*प्रक्रिया की उलझन

*मानसून के आने से पहले की जाती है तैयारी, लेकिन विभाग कर रहा संधारण की औपचारिकता

भानपुरा (नईदुनिया न्यूज)। गांधीसागर बांध के सभी 19 गेट का रखरखाव कार्य महज औपचारिकता भर रह गया है। मानसून में बांध का जलस्तर बढ़ने पर बांध के गेट खोले जाते हैं। ऐसे में बांध के गेटों का रखरखाव कार्य मानसून से पूर्व ही खत्म कर लेना होता है। मानसून में बांध का जलस्तर बढ़ने पर सुगमतापूर्वक बांध के गेट खोले जा सकें, परंतु जल संसाधन विभाग की उदासीनता के चलते वर्षा ऋतु के दो माह बीत जाने के बाद अब बांध के 19 गेटों का रखरखाव कार्य प्रारंभिक स्तर तक ही हो पाया है। रखरखाव कार्य पूरा होने में अभी एक से डेढ़ महीने का समय और लगेगा। तब तक तो वर्षा ऋतु ही खत्म हो जाएगी। ऐसे में कभी बांध का जलस्तर बढ़ेगा तब सभी गेटों का अधूरा रखरखाव कार्य बांध की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।

ठेके से होने वाले बांध के गेटों के रखरखाव कार्य में नियमों को ताक पर रख दिया गया है। गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय खानापूर्ति की जा रही है। रखरखाव कार्य के लिए लगभग 16 लाख रुपये में जारी टेंडर की शर्तों के मुताबिक बांध के एक गेट की चेन, मशीनों की सफाई के लिए लगभग 25 लीटर पेट्रोल, काटन लगता है तथा अच्छे से घिसाई कर पुराना मटेरियल निकालना होता है। इसके अलावा आइल, ग्रीस, उच्च गुणवत्ता के प्राइमर एवं कंपाउंड लगाना होता हैं, जो परत दर परत उन पर अनुभवी कर्मचारी से चढ़वाना होता है। ग्रीस को भी कम्प्रेसर मशीन से भरा जाता है, ताकि मशीनरी अपने नये स्वरूप में आ जाए तथा आसानी से कार्य करे। परंतु गेट की सफाई में नाम मात्र के पेट्रोल के साथ डीजल व मिट्टी के तेल से गेटों की सफाई की जा रही। बताया गया है कि निर्धारित मात्रा में ग्रीस व कंपाउंड नहीं लगाए जा रहे हैं, जबकि इस कार्य में क्रमशः तीन-तीन ड्रम ग्रीस, आइल, कम्पाउंड लगता है। मौके पर उपयोग में आने वाली सामग्री का पर्याप्त मात्रा में भंडारण भी नहीं है। ऐसे में ठेकेदार की मनमानी के प्रति विभागीय कर्मचारी भी आंख मूंदे हुए हैं। आश्चर्य की बात यह है निर्धारित मापदंड से टेंडर का लगभग 41 प्रतिशत कम में होना से खानापूर्ति की जा रही है।

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बांध की सुरक्षा जैसे कार्य में अनियमितता!

गांधीसागर बांध की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्य पर विभाग द्वारा अनियमितता बरतना समझ से परे है। जहां लाखों लोगों की जानमाल का सवाल है 2019 में अधिक वर्षा होने से पानी बांध के ऊपर से झलक गया था। ऐसे में विभाग के जवाबदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होना चाहिए कि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता न हो तथा ऐसे इंजीनियर की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, जिसके पास अन्यत्र जवाबदारी नहीं हो।

इंजीनियर एनके शर्मा एवं एमएल त्रिवेदी ने बताया कि चुनाव की वजह से टेंडर देरी से हुए हैं। अभी कार्य चल रहा है। अगर ठीक से कार्य किया जाए तो दो से तीन माह का समय लगता है। ऐसे में तो वर्षा ऋतु का निकल ही जाएगी। विभाग जल्दबाजी में कार्य पूरा करने में लगा है।

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चुनाव के कारण विभागीय प्रक्रियाओं में देरी की वजह से रखरखाव कार्य के टेंडर देरी से हुए हैं। अगर काम ठीक नहीं है तो ठेकेदार को भुगतान नहीं करेंगे, उसकी राशि जब्त करेंगे। मैं निरीक्षण करूंगा। कार्य को नियमानुसार करवाएंगे।

-एचके मालवीय, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, गांधीसागर

Posted By: Nai Dunia News Network

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