मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित चिंताहरण द्विमुखी गणपति के बारे में मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से ही सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मन प्रफुल्लित हो उठता है। यह भी माना जाता है कि यदि कोई आर्थिक परेशानी में है, व्यापार- व्यवसाय में नुकसान हो रहा है, कामकाज ठीक नहीं चल रहा है और कोई राह नज़र नहीं आ रही है तो मंदसौर के गणपति चौक स्थित चिंताहरण गणेश के दर्शन कर अपनी सभी परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

श्री चिंताहरण गणपति का यह द्विमुखी मंगलमय स्वरूप अपने आप में अनुपम एवं अद्वितीय है। एक ही पाषाण पर निर्मित विशाल आकार की द्विमुखी बड़ी प्रतिमा संभवतः पूरे देश में कहीं नहीं है। भगवान गणेश एक ओर पंचशुंडी के रूप में हैं तथा दूसरी ओर सेठ के रूप में भावमयी मुद्रा में दर्शनीय हैं। यहां दूर-दूर से कई भक्त आकर इस द्विमुखी गणेश प्रतिमा के दर्शनकर अपनी मनमांगी मुराद पूरी करते हैं।

बताया जाता है कि लगभग 150 वर्ष पुरानी प्रतिमा मंदसौर के उत्तर दिशा में स्थित नाहर सैय्यद तालाब से मिली थी। जब इसे प्रतिष्ठा के लिए बैलगाड़ी से नरसिंहपुरा की तरफ ले जाया जा रहा था तो वर्तमान मंदिर वाले स्थान पर बैलगाड़ी रुक गई। यहां से यह आगे ही नहीं बढ़ी। इस जगह श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर बना दिया गया। करीब सौ सालों से यह मंदिर विद्यमान है। भक्त यहां आकर मुराद मांगते हैं और पूरी होने पर बप्पा को लड्डू चढ़ाकर खुश करते है।

Posted By: Saurabh Mishra

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