मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। श्री हनुमन्त भागवत कर्मकांड परिषद एवं भक्तों द्वारा भगवान पशुपतिनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित की जा रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन भागवताचार्य पं. मुकेश शर्मा नारायणजी ने कहा कि इस संसार में किसी भी भक्त को भगवान दुखी नहीं रखते हैं। वह तो दुख इंसान के भाग्य में अपने नसीब से आता है। भगवान तो अपने सभी भक्तों के दुखों को अपने भक्तों की रक्षा के लिए गिरिराज पर्वत के समान एक ही उंगली पर उठा लेते हैं।

हर युग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए ही भगवान ने कई रूप में अवतार लिया है। वरना पापियों का सर्वनाश तो भगवान अपनी छाया से ही कर सकते थे। लेकिन हर युग में अपने सच्चे भक्तों को दर्शन देने के लिए एवं उनकी रक्षा के लिए होता है अवतार भगवान तो सदैव अपने भक्त की सच्ची भक्ति एवं भावना के ही प्रयासें होते है, भगवान को भोग तो सच्ची भक्ति का ही अर्पण होता है। सच्ची भक्ति में भगवान 56 भोग के साथ-साथ अपने सच्चे भक्तों के घर रूखे-सुखे भोजन का भी भोग लगाते है। जिस प्रकार अपने सच्ची भक्त कर्मा के हाथों से खिचड़े का भोग लगाया। जिस प्रकार दुर्योधन के राजमहल वाले 56 भोग को ना स्वीकार करते हुए अपने सच्चे भक्त विदुरजी महाराज के घर विदुराणीजी के हाथों से केले के छिलके का भी भोग लगाया, जिस प्रकार अपने गरीब मित्र मंधु मंगल के हाथों से भी उसके घर की बासी कढ़ी का भोग लगाकर कर भी सच्चे भक्त की भक्ति को स्वीकार किया है। कथा के पांचवे दिवस में भगवान श्रीकृष्ण बाल उत्सव का वर्णन करते हुए पं. नारायणजी ने कहा भगवान श्रीकृष्ण का आगमन नंद बाबा एवं मां यशोदा को वृद्धावस्था में संतान का सुख प्राप्त करवाने के लिए होता है।

भगवान श्रीकृष्ण के आगमन पर पूरे वृंदावन में माखन की होली खेलकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। भगवान श्रीकृष्ण के इस बाल स्वरूप दर्शन के लिए सभी देवी देवताओं का आगमन पावन भूमि वृंदावन में होता है। भगवान शिवशंकर भोलेनाथ भी एक ओघड़ी बाबा का रूप बनाकर मां यशोदा से नंद के लाला के दर्शन की हठ लगाते हैं। भगवान की ही लीला से भगवान श्रीकृष्ण स्वयं भगवान भोलेनाथ के दर्शन को प्राप्त करते हैं। इस बाल स्वरूप में ही मृत्यु के डर से मामा कंस द्वारा कई राक्षसों को भगवान को मारने के लिए भेजा जाता है। उन राक्षसों को भी मार कर सबका उद्धार करते हैं। अपना पूरा बाल स्वरूप गौमाता की सेवा को समर्पित करते हैं। अपनी माखन चोरी की लीला से मां यशोदा एवं गोपियों का मन मोहित कर देते हैं। पोथी की आरती वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम बटवाल एवं नंदलाल रेड़वा, चमरलाल गेहलोद, कालुसिंह गर्रावद फारेस्ट आदि उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close