Mandla News शशांक चौबे, मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि। हर साल बड़ी संख्या में जिले से पलायन कर मजदूर काम के सिलसिले में बड़े महानगरों की ओर जाते हैं। पर इस साल कोरोना महामारी इन मजदूरों को ऐसा सबक सिखाया है कि उन्हें काम छोड़कर वापस अपने गांव लौटना पड़ा। ऐसे समय में प्रवासी मजदूरों ने अब अपने क्षेत्र में ही रहकर रोजगार की तलाश शुरू कर दी। ऐसा रोजगार जिसे कर वे स्वयं आत्मनिर्भर बन सकें। जिससे हर साल उन्हें पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।

मंडला जिला मचला गांव निवासी प्रवासी मजूदर धूपलाल धुर्वे अपने ही गांव में एक एकड़ में सब्जी उत्पादन शुरू कर गांव से बाहर जाने वाले अन्य मजदूरों के लिए रोल मॉडल बन गया है। । जिन्होंने सब्जी उत्पादन कर लागत से अधिक रकम पहली ही फसल तुड़ाई में प्राप्त कर ली है, आगे अभी कई तुड़ाई होना है, जिससे उन्हें अब आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

गांव में नहीं था रोजगार तो जाते थे बाहर

गांव में कोई रोजगार नहीं था, तो छत्तीसगढ़ जाकर मजदूरी कर ग्रामीण धूपलाल परिवार चला रहा था। लेकिन कोरोना संकट की वजह से उसे गांव लौटना पड़ा। अब परिवार के समक्ष फिर आर्थिक संकट आने लगा। तब उसने खेती कर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी। किसान धूप लाल ने बताया के एक एकड़ में उसने टमाटर,भटा व मिर्च लगाया था। अब फसल उत्पादन शुरू हो गया है। पहली ही कमाई उसे लगभग 30 हजार की आय हुई है। सब्जी लगाने में 25 हजार की लागत आई है। पर अब तो पहली तुड़ाई में लागत निकल आई है। किसान का कहना था कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आरपी अहिरवार, डॉ विशाल मेश्राम से मिली सलाह व मार्गदर्शन के बाद उसने यह काम शुरू किया है। ये पहले ही कर लिया होता तो शायद उसे घर से दूर पलायन नहीं करना पड़ता।

गांव में उसे देखकर अन्य किसान हो रहे प्रेरित

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक विशाल मेश्राम ने बताया कि किसान द्वारा ड्रिप पद्धति से अपने गांव में ही सब्जी उत्पादन गरीब रोजगार कल्याण योजना के तहत शुरू किया है। जब किसान की पहली फसल निकली है, तो उसे देखकर परंपरागत खेती करने वाले अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। करीब 10 किसान ऐसे हैं जो वे भी सब्जी उत्पादन के लिए तैयारी कर रहे हैं। चार किसान तो ऐसे हैं। जिन्होंने शासन की किसी योजना के बगैर ही सब्जी उत्पादन करने की ठान ली है, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत हों। गांव में एक तरह से क्रांति सी आ गई है। हर किसान धूपलाल द्वारा उगाई सब्जी और उसे हो रहे लाभ को देखकर प्रेरित हाे रहा है। वहीं अन्य किसानों को भी वह प्रशिक्षण दे रहा है कि कैसे सब्जी उत्पादन करना है।

छग गया था काम करने धूपलाल, मई में हो गया बेरोजगार

-छग में करने गया था प्रवासी मजदूर धूपलाल धुर्वे

- मई में लौटा वापस,

-कृषि विज्ञान केंद्र मंडला के माध्यम से गरीब रोजगार कल्याण अभियान के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण लिया।

- ड्रिप इरिगेशन द्वारा मिर्ची, भटा एवं टमाटर का उत्पादन कार्य प्रारंभ किया।

- 3 क्विंटल मिर्च बेचकर 18 हजार व 2 क्विंटल टमाटर बेचकर 8 हजार रुपये कमाए।

इनका कहना

प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान रोजगार विहीन हो घर वापस होने मजबूर हो गया था। परंपरागत खेती छोड़कर कृषि विज्ञान केंद्र मंडला के माध्यम से धूपलाल ने गरीब रोजगार कल्याण अभियान के तहत ड्रिप पद्धति से उन्नत सब्जी की खेती करना शुरू किया है। उसे देखकर गांव में क्रांति सी आ गई है। 10 किसान भी उसे देखकर प्रेरित हुए हैं। यह पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है।

डॉ विशाल मेश्राम,कृषि वैज्ञानिक, प्रभारी केंद्र विज्ञान केंद्र मंडला

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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