कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पड़ोसी रतलाम जिले के साथ ही राजस्थान व गुजरात के पशु लंपी वायरस बीमारी के प्रकोप से पीड़ित हैं। जिले में इससे रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग व डेयरी विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को निरंतर भ्रमण करने को कहा गया हैं।

कलेक्टर गौतमसिंह ने बताया कि लंपी पशुओं की एक विषाणुजनित बीमारी है जो मच्छर, मक्खी एवं टिक्स (चिंचोड़ी/चींचड़े) आदि के काटने से एक पशु से दूसरे पशु मे फैलती है। बीमारी में अधिकतर संक्रमित पशु 2-3 सप्ताह में ठीक हो जाते है एवं मृत्यु दर 1-5 प्रतश है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी / कर्मचारी लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर जागरूकता अभियान चलाए। पशुपालक बीमारी के शुरूआती लक्षण जैसे कि हल्का बुखार एवं पूरे शरीर की चमड़ी में गठाने (2-3 सेमी गोल उभरी हुई) दिखाई देने पर तत्काल निकटस्थ पशु चिकित्सक को सूचित करें।

पशुपालकों के लिए सावधानी

संकमित पशु को स्वस्थ पशु से तत्काल अलग करें। पशुशाला, घर आदि जगह पर साफ-सफाई जीवाणु विषाणु नाशक रसायन जैसे फिनाइल, फार्मेलिन एवं सोडियम हायपोक्लोराइड़ आदि से करें। वर्तमान में पशु क्रय नहीं करें, विशेष तौर पर राजस्थान एवं गुजरात के पशु। पशुशाला के आसपास पानी जमा नहीं हो। पशुपालकों को शाम के समय पशु शेड में नीम के पत्तो से धुआं करना चाहिए। इससे मक्खी/ मच्छर से पशुओं का बचाव हो। पशुपालक अपने शरीर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखे।

गोशाला के लिए सावधानी

गोशाला के शेड में नियमित साफ-सफाई कराई जाए। एवं फिनाइल का स्प्रे किया जाए। गोशाला में आने वाले नए पशुओं को 10-15 दिनों के लिए पृथक रखा जाएं। पशु की मृत्यु होने पर गहरा गढ्ढा खोदकर चूना एवं नमक डालकर शव निष्पादन करें। शव निष्पादन स्थल जलस्त्रोत एवं आबादी से दूर होना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close