नेस के सर्वे के रिजल्ट घोषित : कक्षा 3, 5, 8 व 10वीं में हुए सर्वे में टॉप 30 में भी नहीं

स्कूलों में माहौल और बच्चों को तैयार नहीं कर पाए अधिकारी, तीसरी कक्षा में 45वें स्थान पर रहा जिला

मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नेस की परीक्षा की तैयारियों में जिले में हुई लापरवाही परिणामों में नजर आई है। गुरुवार को राष्ट्रीय उपलब्धि परीक्षण (नेस) का रिजल्ट जारी हुआ है। शासकीय विद्यालयों में कक्षा तीन, पांचवीं, आठवीं एवं 10वीं में हुए इस सर्वे में जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों व स्कूलों ने अधिक रूचि नहीं ली। यहीं कारण है कि नेस की परीक्षा में मंदसौर जिला प्रदेश में फिर से फिसड्डी साबित हुआ है। चारों कक्षाओं में 52 जिलों की लिस्ट में मंदसौर जिला टॉप-30 में शामिल नहीं है, जबकि नेस परीक्षा (सर्वे) की तैयारियों को लेकर जिले में खूब दिखावटी प्रयास हुए थे। शिक्षकों को परीक्षण से लेकर स्कूलों में बच्चों को सर्वे के अनुसार तैयारियों का दावा अधिकारी सर्वे से पहले कर रहे थे। लेकिन जारी हुए रिजल्ट ने हकीकत बया कर दी है कि सर्वे की तैयारियों में शिक्षा विभाग और स्कूलों ने कितनी गंभीरता बरती है। जिले का बेहतर कमजोर रिजल्ट आने के बाद अब जिला शिक्षा अधिकारी कह रहे हैं कि हमने पूरी तैयारी की थी लेकिन प्रदेश के दूसरे जिलों ने हमसे अच्छी तैयारी की और वे अपने अच्छी स्थिति में रहे।

राष्ट्रीय उपलब्धि परीक्षण शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रति तीन वर्ष में आयोजित किए जाने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रव्यापी मूल्यांकन है। कक्षा तीसरी, पांचवीं व आठवीं एवं 10वीं बच्चो के लिए होने वाले यह सर्वे नवंबर 2021 में हुआ था। अभ्यास प्रश्न बैंक, मॉक टेस्ट तथा अभ्यास टेस्ट आदि मूल्यांकन इसमें किया गया। इस महत्वपूर्ण सर्वे के लिये मंदसौर जिले के प्राथमिक और हाई स्कूल के बच्चों को शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्कूल के अध्यापक पूरी तरह से तैयार नहीं कर पाये। यहीं कारण रहा कि प्रदेश की सूची में मंदसौर का स्थान 35 और इससे पार ही है। कक्षा 3रीं के सर्वे में तो मंदसौर जिले को 45 वां स्थान मिला है, पांचवी में 42वां और दसवीं में 41वां स्थान रहा। इस रेकिंग से साबित हो गया है कि जिले में नेस सर्वे के लिये तैयारियां में गंभीरता नहीं बरती गई। जबकि अधिकारी सर्वे शुरू होने से दो माह पहले ही तैयारियों का दावा कर रहे थे, स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को सर्वे के लिये तैयार करने का दावा कर रहे थे। लेकिन परिणामों ने सभी दावों की हकीकत बया कर रही है। नेस सर्वे में मिलने वाली रेकिंग के हिसाब से जिलों को शिक्षा के लिये राशि मिलती है। 12 नवंबर 2021 को सर्वे होने से पहले जिले में तैयारियों को देखने के लिए 11 से 13 अक्टूबर तक भोपाल से अधिकारी आए थे। लेकिन मंदसौर में सर्वे की तैयारियों के लिये अक्टूबर तक खास तैयारियां नहीं हो पाई थी।

2017 के सर्वे में भी कमजोर रहा था जिले का रिजल्ट

देशभर में एक साथ होने वाला राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे तीन वर्षो में एक बार होता है। इससे पहले वर्ष 2017 में यह सर्वे हुआ था। उस समय जिले की स्थिति अच्छी नहीं रही थी। इस साल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नेस सर्वे में जिले के परिणाम को सुधारने के लिये निर्देश तो दिए लेकिन निर्देशों का कितना पालन हुआ यह नहीं देखा गया। वहीं स्कूलों में भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। शिक्षा अधिकारी का कहना है कि कुछ स्कूल के बच्चे कमजोर रहे, इसके कारण रिजल्ट कमजोर रहा है।

टॉप-10 में आने का लिया था लक्ष्‌य, तैयारी की नहीं

2017 के परिणाम बेहतर नही थे। इस स्थिति को देखते हुए नेस के सर्वे में जिले को टॉप-10 में लाने का लक्ष्‌य लेकर जिला शिक्षा अधिकारी आरएल कारपेंटर द्वारा 25 सितम्बर 2021 को जिले की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए बेहतर तैयारियों के निर्देश दिये थे। निर्देशों में कहा गया था कि कक्षा तीसरी, पांचवीं, आठवीं व 10वीं के बच्चों के लिए नेस आधारित विशेष कक्षा का प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे से 5.30 बजे तक आयोजित किया जाए और शिक्षकों को कक्षाओं सुबह 10.30 से 5.30 बजे तक उपस्थित रहकर बच्चों की तैयारी के लिए निर्देश दिए गए थे। लेकिन मुख्यालय पर ही कई स्कूलों ने नेस की तैयारियों में रुचि नहीं ली। कई बार बच्चों की बच्चों की छुट्टी निर्धारित समय से पहले ही कर दी गई।

कक्षा प्रदेश में स्थान

तीसरी 45

पांचवीं 42

आठवीं 35

10वीं 41

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे में बेहतर रिजल्ट के लिए अच्छे प्रयास किए थे, लेकिन दूसरे जिलों ने हमसे अधिक प्रयास किए और वे जिले टॉप में आए हैं। जिले में कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों को तैयारी करवाई थी। शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया था। कुछ स्कूल के बच्चे कमजोर रहे, वे अच्छा नहीं कर पाए हैं, इसके कारण रिजल्ट कमजोर रहा है। नेस सर्वे हर तीन साल में होता है। अगली बार और अधिक प्रयास करेंगे। कहां कमजोरी रही है, इसका मूल्यांकन करेंगे।

-आरएल कारपेंटर, जिला शिक्षा अधिकारी, मंदसौर

Posted By: Nai Dunia News Network

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