गौतमपुरा। नगर परिषद क्षेत्र में आंगनवाड़ी भवन बनकर तैयार है, लेकिन ठेकेदार भवन को नगर परिषद को नहीं सौंप रहा। इस कारण बच्चे दूसरे भवनों में बैठकर पढ़ने को मजूबर हैं। एक ठेकेदार ने आंगनवाड़ी भवन तो बना दिया, लेकिन अपना सामान अभी तक भवन से नहीं हटाया। भवन में सामान भरा होने के कारण वह खराब हो रहा है। वार्ड छह के भवन में ठेकेदार की सीमेंट रखी हुई है जिसे वह खाली करने को तैयार नहीं है। इस संबंध में नपा अधिकारी नागेंद्र कानूनगो का कहना है कि शीघ्र ही भवन को ठेकेदार से खाली करा लिया जाएगा। ठेकेदार को नोटिस जारी किया है, लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। एक-दो दिन में कार्रवाई करेंगे।

अंधाधुंध बोरिंगों ने गिराया जलस्तर

नर्मदा के पानी से मिल रही राहत

देपालपुर। पहले क्षेत्र में 40 से 50 फुट के कुएं और बावड़ी में पर्याप्त पानी मिलता था, लेकिन अंधाधुंध बोरिंगों के कारण जलस्तर गिरता चला गया और आज यह हालत है कि गांवों में जलस्तर 500 फुट तक चला गया है। बोरिंग के कारण किसानों ने खेती का रकबा तो बढ़ा दिया, लेकिन जलसंकट को जन्म दे दिया। गोकलपुर, बिरगोदा, मुरखेडा, खरकोदा, काकुआं, काई आदि गांव में जल स्तर 500 से 700 फुट तक जा पहुंचा है, वहीं देपालपुर, बनेडिया तालाब से लगे गांवों में जल स्तर गिर रहा है। तालाब के कारण इन क्षेत्रों में 150 फुट तक जलस्तर है। तकीपुरा, जलोदियापंथ, बरोदापंथ, खजुराया,चांदेर क्षेत्र में भी गर्मी बढ़ने से बोरिंग साथ छोड़ने लगे हैं।

नर्मदा शिप्रा लिंक परियोजना एक बड़ी सौगात के रूप में क्षेत्रवासियों को मिली, जो क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ ही किसानों के लिए संजीवनी बनेगी। वर्तमान में इस परियोजना का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके चलते पाइप लाइन को चेक किया जा रहा है। जगह-जगह वॉल्व लगे हुए हैं। इन वॉल्वों से पानी छोड़ा जा रहा है तथा देखा जा रहा है कि पर्याप्त पानी लाइन से आ पा रहा है या नहीं, परियोजना के परीक्षण से किसानों तथा लोगों को राहत मिल रही है। वॉल्वों के पास जिन-जिन किसानों की भूमि लगी हुई है, वह गेहूं-चने की फसल काटकर पुनः खेतों में नई फसल लगा चुके हैं, क्योंकि इन किसानों को नर्मदा का जल खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो रहा है। कुछ किसान इस पानी को नालियों के माध्यम से दूर-दूर अपने खेतों में ले जा रहे हैं।