आरटीपीसीआर जांच कराने कम ही पहुंच रहे लोग

निजी अस्पतालों से उपचार कराकर सात दिन में ठीक हो रहे मरीज

सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है जिले में संक्रमित

मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में सरकारी आकड़ों को देखा जाए तो कोरोना का संक्रमण नियंत्रण में दिख रहा है, पर जब मेडिकल स्टोर्स से बिक रही टेस्टिंग किट और निजी क्लिनिक और अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों की संख्या देखी जाए तो इनमें जमीन-आसमान के समान अंतर दिखाई दे रहा है। लोग सरकारी अस्पतालों में जाकर आरटीपीसीआर टेस्ट कराने के बजाय किट से टेस्ट कर ही उपचार करा रहे हैं। सात दिन में ठीक भी हो रहे हैं। निजी चिकित्सकों व अन्य स्त्रोत की माने तो जिले में भी तीसरी लहर में लगभग 2 हजार से अधिक कोरोना मरीज हो गए है। जबकि अभी सरकारी आकड़ा 207 पर ही अटका हुआ है।

मंदसौर के पड़ौसी जिलों नीमच, रतलाम व राजस्थान के प्रतापगढ़ में सरकारी आंकड़े में भी प्रतिदिन औसत 100 से 150 के बीच मरीज मिल रहे हैं, पर मंदसौर जिले में यह दैनिक औसत भी 20 से ज्यादा नहीं हो रहा है। इसका मतलब यही हो रहा हैं प्रशासनिक अमला पर्याप्त सैंपल नहीं कर रहा है और कम मरीज पर अपनी पीठ थपथपाकर खुश है। कोविड-19 के नए वैरिएंट को लेकर लोग तो लापरवाही कर ही रहे हैं, पर प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग भी खासा लापरवाह बना हुआ है। जबकि शहर की एक महिला की कोविड के कारण मौत भी हो चुकी है और एक स्वास्थ्यकर्मी की स्थिति भी गंभीर हो गई थी। इधर बाजार में मेडिकल स्टोर्स कोरोना टेस्टिंग किट की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है। अभी एक माह में ही जिले में दो से ढाई हजार टेस्टिंग किट बिक चुकी है। निजी अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों को भी सीधे यही टेस्ट कराया जा रहा है। इसमें संक्रमण का लक्षण मिलते ही उनका उपचार भी शुरू किया जा रहा है। अभी भी शहर में कई घर एसे हैं जहां एक न एक सदस्य सर्दी-जुकाम के साथ गले के संक्रमण से पीड़ित है। सात दिन में ठीक होने के चलते ही अधिकांश लोग आरटीपीसीआर जांच कराने जा ही नहीं रहे हैं।

न घर-घर सर्वे हो रहा, न ही रेंडमली जांच

इस बार जिला प्रशासन ने घर-घर सर्वे करने भी कोई टीम नहीं भेजी है और न ही रेंडमली जांच की जा रही है। इससे बिना लक्षण वाले मरीज तो मिल ही नहीं रहे हैं और जिन्हें थोड़े-बहुत लक्षण हैं वह निजी चिकित्सकों के यहां पहुंचकर उपचार करा रहे हैं। जबकि इंदौर सहित अन्य जिलों में तो सार्वजनिक स्थलों पर जा रहे सभी लोगों के सेंपल लिए जा रहे हैं।

एक दिन में मिले 17 मरीज

गुरुवार को सुबह-शाम की रिपोर्ट में 17 मरीज मिले हैं। इनमें 14 मंदसौर, 1 असावती, 1 दमदम, 1 मोरखेड़ा(सीतामऊ) हैं। इसके साथ ही तीसरी लहर में कुल 207 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 106 अभी सक्रिय है। 6 जिला अस्पताल में भर्ती है वहीं 100 होम आइसोलेट हैं। गुरुवार को 10 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया गया।

-लोग टेस्ट कराने नहीं आ रहे हैं जबकि लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है कि सर्दी जुकाम या अन्य समस्या हो तो आकर जांच करवाएं। टेस्टिंग किट को सरकार ने ही मंजूरी दी है, इसलिए बाजार में बिक रही है। हम भी रोज टारगेट के अनुसार लगभग 800 से ज्यादा सैंपल की जांच कर रहे हैं।

-डा. केएल राठौर, सीएमएचओ

-मास्क लगाएंगे तो ही संक्रमण से बचे रहेंगे। जो लोग मास्क लगाने में लापरवाही कर रहे हैं वह अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। मास्क और दो गज की दूरी हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है।

-निखिल जैन

-कई सारी जांच में यह सिद्ध हो चुका है कि मास्क नहीं लगाने वालों की जिंदगी कभी भी खतरे में पड़ सकती है। कोरोना महामारी का प्रकोप हम सब पहले भी देख चुके हैं। अपनी सुरक्षा अपने हाथ में हैं, इसलिए मास्क अवश्य लगाएं।

-शुभम शर्मा

-मास्क हमें हर प्रकार के संक्रमण से बचाता है। फिर भी कई लोग मास्क लगाने के प्रति जागरूक नहीं है। कुछ लोगों की लापरवाही दूसरों के लिए भी ख़तरा बन सकती है।

-काशिका चौहान

-मास्क ही हमारा सुरक्षा कवच है। मास्क जागरूकता के लिए अभियान चलना चाहिएं। जो लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं उन पर सख्ती के साथ कार्रवाई होना चाहिए।

-ऋतु कुमावत

-हम सभी को मास्क और दो गज की दूरी की अहमियत को समझना चाहिए। मास्क लगाएंगे तो स्वयं के साथ अपना परिवार भी सुरक्षित रहेगा। मास्क के कारण संक्रमण फैलने से भी रुकेगा इसलिए सभी को अनिवार्य रुप से मास्क लगाना चाहिए।

-राजेंद्र भावसार

-मेरा मास्क मेरी सुरक्षा के लिए प्रशासन जागरुक करने के लिए कार्य कर रहा है। लोगों को अपना दायित्व समझना चाहिएं। वैक्सीन की दोनों डोज लगने के बाद भी हम पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं इसलिए मास्क हमेशा लगाकर रखे। लोगों से शारीरिक दूरी बनाकर रखें।

- राजेश खेत्रा

Posted By: Nai Dunia News Network

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