मंदसौर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शिवना नदी को प्रदूषण दूर करने के लिए तमाम उपायों के बाद भी नदी में गंदगी बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में हुए नवरात्र विसर्जन के दौरान भी नगर पालिका लोगों को ठीक से रोक नहीं पाई और मुक्तिधाम के पास ही फूल मालाएं व अन्य सामग्री जमा हो गई है। यह अब नदी का पानी गंदा कर रहे हैं। इसके अलावा पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के सामने भी नालों का गंदा पानी मिलने से नदी का पानी हरा होने लगा है। हालांकि जिम्मे दारों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।

नगर पालिका ने गणपति विसर्जन व नवरात्र में माता प्रतिमा विसर्जन के दौरान शिवना नदी में विसर्जन नहीं करने देने की योजनाएं कागजों पर तो खूब बनाई थी पर नपा के अधिकारियों की लापरवाही से यह कार्य नहीं हुए। गणपति विसर्जन के समय तो शिवना नदी में बहाव था तो फूल मालाएं बहकर चले गए। पर अभी माता प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी में बहाव लगभग बंद हो गया है। तो दो दिन बाद भी नदी में फूल मालाओं, पूजन सामग्री की गंदगी पड़ी है। मुक्तिधाम पर छोटी पुलिया के पास ही पड़ी यह सामग्री अब सड़ने पर बदबू पैदा करेगी। नपा ने अभी दो दिन बाद भी इसकी सफाई नहीं कराई है। इधर पशुपतिनाथ मंदिर के सामने भी पानी का बहाव रुकते ही अब यहां भी पानी का रंग हरा होने लगा है। खानपुरा से लेकर मंदिर तक अभी भी कई नाले सीधे नदी में मिल रहे हैं। इसके चलते ही पानी का रंग बदल रहा है। अभी तक कोई कारगर योजना नहीं बनने और जिम्मेदारों की लगातार अनदेखी के चलते जीवनदायिनी शिवना नदी अब केवल बरसात में साफ रहती है। बारिश रुकते ही गंदे पानी के नाले में तब्दील होती जा रही है। नालों का गंदा पानी मिलने के कारण धीरे-धीरे फिर से शिवना का पानी इतना जहरीला हो जाएगा कि मछलियां भी इसमें जीवित नहीं रह सकेंगी। शनिवार भी मुक्तिधाम छोटी पुलिया के यहां पानी से आ रही दुर्गंध के कारण किनारे से निकलने में भी लोगों को नाक ढंककर जाना पड़ा। रामघाट बैराज से मुक्तिधाम तक शहर के नालों का पानी बड़ी मात्रा में नदी में मिल रहा है। गंदे पानी को नदी में मिलने से रोकने के लिए नपा ने 20 लाख का सीवरेज भी बनाया, लेकिन वह भी कारगर नहीं हो पाया। गंदा पानी मिलने से शिवना का पानी भी हरा हो गया है।

शिवना का पानी इतना जहरीला हो चुका है कि आचमन और नहाना तो दूर नदी के समीप से निकलते समय लोगों को मुंह पर रुमाल रखकर निकलना पड़ रहा है। शिवना को शुद्ध करने के लिए 2002 से अब तक लागू हुई योजनाओं पर लगभग दो करोड़ रुपए तक खर्च कर दिए गए। फिर भी पानी में लगातार आक्सीजन की कमी हो रही है। पानी में आक्सीजन कम होने के कारण ही अब पानी में रहने वाले जीव मर रहे हैं और लोगों की आस्था को भी ठेस लग रही है।

यहां से वहां तक गंदगी ही गंदगी

रामघाट से लेकर मुक्तिधाम तक चार किमी क्षेत्र में बड़े नालों और नालियों में शहर का सारा गंदा पानी शिवना नदी में ही मिल रहा है। इसका प्रभाव यह हो रहा है कि एक अच्छी-खासी जीवित नदी गंदे पानी का डबरा बनकर रह गई है। शिवना में गंदगी की शुरुआत खानपुरा के पास बुगलिया नाले से होती है, जो मुक्तिधाम पर मिल रहे बड़े नाले पर समाप्त हो रही है। लगातार प्रदूषित हो रही शिवना नदी के उत्थान के लिए काम कम, बातें अधिक हो रही हैं। नगर पालिका शिवना के शुद्धिकरण एवं सुंदरीकरण के लिए योजनाएं बनाने के अलावा भी कुछ नहीं कर पाई। करोड़ों खर्च भी हुए, पर शिवना की हालत नहीं बदल सकी। प्रदूषित हो चुकी शिवना नदी के पानी के सैंपलों की जांच भी वर्षभर में करीब चार बार हो चुकी है, लेकिन जल शुद्ध होने के बजाय और अधिक खराब हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन की टीम के साथ ही भोपाल से एप्को की टीम ने आकर भी सैंपल लिए हैं। पर बाद में आगे कुछ नहीं हुआ।

-एप्को की टीम शिवना शुद्धिकरण के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। अभी फूल-माला व अन्यि पूजन सामग्री को नदी से निकलवा लेंगे। हमारी टीम तो पूरी तरह मुस्तैद थी पर लोग नहीं मानते हैं। वह नदी में ही सामग्री विसर्जित करते हैं।

-केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर पालिका, मंदसौर

Posted By: Nai Dunia News Network

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