मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पीओपी से बनी मूर्तियों से पर्यावरण प्रदूषित होता है। पानी में विसर्जित करने के बाद ये गलती नहीं हैं। इसके कारण पानी भी प्रदूषित होता है और जलीय जीव भी मर जाते है। पीओपी की मूर्ति से होने वाले हानिकारक प्रभावों के कारण हर साल इस पर रोक लगाई जाती है। इस साल भी कलेक्टर द्वारा पीओपी की मूर्तियों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया है। इस आदेश के बावजूद कई क्षेत्रों में पीओपी की मूर्तियां बन रही है।

कलेक्टर द्वारा पीओपी की मूर्तियों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद तीन दिन बाद भी नगरपालिका ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। सीएमओ को कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश दिये गये थे कि किसी भी कीमत पर पीओपी की मूतियां बिकना नहीं चाहिये। 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी है। इससे पहले ही बाजार में बुकिंग हो जाती है और बाहर भी भेजी जाती है, ऐसे में अगर पीओपी की मूर्तियों का निर्माण होगा तो किसी तरह बिक भी जाएगी। इस संबंध में नपा सीएमओ कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। पीओपी से बनी मूर्तियां पर्यावरण के लिए खतरनाक मानी जाती हैं। यही कारण है कि गणेशोत्सव पर्व से पहले कलेक्टर द्वारा पीओपी की मूर्तियों को लेकर प्रतिबंध लगाया है। वहीं पुजारियों का कहना है कि हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार मिट्टी के गणेशजी की ही पूजा-अर्चना की जाना चाहिये, इससे घर सुख-समृद्धि बढ़ती है।

गणेशोत्सव में गणेशजी की मूर्ति व नवरात्रि में माताजी की मूर्ति की पूजा होती है। मूर्तियां मिट्टी की ही होना चाहिये, यह हमारे शास्त्र भी कहते है। पीओपी की मूर्तियों का कहीं भी कोई विधान नहीं है। मिट्टी की मूर्ति की पूजा-अर्चना करना चाहिये। 10 दिवसीय उत्सव समापन के बाद मिट्टी की मूर्ति को हम घरों में ही गमलों में विसर्जित करे, इससे जब पौधा जैसे-जैसे बड़ा होता है घर में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। पीओपी की प्रतिमा से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। हमें हमारे शास्त्रों के अनुसार ही पूजा-अर्चना करना चाहिये। -पं. गोविंद द्विवेदी, पुजारी, बड़े बालाजी मंदिर, बस स्टैंड

गणेशोत्सव में मिट्टी से बनी भगवान श्री गणेशजी की मूर्ति की ही पूजा-अर्चना करना चाहिये। पीओपी की मूर्तियां कुछ सालों से बनने लगी है, यह सिर्फ फैशन है। जबकि मिट्टी की मूर्ति की ही पूजा-अर्चना का महत्व है। मिट्टी में सुख-समृद्धि की वास होता है। मिट्टी में तुलसी के बीज मिलाकर मूर्ति बनाए, इससे तुलसी का पेड़ भी उगेगा। शास्त्र सम्मत नियमों का हमे पालन करना चाहिये। -महंत देवेंद्र भारती, पुजारी तापेश्वर मंदिर

Posted By: Nai Dunia News Network

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