व रिलांयस फाउंडेशन के दिनेश यादव, भरत कुमार, ईश्वर सिंग व बाबू लाल की सक्रिय भूमिका रही।

Posted By: Nai Dunia News Network

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