किशोर ग्वाला, मंदसौर

मंदसौर जिले में जिला अस्पताल सहित गरोठ, शामगढ़, सुवासरा, सीतामऊ व नारायणगढ़ में आक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन इनको चलाने वाले आपरेटर महज दो ही हैं। इसके चलते तहसील मुख्यालयों पर बने सभी प्लांटों की अभी धूल भी साफ नहीं हो पा रही है। वहीं 80 लाख रुपये में बनकर तैयार हुए जिला अस्पताल के आक्सीजन प्लांट को ठेके पर देने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल कहीं भी आक्सीजन की आवश्यकता नहीं होने से प्लांटों की देखरेख तक नहीं हो रही है। इनके आसपास बारिश का पानी भरा हुआ है।

जिला अस्पताल के आक्सीजन प्लांट में प्रति घंटा 30 हजार लीटर आक्सीजन बन रही है। जिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन लाइन से जुड़े कुल 330 बेड हैं। 24 घंटे तक लगातार प्लांट चलाने के बाद भी सभी बेड पर आक्सीजन नहीं पहुंच रही है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार जिला अस्पताल में केवल 45-50 बेड तक ही आक्सीजन पहुंचाई जा सकती है। इससे अधिक मरीज होने पर सिलिंडर का उपयोग करना पड़ रहा है। तीसरी लहर आती है तो फिर से आक्सीजन की किल्लत सामने आ सकती है। जिला अस्पताल में दूसरे आक्सीजन प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया भी कोरोना का खतरा कम होते ही ठंडे बस्ते में चली गई है। अब याद दिलाने पर सीएमएचओ कह रहे हैं कि जिला अस्पताल परिसर में पुराने विश्रामगृह को तोड़कर आक्सीजन प्लांट बनाया जाएगा। जिले में सीतामऊ, सुवासरा, शामगढ़, गरोठ और नारायणगढ़ में आक्सीजन प्लांट बनाए गए हैं, लेकिन कहीं भी आपरेटर नहीं होने से ये प्लांट वीरान पड़े हैं। कई दिनों तक प्लांटों के भीतर झाड़ू तक नहीं लग रही है। प्लांट के आसपास बारिश का पानी भर गया है। मशीनों पर बारिश का पानी लगने से जंग के कारण आगामी दिनों में दिक्कतें भी आएंगी और प्लांट में लगी मशीनें नियमित रूप से नहीं चलाई गईं तो जरूरत के समय प्लांट होते हुए भी आक्सीजन के लिए दिक्कतें हो सकती हैं। सीएमएचओ का कहना है कि भोपाल से ही प्लांट संचालन के लिए आपरेटर नहीं भेजे गए हैं। मात्र दो आपरेटर हैं, जो जिला अस्पताल का प्लांट संभाल रहे हैं।

गरोठ : आक्सीजन प्लांट के आसपास भरा गंदा पानी, सफाई भी नहीं हो रही

गरोठ में सिविल अस्पताल में 48.56 लाख रुपये में आक्सीजन प्लांट बनाया गया है। प्लांट बनकर तैयार होने तक कोरोना की लहर ठंडी हो गई थी। मरीज नहीं होने से आक्सीजन की आवश्यकता ही नहीं रही तो अस्पताल प्रबंधन ने इसे लावारिस छोड़ दिया। अब न तो प्लांट में लगी मशीन चल रही है और न ही प्लांट के भीतर नियमित सफाई हो रही है। आसपास बारिश का पानी भर गया है। 48 लाख रुपये में मिली सुविधा धूल खा रही है। प्लांट को चलाने के लिए आपरेटर भी नहीं है। बीएमओ डा. मनीष दानगढ़ ने बताया कि अभी कोविड मरीज नहीं होने से आक्सीजन की जरूरत नहीं है। प्लांट चालू है व पूरी तरह देखरेख में है। देखरेख की जिम्मेदारी डा. पंजाबी को दी है।

शामगढ़ : दो माह पहले तैयार हुआ प्लांट, अभी तक मशीन चालू नहीं की

18 एमएएन-3 केप्शनः शामगढ़ में दो माह पहले ही बनकर तैयार हुआ आक्सीजन प्लांट बंद ही है।.नईदुनिया

शामगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में 48.56 लाख रुपये में आक्सीजन प्लांट बना है। 17 जुलाई को प्लांट का शुभारंभ भी हो गया है पर अभी तक मशीन चालू कर टेस्ट नहीं की है। नगर में अभी तक 95 कोरोना पाजिटिव मिले थे। इनमें से नौ की मौत हुई थी। कई लोगों की जिले व प्रदेश से बाहर के अस्पतालों में उपचार के दौरान भी मौत भी हुई हैं। कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन की कमी से भी मौत हुई है। आक्सीजन प्लांट तैयार हुए दो माह हो गए है लेकिन अब तक बंद ही है, यहां मशीनों का चलाने के लिये आपरेटर भी नहीं है। बीएमओ डा. मनीष दानगढ़ ने बताया कि प्लांट तैयार कर टेस्टिंग भी पूरी हो चुकी है।

भानपुरा : आक्सीजन प्लांट में विद्युत कनेक्शन ही नहीं कराया

भानपुरा शासकीय अस्पताल मे आक्सीजन प्लांट की स्वीकृति के बाद मशीने आ गई और फिट भी कर दी गई है। अभी तक विद्युत कनेक्शन नहीं होने के कारण प्लांट प्रारंभ करने में देरी हो रही है। बीएमओ डा. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि हमने नए ट्रांसफार्मर के लिए विद्युत कंपनी को 3.65 लाख रुपये जमा कराए हैं। एक सप्ताह में ट्रांसफार्मर लग जाएगा। विद्युत कनेक्शन के साथ ही प्लांट से कनेक्शन के लिए लाइन भी डलेगी।

मंदसौर जिला अस्पताल में एक और प्लांट की प्रक्रिया अब तक नहीं हुई पूरी

तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए जिला अस्पताल में एक और नया आक्सीजन प्लांट बनाने के लिए कार्रवाई शुरू हुई थी। इसमें सांसद निधि से भी राशि स्वीकृत हुई थी लेकिन अब तक प्लांट निर्माण को लेकर कुछ भी नहीं हो पाया है। ऐसे में तीसरी लहर आती है तो जिला अस्पताल में दूसरी लहर की तरह ही आक्सीजन के लिये परेशानियां हो सकती है। आक्सीजन की उपलब्धता सिलिंडरों से करना पड़ेगी। जिला अस्पताल में स्थित प्लांट से जो आक्सीजन अभी बन रही है वह आइसीयू सहित अन्य वार्डों में पहुंच रही है।

सरकारी रिकार्ड में 135 मौत, वास्तविकता में 450 से अधिक

सरकारी रिकार्ड में कोरोना की पहली व दूसरी दोनों लहर मिलाकर कुल 135 मौते बताई जा रही है। जबकि हकीकत में लगभग 450 से अधिक मौत तो कोरोना की दूसरी लहर में ही हुई है। मुक्तिधाम के आंकड़े तो यही कह रहे हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल प्रबंधन आक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं स्वीकार रहे हैं जबकि 450 में से लगभग आधी मौतों का कारण समय पर आक्सीजन नहीं मिलना बताया जा रहा है।

सेंट्रल आक्सीजन बेड

अस्पताल सेंट्रल आक्सीजन बेड

जिला अस्पताल 330

नारायणगढ़ 30

शामगढ़ 30

सीतामऊ 30

सुवासरा 30

गरोठ 30

(स्रोत- सीएमएचओ कार्यालय)

एक नजर

जिले में अब तक कुल कोरोना पाजिटिव मरीज- 9063

जिले में कोरोना से हुई मौत-130

अभी तक लिए कुल सैंपल- 210760

-गरोठ शासकीय हास्पिटल में अव्यवस्थाएं बरकरार हैं। 48 लाख के आक्सीजन प्लांट की हालत यह है कि प्लांट के भीतर सफाई तक नहीं हो रही है। आसपास गंदगी का आलम है। जब आवश्यकता होगी तब मशीनें ही नहीं चलेंगी। सिविल हास्पिटल की दयनीय स्थिति पर जिम्मेदारों और जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए।-दिनेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस विचार विभाग

-जिला अस्पताल परिसर में स्थित पुराने विश्रामगृह को तोड़कर दूसरा आक्सीजन प्लांट बनेगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। जिले में बने आक्सीजन प्लांटों के संचालन हेतु आपरेटर की नियुक्ति नहीं हुई है। जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट पर दो आपरेटर हैं। सरकार को प्लांट के संचालन हेतु किसी कंपनी को ठेका देना चाहिए। चिकित्सक प्लांट को नहीं चला सकते हैं। जिले में कोरोना काल में आक्सीजन की कमी से कोई भी मौत नहीं हुई है।- डॉ. केएल राठौर, सीएमएचओ, मंदसौर

Posted By: Nai Dunia News Network

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