मंदसौर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। साध्वी श्री कुसुमवतीजी की 96 वीं जयंती पर रविवार को शास्त्री कालोनी स्थित जैन दिवाकर स्वाध्याय भवन में सामूहिक एकासने किए गए। 250 श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक एकासने किए और 24 घंटे में मात्र एक बार आहार किया। श्रमणसंघीय उपाध्याय शताब्दी नायक श्री मुलमुनिजी के देवलोकगमन होने के कारण एकासने के अतिरिक्त सभी कार्यक्रम स्थागित रखे गए। चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी डा. दिव्यप्रभाश्रीजी मसा आदि ठाणा चार की निश्रा में आयोजित सामूहिक एकासने में 250 श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। साध्वी डा. दिव्यप्रभाश्रीजी ने कहा कि श्री मुलमुनिजी मसा देश के सबसे वरिष्ठ संतों में से एक थे। उनका देवलोकगमन श्रमणसंघ के लिए अपूरणीय क्षति है संसार में जन्म व मृत्यु दोनों निरतंर चलने वाली प्रक्रिया है उनका देवलोकगमन समाधि पूर्व संयम-साधना के साथ हुआ। उन्होंने 100 वे जन्मदिवस पर संथारा ग्रहण किया। मात्र एक दिवस की साधना में महाप्रयाण यात्रा पर प्रस्थान कर लिया। जो समाधि भरण को प्राप्त होते हैं उनकी आत्मा को निश्चित सदगति मिलती है। उन्होंने अधिकांश जीवन संयम धर्मसाधना में लगाए।

श्री मुलमुनिजी मसा के देवलोकगमन पर धर्मसभा में नवकार महामंत्र का जाप भी किया गया। साध्वी डा. दिव्यप्रभाश्रीजी, साध्वी श्री निरूपमाजी, साध्वी श्री सौम्याश्रीजी मसा, श्री आर्याश्रीजी मसा ने सभी श्रावक-श्राविकाओं को नवकार महामंत्र का जाप कराया। साध्वी डा. दिव्यप्रभाश्रीजी मसा के दर्शन वंदन करने आसनी डबोक (उदयपुर), चित्तौ्‌ड़गढ़, किशनगढ़, शंभूपुरा व पंजाब से लगभग 150 श्रावक-श्राविकाएं मंदसौर पहुंचे। रविवार को जैन दिवाकर स्वाध्याय भवन में आयोजित धर्मसभा में इन सभी श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीजी के दर्शन वंदन किए। डबोक व कपासन श्रीसंघ पदाधिकारियों व श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वी डा. दिव्यप्रभाश्रीजी से 2022 का चातुमार्स डबोक व कपासन में करने की विनती की। साध्वीजी ने उचित समय पर निर्णय करने की बात कही।

मासखमण की तपस्या पूरी हुई, वरघोड़ा व रथयात्रा निकली

मंदसौर। सपना संदीप धारीवाल व सोनाली जिनेंद्र धारीवाल ने मासखमण के 30 उपवास की तपस्या रविवार को पूर्ण की है। साध्वी श्री मोक्षज्योतिश्रीजी, श्री आदर्शज्योति श्रीजी, श्री आशयज्योतिश्रीजी व श्री आर्यज्योतिश्रीजी की प्रेरणा से तपस्या पूरी होने पर रविवार को वरघोड़ा व व प्रभु श्री शांतिनाथजी की रथयात्रा श्री केशरिया आदिनाथ श्रीसंघ के तत्वावधान में निकली। साध्वीजी की पावन निश्रा में दोनों तपस्वियों की शोभायात्रा व प्रभुजी की रथयात्रा श्री यश बालाजी मंदिर किटयानी से प्रारंभ हुई। इसके बाद यह शोभायात्रा महावीर भवन पहुंची। यहां साध्वीजी ने सभी को मांगलिक श्रवण कराई। मार्ग में जैन परिवारों ने प्रभु शांतिनाथजी की प्रतिमा की गहुली की। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर चल समारोह में शामिल हुई। प्रभु महावीर व प्रभु शांतिनाथजी के जयकारे लगाते हुए धर्मालुजन चल समारोह में शामिल हुए।

चौबीसी व भक्ति संगीत हुआ

इससे पहले शनिवार को दोनों तपस्वियों के अनुमोदनार्थ रूपचांद आराधना भवन चौधरी कालोनी में महिलाओं की चौबीसी हुई। रात्रि में भक्ति संगीत में घसोई के संगीतकार सजय छाजेड़ ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। एक के बाद एक भक्ति गीतों की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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