नशा ही बुराई, बीमारी और अपराध का जनक

राष्ट्रसंत श्री कमलमुनि कमलेश ने कहा

मंदसौर। नशा नाश का द्वार है। इससे धन की बर्बादी होती है और शरीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। चरित्र की भी होली जलती है। धर्म की आड़ में नशे को महामंडित करने वाले धर्म के सिद्धांतों की हत्या करने का पाप कमा रहे हैं। विश्व का कोई भी धर्म नशे को अपनाने की इजाजत नहीं देता है। धर्म और नशे में 36 का आंकड़ा है। सरकार को नशे से जितनी राजस्व आय होती है उससे अनंत गुना ज्यादा अपराध को नियंत्रण करने में जैसे एक्सीडेंट और बुराइयों से निपटने के लिए लगाना पड़ता है। बुराई, बीमारी और अपराध का जनक ही नशा है। इससे

युवा पीढ़ी खोखली हो रही है।

यह बात राष्ट्रलसंत श्री कमलमुनि कमलेश ने कही। वे जैन दिवाकर प्रवचन हाल में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी धर्माचार्यों को मिलकर नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प लेना चाहिये। सरकार लाइसेंस देती है और दूसरी तरफ नशामुक्ति का ढोंग करती है। नशा सेवन करने वाले को आर्थिक सहायता देना फूटे मटके में पानी भरने के समान है। राष्ट्रसंत श्री कमलमुनि के नेतृत्व में शहर के प्रबुद्ध व्यक्तियों की बैठक हुई। इसमें गुरुचरण बग्गा, रविंद्र पांडे, राजाराम तंवर, बाबूलाल जैन, रूपनारायण मोदी, सूरजमल गर्ग, रमेशचंद्र खमनी, चंद्रकांत कियावत,

कपिल शर्मा, दिलीप शर्मा, कन्हैयालाल सोनगरा आदि की मौजूदगी में हर घर तिरंगा, नशामुक्ति, शिवना शुद्धिकरण, शुद्ध पर्यावरण और पालीथिन मुक्ति के लिए अभियान चलाने का प्रस्ताव पास किया गया। श्री घनश्याम मुनिजी के 31 उपवास, श्री अक्षत मुनिजी के 8, सेवक भैरु के 28, प्रियंका बोहरा के 40, तलेसरा के 29 उपवास की तपस्या चल रही है। मंगलाचरण श्री कौशलमुनिजी ने मंगलाचरण किया। संचालन विजय खटोड़ ने किया। रक्षाबंधन का पांच दिवसीय कार्यक्रम अभा जैन दिवाकर विचार मंच की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसे 11 अगस्त से 15 अगस्त मनाया जाएगा। 12 अगस्त को जिला जेल में सुबह 9 बजे व्यसनमुक्ति ह्रदय परिवर्तन पर प्रवचन एवं प्रेमी बंधुओं साथ रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा।

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