मंदसौर का मन

15 सालों में मंदसौर औऱ आस-पास के गांवों में हर क्षेत्र में विकास हुआ है जैसे सड़क, बायपास, और कई तरह के शिक्षा संस्थान, कालोनियां, हास्पिटल, माल, हवाई पट्टी बहुत कुछ अब बड़े शहरों जैसा विकास मंदसौर में दिख रहा है। पहले जिन सुविधाओं के लिए हमे बार-बार इंदौर जाना पड़ता था आज के समय में वह सारी सुविधा मंदसौर में भी उपलब्ध हो रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ही बात करें तो इंजीनियरिंग, फार्मेंसी, नर्सिंग, आयुर्वेद, पालीटेक्निक की शिक्षा लेना हो तो मंदसौर औऱ आस-पास के क्षेत्रों के विद्यार्थी सीधे इंदौर का ही रुख करते थे पर अब इनमें से कई संस्थान मंदसौर में खुल गए हैं। मंदसौर का विकास आइटी के क्षेत्र में भी हुआ हैं पहले इस विषय से संबंधित कोर्स मंदसौर में नहीं होते थे सिर्फ एक ही सरकारी कालेज था समय के साथ अब स्मार्ट कक्षा, आइटी के कालेज औऱ एक यूनिवर्सिटी भी मंदसौर में खुली हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा मंदसौर के आस-पास के 30 किमी के गांवों में रहने वाले विद्यार्थियों को हुआ। क्यों कि 12 वीं के बाद गांव के बच्चे पढ़ाई बंद कर खेती में लग जाते थे क्योंकि परिवार वाले आगे की पढ़ाई के लिए बाहर भेजते नहीं थे। पर मंदसौर में ही उच्च शिक्षा के अनेक विकल्प होने से गांवों से 80 प्रश से अधिक विद्यार्थी यहां आ रहे हैं। मंदसौर में इंजीनियरिंग कालेज खुले लगभग 26 साल हो चुके हैं और यहां आईटी में डिग्री लेने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थी विदेशों में भी अच्छी कंपनियों में काम कर रहे हैं इसके अलावा कई लोग अपने देश में भी नाम कमा रहे हैं। शहर में भी युवक युवतियां अपने व्यवसाय में इसका उपयोग कर रहे हैं। मंदसौर के विकास में इनकी भी अहम भूमिका हैँ। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम की नई तकनीकी का पुलिस भी उपयोग कर रही हैं। घर बैठे अपने वाहन की ध्यान रखी जा सकती है। गाड़ी कहां चल रही हैं कितनी स्पीड से चल रही हैं कहां कहां रुकी हैं कितने देर से रुकी हैं ओवरस्पीड, पार्किंग, लाक यहां तक की मोबाइल से बंद करने की सुविधा भी है। मंदसौर व आसपास में पहले पारंपरिक तरीके से रोड टैक्स का कलेक्शन होता था आज फास्टेग, आनलाइन, यूपीआई आईडी से हो रहा है। यह भी आइटी की वजह से ही संभव हो सका है। आईटी आधारित कंपनिया सूचना प्रौद्योगिकी पर काम करती हैं। 99 प्रश कार्य कम्प्यूटर और तकनीक पर किया जा रहा है। कम्प्यूटर पर काम करने वाली कंपनी डिजिटल प्रोडक्ट और सर्विस दे रही है। सभी क्षेत्रों के मुकाबले पिछले 5-6 सालों में आइटी में करियर की बहुत मांग है कंपनी और प्राइवेट सेक्टर ऐसे लोगों का चयन कर रही है नेतृत्व क्षमता के साथ डिजिटल तरीके में सक्षम हो। 15 सालों में शहर के हजारों युवाओं ने इस क्षेत्र में रोजगार प्राप्त किया है। कोरोना के कारण पूरे आर्थिक मंदी की चपेट में हमारा शहर भी रहा है। कोरोना से उबरने के बाद अब जिस तरह से हर चीज का डिजिटल मेकओवर हो रहा है आनलाइन कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा हैं। इस क्षेत्र में नव ग्रेजुएट से लेकर उच्च-अनुभवी लोग अपना करियर बना रहे हैं। इसके लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाओं, क्लाउड केंद्रित आर्किटेक्चर, प्लेटफार्म और एप्लीकेशन, एपीआई और वेब सेवाओं, कंटेनराइजेशन आदि सहित अन्य संबंधित स्किल सीखने वालों को प्राथमिकता मिल रही हैं।

मेरी याद गली

एक समय था जब हम सभी कम्यूटर के उपयोग से अंजान थे और इसका संचालन काफी मुश्किल समझते थे पर जब बच्चों ने आइटी के क्षेत्र में पढ़ाई शुरू की तो अधिकांश घरों में कम्प्यूटर के बारे में जानने-समझने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई। भ्रम दूर हुआ तो वह लोग भी कम्प्यूटर, लेपटाप का उपयोग करने लगे हैं जिन्होंने कभी इसकी शिक्षा नहीं ली हैं। अब सभी लोग जानते हैं कि आज कम्प्यूटर का युग है। अधिकतर काम कम्प्यूटर से ही हो रहे हैं। बैंक, सभी आफिस, रेलवे से लेकर मेनेजमेंट का के कार्य कम्प्यूटर से ही किए जा रहे हैं। कम्प्यूटर ने हमारे काम को आसान कर दिया हैं। कई काम को सुविधाजनक बना रहा है। बेरोजगारी बहुत बढ़ रही है जिन लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही है वह कम्प्यूटर कोर्स करके निजी क्षेत्र में नौकरी पा सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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