मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदी हमारे देश में जन-जन की भाषा है। हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है इसमें सात लाख शब्द हैं और प्रत्येक शब्द के 10-10 पर्यायवाची हैं। इतनी संपूर्ण भाषा विश्व में और कोई नहीं हैं। जिस देश में भाषा को मां का सम्मान दिया जाता है, वहीं अंग्रेजियत के आगे हिंदी को संघर्ष करना पड़ रहा है।

यह बात प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार पांडे ने कही। वे मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई के तत्वावधान में हिंदी दिवस पर नपा सभागृह में कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे देश में 70 प्रश लोग अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। न्यायपालिका और तकनीकी संस्थानों में अंग्रेजी अभी भी पूरी तरह से हावी है। जब तक इन संस्थानों से अंग्रेजी दूर नहीं होगी हिंदी को उसका वास्तविक सम्मान नहीं मिलेगा। राष्ट्रभाषा और मातृभाषा का सम्मान हम हिंदी को देते हैं किंतु इसे जनभाषा का सम्मान देना आवश्यक है।

कलेक्टर गौतम सिंह ने कहा कि पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में हमारे देश में हिंदी की स्थिति काफी अच्छी है। हिंदी में अंतरराष्ट्रीय भाषा होने की संपूर्ण क्षमता है। देश का कोई भी प्रांत ऐसा नहीं है जहां हिंदी बोली और समझी नहीं जाती हो। दक्षिण के राज्यों और पश्चिम बंगाल में भी लोगों को हिंदी का अच्छा ज्ञान रहता है।

एसपी सुनील कुमार पांडे ने कहा कि किसी भी देश की भाषा वहां की संस्कृति की संवाहक होती है। यदि हमने अपनी भाषा बदल दी तो हमारी सोच और हमारी संस्कृति भी बदल जाएगी। इसलिए हमारी जीवन पद्धति में हिंदी ही होना चाहिए। स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन जिला प्रभारी ब्रजेश जोशी ने दिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव न्यायधीश मो. रईस खान, व न्यायधीश समीर कुमार मिश्रा भी मंचासीन थे। संगोष्ठी में डा.निशा महाराणा, डा. उर्मिला तोमर, आरती तिवारी, कवि लालबहादुर श्रीवास्तव, व असहद अंसारी ने काव्य पाठ किया। सरस्वती वंदना बंशीलाल टांक ने प्रस्तुत की। संचालन डा. चंदा कोठारी ने किया। आभार जयेश नागर ने माना।

Posted By: Nai Dunia News Network

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