महू, आदित्य सिंह। किसी भी खिलाड़ी का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का होता है। कम ही ऐसे होते हैं जो बढ़ती उम्र और फिटनेस से जुड़ी चुनौतियों का मजबूती से सामना कर कामयाबी हासिल कर पाते हैं। महू के गोल्फर मुकेश कुमार ऐसे ही बिरले खिलाड़ी हैं। जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बीच भी जज्बे के बूते सफलता पाई।

उन्होंने 51 साल की उम्र में एशियन टूर जीतकर किसी उम्रदराज खिलाड़ी द्वारा विश्वस्तरीय गोल्फ टूर्नामेंट जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। 32 साल के उनके करियर में यह 123 वीं जीत थी और पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब भी। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर वे 500 से अधिक टूर्नामेंट्स में भाग ले चुके हैं।

करीब 15 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को आजमा चुके हैं लेकिन हाल की सफलता अभूतपूर्व इसलिए है क्योंकि इसने बूढ़े हो रहे गोल्फर को फिर जोशीला बना दिया। दो साल पहले तक मुकेश भीतर से इतने मजबूत नहीं थे। उन्हें लगता था कि युवा खिलाड़ियों की तरह लंबे हिट लगाना अब उनके बस की बात नहीं।

लगातार प्रैक्टिस और उससे मिले आत्मविश्वास के बल पर मुकेश को यह सफलता मिली। फिलहाल मुकेश जमशेदपुर में टाटा ओपन में भाग ले रहे हैं, जिसे वे पहले ही दो बार जीत चुके हैं। इसके अलावा पीजीटीआई ओपन, चैन्नई ओपन, पुणे ओपन और पीएसटी ओपन जैसे बहुत से खिताब वे जीत चुके हैं।

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