मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में हैंडपंपों और कुओं के पानी की शुद्धता की जांच की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जिन हैंडपंप व कुओं का पानी लोग पीने में उपयोग करते हैं, उनके पानी की जांच के साथ ही पानी की सफाई के लिये पीएचई विभाग द्वारा दवाई डाली जा रही है। पांच माह में 1400 से अधिक हैंडपंपों की पानी की जांच हुई है। इसमें मल्हारगढ़ व गरोठ क्षेत्र के 45 हैंडपंपों का पानी हार्ड पाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन हैंडपंपों का पानी हार्ड है वह नुकसानदायक नहीं है, लोगों को समझाइश दी गई है कि इन हैंडपंपों के पानी का पीने में उपयोग उबालकर ही करें। इसके साथ ही मिनरल वाटर के संस्थानों पर भी पहुंचकर पानी की जांच की है, शुद्धता के सभी मापदंड पूरे होने पर प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। अब प्रशासन की टीम मिनरल वाटर संचालकों के संस्थानों पर साफ-सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण करेगी।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों हैंडपंप व कुओं के पानी शुद्धता की जांच के लिये पीएचई विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंच रही है। जिले के गांवों में कुल 5460 हैंडपंप हैं। एक अप्रैल से अब तक 1480 हैडपंप और 22 कुओं के पानी की जांच हो चुकी है। पीएचई में लैब प्रभारी हस्तीमल सांखला ने बताया कि हर माह 300 हैंडपंप के पानी की जांच का लक्ष्‌य है। एक अप्रैल से अब तक 1480 हैंडपंपों के पानी की जांच हुई है। इनमें 45 हैंडपंपों का पानी हार्ड मिला है, हार्ड पानी ये सभी हैंडपंप गरोठ व मल्हारगढ़ ब्लॉक में है। पानी हार्ड है लेकिन अंडर लिमिट है। स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि जिन हैंडपंपों का पानी हार्ड है उनका पानी उबालकर ही पीने में उपयोग करें। जिन कुओं के पानी जांच की गई वे उन सभी कुओं पानी शुद्ध पाया गया है। इसके साथ ही जिले की सभी पंचायतों में पानी की जांच की किट एवं आवश्यक दवाईयों का भी वितरण किया गया है। पानी की जांच के लिये प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

पानी की जांच के बाद मिनरल वॉटर संचालकों को दिया जा रहा प्रमाण पत्र

पीएचई द्वारा हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच के साथ ही जिलैबर में संचालित हो रहे मिनरल वॉटर संचालकों द्वारा लोगों को पिलाए जा रहे पानी की भी जांच की जा रही है। पीएचई के अधिकारियों के अनुसार जिले में कुल मिनरल वॉटर के 47 संस्थान हैं। इनमें से अब तक 40 संस्थानों के पानी की शुद्धता की जांच हो चुकी है, अधिकारियों के अनुसार कहीं पर भी पानी में किसी तरह की दिक्कत नहीं मिली है। रिपोर्ट सही पाए जाने के बाद पीएचई द्वारा प्रमाप पत्र भी दिया जा रहा है। अब संस्थानों पर साफ-सफाई व अन्य मापदंडों की भी पड़ताल होगी।

एनएबीएल प्रोजेक्ट में पीएचई की लेब हुई हाईटेक

मंदसौर में पीएचई विभाग की लैब भी हाईटेक हो गई है। शासन के एनएबीएल प्रोजेक्ट में पीएचई की लैब को आईएसओ का सर्टिफिकेट मिला है। यहां की लैब में कुल 14 तरह की जांच होती है। इनमे से आठ तरह की जांच को एनएबीएल में शामिल किया गया है। इन आठ तरह की जांच को प्रदेश व देश में कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

जिले में हैंडपंप व कुओं के पानी की शुद्धता की जांच लगातार की जा रही है। अब तक 1400 से अधिक हैंडपंप के पानी की जांच की जा चुकी है। जिले में कहीं भी पानी में दिक्कत नहीं है। जहां हार्डनेस है वहां पर लोगों को पानी के उपयोग के लिये उचित सलाह दी जा रही है। वहीं पंचायतों में किट एवं आवश्यक दवाईयां भी समय-समय पर दी जा रही है।

-संदीप दुबे, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

Posted By: Nai Dunia News Network

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