विधायक सिसौदिया ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

मंदसौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मंदसौर शहर में लगभग 40 वर्ष पूर्व बुगलिया डायवर्शन योजना के तहत पंपिंग स्टेशन बनाए गए थे। इन्हें धूलकोट योजना के नाम से जाना जाता है। योजना लगभग 35 वर्षों से जल संसाधन विभाग के अधिकार क्षेत्र में थी पांच-सात वर्षों से यह योजना नगर पालिका को हस्तांतरित कर दी गई है। मंदसौर शहर को भयावह जलप्रवाह से बचाने के लिए आवश्यक है कि योजना की डिजाइन पर एक बार पुनः विचार कर डीपीआर बनाई जाए।

यह मांग करते हुए विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ, नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह, प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा को पत्र लिखा है। सिसौदिया ने कहा कि शहर में इस बार 80 इंच से अधिक वर्षा होने तथा शिवना नदी एवं बुगलिया नाले के अत्यधिक जलप्रवाह के कारण मंदसौर के हालात 40 वर्ष पुरानी स्थिति जैसे बन गए थे। इसलिए बुगलिया की महत्वाकांक्षी योजना पर एक बार पुनः मंथन एवं विचार-विमर्श कर नए सिरे से क्रियान्वयन करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। बुगलिया नाले का डायवर्शन वर्तमान में खानपुरा इदगाह के पास से होकर तथा कुछ हिस्सा खानपुरा में शनि मंदिर की ओर परिवर्तित किया गया है जो शिवना नदी में तीन छत्री बालाजी के समीप मिलता है। इससे ग्राम हैदरवास, अशोक नगर, इदगाह, खानपुरा, शनि मंदिर, राजीव कॉलोनी को प्रभावित करता है। नीलमशाह दरगाह के पास धूलकोट योजना की पाल पर पम्प स्टेशन नहीं है। वॉल खोलकर पानी को बाहर छोड़ा जाता है। शिवना नदी उफान पर होने पर यह वॉल नहीं खोला जा सकता है।

बायपास पर एक डायवर्शन और बनाया जाए

बुुगलिया का एक डायवर्शन बायपास के किनारे होते हुए शिवना नदी में खिड़की माता मंदिर के यहां किया जा सकता है। लक्कड़पीठे में मोनो ब्लॉक विद्युत पम्प से लगे और जमीनी सतह पर होने से थोड़ी बरसात में ही डूब जाते हैं। इस पम्प हाउस की क्षमता भी बढ़ना चाहिए। इसकी ऊंचाई बढ़ाकर यहां के विद्युत ट्रांसफॉर्मर को भी ऊंचे स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। किला रोड पर बने पम्प हाउस की क्षमता बढ़ाना चाहिएं। ताकि सम्राट बाजार, बंडीजी का बाग, बस स्टैंड, दयामंदिर रोड आदि को जलभराव से निजात मिल सके। सिसौदिया ने कहा कि तेलिया तालाब के वेस्टवियर का पानी नाले से महादेव नगर, नरसिंहपुरा, मदारपुरा, नयागांव, खानपुरा, ईदगाह के पास अशोक नगर की ओर जाता है उस पर भी गंभीर विचार कर उसकी भी गहराई एवं चौड़ाई बढ़ाने की आवश्यकता है।