नगर पालिका चुनाव : पिछले नपा चुनाव में 10 वार्डों में रही थी 100 के अंदर हार-जीत

*सात वार्डों में भाजपा, तीन में जीते थे कांग्रेस उम्मीदवार

*भाजपा ने सबसे छोटी जीत 19 वोट से दर्ज की थी वार्ड 16 में

*शहर के 25 प्रश वार्डों में 100 से कम मतों से हो रही हैं हार-जीत

*अब कमजोर कड़ियों को खोजने में जुटे हैं दोनों दलों के नेता

मंदसौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कहते हैं जितना छोटा चुनाव होता हैं, मतों के लिए उतनी ही मशक्कत करनी पड़ती है। यह बात वार्डों के चुनाव पर सटीक बैठ रही है। इसीलिए यहां मैदान में उतरे उम्मीदवार एक-एक मत बटोरने के लिए सुबह से शाम तक जुटे रहते हैं। नपा के पिछले दो चुनावों का रुझान देखें तो लगभग 10 वार्ड ऐसे रहते ही हैं जहां 100 से कम मतों से हार जीत होती रही है। वार्ड 11, 17 और 40 ऐसे हैं जहां हर चुनाव में नजदीकी मुकाबला रहा है। दोनों ही चुनावों में यहां प्रत्याशियों को सीमा पर ही जीत मिली है। पिछले चुनाव में 19 मत से सबसे छोटी जीत भाजपा के नाम पर वार्ड 16 से रही थी।

जनवरी 2011 और दिसंबर 2015 में हुए नपा चुनाव में लगभग 10 वार्डों में हार-जीत के आंकड़े काफी कम रहे हैं। अगर कुछ वोट इधर से उधर हो जाते तो यहां परिणाम ही बदल सकते थे। 2015 में तो 100 से कम अंतर वाले 10 वार्डों में से सात में भाजपा के उम्मीदवार जीते थे। और इसी के कारण भाजपा 23 वार्ड तक पहुंची थी। जनवरी 2011 में हुए चुनावों में 100 से कम मतों की जीत-हार वाले आठ वार्ड थे। इस समय चार-चार वार्डों में भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवार जीते थे। आंकड़े यह बयां करते हैं कि मंदसौर की जनता ने 25 प्रतिशत वार्डों में हर चुनाव में एकतरफा मत नहीं दिया है। 2011 के चुनाव में आठ और 2015 के चुनाव में 10 वार्डों में जीत-हार 100 से कम वोटों से हुई थी। पिछले दो चुनावों में जीत का अंतर 100 से कम वोट वाले वार्डों में अपनी-अपनी संभावनाएं देखकर पार्टियों ने सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। इन वार्डों में उम्मीदवारों की सक्रियता के साथ ही दोनों दलों के नेता भी जनसंपर्क में जुट गए हैं। दिसंबर 2015 के चुनाव में 10 वार्ड में 100 से कम मतों से जीत-हार हुई थी। इनमें सात में भाजपा, दो में कांग्रेस और एक में निर्दलीय जीते थे।

लगातार नजदीकी मुकाबला रहा इन वार्डों में

दोनों चुनावों के आंकड़ें देखें तो वार्ड 11 में हमेशा नजदीकी मुकाबला रहा है। यहां एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। 2015 में वार्ड 11 में भाजपा के पूर्व नपाध्यक्ष राम कोटवानी कड़े मुकाबले में 68 मतों से जीते थे। जनवरी 2011 के चुनाव में वार्ड 11 में कांग्रेस की सीमा राठौर भी कश्मकश के बाद 37 मतों से जीत सकी थीं। इसी तरह वार्ड 17 में भी दोनों चुनाव में नजदीकी मुकाबले में भाजपा ही जीती है। यहां 2011 में भाजपा के रमेश ग्वाला 2015 में उनकी पत्नी स्व. सरस्वती ग्वाला ने जीत दर्ज की थी।

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पत्नी की हार का बदला लिया पति ने

वार्ड 40 की कहानी भी अजब रही है। यहां दोनों चुनावों में काफी नजदीकी मुकाबला रहा है। पर 2011 में पत्नी मंजू मालवीय की हार का बदला 2015 में पति अनिल मालवीय ने लिया। दिसंबर 2011 में कांग्रेस उम्मीदवार नानूबाई पत्नी जगदीश जटिया ने मंजू पत्नी अनिल मालवीय को 98 मतों से पराजित किया था। जब 2015 में चुनाव हुए तो भाजपा ने अनिल मालवीय का टिकट काट दिया, पर वह निर्दलीय उतर गए और कांग्रेस के जगदीश जटिया को 95 मतों से हराकर अपनी पत्नी की हार का बदला चुकाया।

