आलोक शर्मा/इब्राहिम अजमेरी, मंदसौर/बाजखेड़ी (नईदुनिया)। मंदसौर जिले की मंडियों में 'ऊंटी' लहसुन के अच्छे भाव देखकर किसानों ने अगस्त-सितंबर में महंगे बीज लेकर इसकी बोवनी कर ली, लेकिन उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। चिंता इतनी विकट हो गई है कि 150 से अधिक किसान सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर सेट लगा रहे हैं। इसके लिए वे 50 हजार से एक लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं।

डिगांव के किसान जगदीशदास बैरागी ने बताया कि पिछले साल हुई जोरदार बारिश से कुओं में थोड़ा-बहुत पुराना पानी भरा हुआ है। इससे लहसुन की सिंचाई कर रहे हैं। यह खत्म होते ही चिंता बढ़ जाएगी। किसान भूपेंद्र आंजना और गोपाल दर्जी ने बताया कि तीन बीघा में ऊंटी लहसुन की बुवाई के लिए 37 हजार 500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से डेढ़ लाख रुपये के बीज लाए हैं।

अब बारिश ने दगा दिया तो कर्ज लेकर स्प्रिंकलर लगाए हैं। मन्नाालाल चौहान ने बताया लहसुन में बुवाई से लेकर खाद-बीज, दवा छिड़काव के साथ ही फसल कटाई व मंडी पहुंचाने तक लगभग चार लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इतनी मेहनत के बाद भाव सही नहीं मिले तो घाटा होता है।

इसलिए है ऊंटी की मांग

-दक्षिण भारत में अचार में बहुत उपयोगी, मांग ज्यादा।

-ऊंटी लहसुन की उपज एक बीघा में 30-35 क्विंटल तक होती है, जबकि देशी लहसुन 15 से 25 क्विंटल तक।

-जिन खेतों में देशी लहसुन का उत्पादन बंद हो जाता है, वहां भी ऊंटी लहसुन का उत्पादन हो जाता है।

-कोई बीमारी भी नहीं लगती। देर से अंकुरित होने पर उत्पादन अच्छा होता है।

-भाव 20 से 25 हजार रुपये क्विंटल, जबकि देशी लहसुन का भाव छह से 15 हजार रुपये।

-ऊंटी लहसुन की कली बड़ी होती है, जबकि देशी लहसुन की कली छोटी रहती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020