मंडला (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुख्यालय नारायणगंज बस स्टैंड से पड़रिया ग्राम को जोड़ने के लिए 800 मीटर सड़क के लिए तरसते पड़रिया गांव के लोग चुनावी झूठे वादों और चुनावी मुद्दों का शिकार है। पड़रिया कच्ची सड़क मार्ग सिर्फ पगडंडी बन कर रह गई है। इस सड़क के मुद्दे और वादों ने जिले से ले कर जनपद के नेताओ को जन्म दिया, अब तो विधायक और संसद से भी ग्राम वासियों को कोई उम्मीद नहीं है।

इस सड़क के निर्माण के लोगों स्थाई नेताओ के संघर्ष और इसके इतिहास मे नजारे डाले तो भूकंप ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा में आए 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसे पड़रिया गांव के लोगों ने सड़क की माग की पर वह आश्वासन ही बन कर रह गए। 2004 में मुल्लू सिंह मरावी के नेतृत्व में गांव के बुजुर्ग नेतृत्व के साथ मिलकर भूख हड़ताल तक हुई और अधिकारियों द्वारा सिर्फ उस समय आश्वासन ही मिला, 28 दिसंबर 2020 को भारतीय आम नागरिक देश संघर्ष युवा संगठन से दुर्गेश सिंगरोरे लोधी, माननीय मुल्लू सिंह मरावी के नेतृत्व में अनशन हुआ और जिला अधिकारियों द्वारा आश्वासन मिला कि इस सड़क को प्रधानमंत्री मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जोड़ कर जल्द से जल्द निर्माण होगा।

परंतु आज तक कोई इस सड़क की कोई सुध लेने बाला कोई नहीं है,, आज और अभी इस सड़क की दुर्दशा देखती ही बनतीं हैं। इस सड़क में मोटर साइकिल चलना तो दूर की बात है, इस सड़क में पैदल चला भी नहीं जा सकता है। ग्राम वासियों को 3 से 4 किलो मीटर का लंबा सफर तय करना होता है। इस सड़क को लेकर ग्राम पंचायत पड़रिया द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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