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तब सांसें ऊपर-नीचे होने लगी थीं प्रत्याशियों की

दिसंबर 2015 के चुनाव में मतगणना के दौरान लगभग 10 वार्डों में जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था। पर वार्ड 16 और वार्ड 22 में अंतिम दौर तक प्रत्याशियों की सांसें ऊपर नीचे होने लगी थीं। यहां आखिरी समय तक तय नहीं हो पा रहा था कि जीत किसके पक्ष में होगी। आखिर में वार्ड 16 में भाजपा के गुड्डू गड़वाल ने 19 मत से और वार्ड 22 में भाजपा की अंगूरबाला कर्नावट ने 33 वोट से जीत दर्ज की थी। इसके अलावा वार्ड 31 में कांग्रेस के जितेंद्र सोपरा 50 मतों से, वार्ड 14 में कांग्रेस उम्मीदवार रंजना पाटिल 80 मतों से जीती थी। भाजपा जिलाध्यक्ष नानालाल अटोलिया दावा कर रहे हैं कि नपा चुनाव में 35 वार्डों में भाजपा जीतेगी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष नवकृष्ण पाटिल भी इतनी ही सीट पर जीत का दावा कर रहे हैं।

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चुनाव की कहानी, आंकड़ों की जुबानी

-2015 के 10 वार्डों में रहा था कशमकश भरा मुकाबला

- वार्ड आठ की भाजपा उम्मीदवार स्व. आजाददेवी कोठारी ने कांग्रेस की हेमलता राणा को 96 मतों से हराया था।

- वार्ड 11 में भाजपा के राम कोटवानी कांग्रेस के लक्ष्‌मणदास मेघनानी से महज 68 वोट से जीते थे।

- वार्ड 14 में कांग्रेस की रंजना पाटिल ने भाजपा की उमाकुंवर शक्तावत को 80 मतों से हराया था।

- वार्ड 16 में भाजपा के सुभाष गुड्डू गढ़वाल ने कांग्रेस उम्मीदवार अशोक रैकवार को महज 19 मतों से हराया था।

- वार्ड 17 में भाजपा उम्मीदवार स्व. सरस्वती ग्वाला ने कांग्रेस की दुर्गाबाई ग्वाला को 68 मत से हराया था।

- वार्ड 20 में भाजपा की रश्मि राठौर ने कांग्रेस की मधुबाला मसानिया को 72 मतों से पराजित किया था।

- वार्ड 22 में भाजपा की अंगूरबाला कर्नावट त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय ललिता पोरवाल से महज 33 वोट से जीती थी।

- वार्ड 25 में भाजपा के मुकेश खमेसरा ने कांग्रेस के स्व. खुर्शीद पयामी को 76 मतों के अंतर से हराया था।

- वार्ड 31 में कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र सोपरा ने भाजपा के राजेश नामदेव को 50 मतों से हराया था।

- वार्ड 40 में निर्दलीय अनिल मालवीय ने कांग्रेस के जगदीश जटिया को 95 मतों से हराया था।

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2011 में नपा चुनाव में इन वार्डों में कम मतों से हुआ था फैसला

- वार्ड सात में भाजपा के भूपेंद्र सांखला ने कांग्रेस के कमलेश सोनी से महज 25 मतों से जीत सके थे।

- वार्ड नौ में भाजपा के विजय पोपट ने कांग्रेस के निर्मल बसेर को 96 वोटों से हराया था।

- वार्ड 11 में कांग्रेस की सीमा राठौर भाजपा की निशा रायमलानी से 37 मतों से जीती थी ।

- वार्ड 17 में भाजपा के रमेश ग्वाला कांग्रेस के जगदीश ग्वाला से 98 मतों से आगे रहे थे।

- वार्ड 21 से भाजपा की सुनीता कागला ने कांग्रेस की मधुबाला मसानिया को 93 मतों से हराया था।

- वार्ड 30 में कांग्रेस के लियाकत नीलगर ने भाजपा के मो. खलील को 87 मतों से हराया था।

- वार्ड 38 में कांग्रेस की मीनाकुंवर भाटी ने भाजपा की अनिता मरच्या को 90 मतों से हराया था।

- वार्ड 40 में कांग्रेस उम्मीदवार नानूबाई जटिया ने मंजू मालवीय को 98 मतों से पराजित किया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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