स्मारक के प्रशासक ने दौरा कर दिए निर्देश

महू। आंबेडकर स्मारक के प्रशासक कै लाश वानखेड़े ने स्मारक का दौरा कर बुद्ध विहार में रखे अस्थि कलश को जल्द ही स्मारक के मुख्य हॉल में स्थापित करने के निर्देश दिए।

स्मारक का प्रशासक बनने के बाद पहली बार कै लाश वानखेड़े ने स्मारक का दौरा कि या। यह दौरा चौदह अप्रैल को आंबेडकर जयंती उत्सव की तैयारियों को लेकर कि या गया। वानखेड़े ने करीब दो घंटे तक स्मारक का निरीक्षण किया और अव्यवस्थाएं दूर करने और नई व्यवस्था के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

बाबा साहेब का अस्थि कलश वर्षों से बुद्ध विहार के कमरे में रखा है। यहां आने वाले अनुयायियों को अगर दर्शन करना होते हैं तो उन्हें उस कक्ष में जाना होता है। अगर वह कक्ष खुला नहीं होता तो अनुयायी अस्थि कलश के दर्शन किए बिना ही चले जाते हैं। निरीक्षण के दौरान वानखेड़े ने निर्देश दिए कि अस्थि कलश के दर्शन सभी को हों, इसलिए वह स्मारक के मुख्य हॉल में स्थापित किया जाए। इसके लिए व्यवस्थित प्लेटफॉर्म बनाया जाए तथा आकर्षक विद्युत सज्जा की जाए।

पानी व शौचालयों की व्यवस्था

वानखेड़े ने स्मारक परिसर में बने शौचालयों व पेयजल की व्यवस्था को भी देखा। उन्होंने निर्देश दिए कि अनुयायियों की बड़ी संख्या को देखते हुए और शौचालयों का निर्माण कि या जाए। साथ ही पेयजल के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करें। वर्तमान में पीने के पानी की व्यवस्था अंदर व एक ही जगह है। अब स्मारक के दोनों कोनों में नल लगाकर प्लेटफॉर्म बनाया जाए ताकि एक समय में पंद्रह से बीस व्यक्ति पानी पी सकें ।

सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाएं

वानखेड़े ने अधिकारियों से कहा कि ऐसी व्यवस्था हो जिससे हम सोलर प्लांट लगाकर बिजली की पूर्ति कर सकें । हमें विद्युत वितरण कंपनी पर निर्भर न रहना पड़े। इस पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि इस प्लांट के लिए जितनी जगह चाहिए वह कम है और स्मारक के ढांचे में बिना हेरफे र कर यह करना मुश्किल है। खाली जगह व छत पर प्लांट लगा सकते हैं मगर वह काफी नहीं होगा।

उद्यान बनाने को कहा

वानखेड़े ने कहा कि स्मारक के दोनों ओर जो जगह है, उसे उद्यान के रूप में विकसित कि या जाए ताकि आने वाले अनुयायी कु छ समय आराम कर सकें । साथ ही चौकीदार के लिए एक झोपड़ी बनाई जाए। बाहर की ओर खाली पड़ी जमीन का पूरा उपयोग कि या जाए। जो भी कार्य करना है, वह मार्च तक पूरा कर लिया जाए।

नहीं बनाया जाएगा रसोईघर

निरीक्षण के दौरान एक अनुयायी ने कहा कि आंबेडकर की प्रतिमा पर कोट का रंग नीला कि या जाए, क्योंकि उनकी पहचान इसी रंग से है। इस पर मौजूद अधिकारी ने कहा कि आंबेडकर साहब की पहचान नीले रंग के कोट से नहीं है। उन्होंने इस रंग का कोट नहीं पहना व जहां-जहां डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगी है, कहीं भी उनके कोट को यह रंग नहीं दिया गया। एक अनुयायी ने बाहर से आने वाले अनुयायियों को भोजन बनाने के लिए रसोईघर बनाने की मांग की। इस पर वानखेड़े ने कहा कि यह एक पवित्र स्थान है। यहां इस व्यवस्था से गंदगी होगी। अगर उन्हें भोजन बनाना है तो दो-तीन कि मी जाकर बना सकते हैं। यहां यह व्यवस्था नहीं की जा सकती।

कारपेट बिछेगा या पेंट होगा?

गर्मी के दिनों में यहां लगा मार्बल काफी गर्म हो जाता है। इससे बचने के लिए कारपेट बिछाया जाए या पेंट कि या जाए। इस पर कु छ अनुयायियों का कहना था कि कारपेट बिछाया जाए, जबकि मौजूद अधिकारियों ने कहा कि उज्जैन के महांकाल मंदिर में एक विशेष प्रकार का पेंट कि या गया, जिस पर गर्मी में पैर नहीं झुलसते वह किया जाएं। यह एक स्थायी व्यवस्था हो जाएगी। कारपेट निकाल कर ले भी जाया जा सकता है। निरीक्षण में वानखेड़े के साथ तहसीलदार धीरेंद्र पाराशर, लोनिवि अधिकारी, आदिम जाति कल्याण विभाग की मोहिनी श्रीवास्तव, महू जनपद से मुश्ताक खान, आदि मौजूद थे।

ले.कर्नल अनंत भट्ट को सम्मान

महू। सेना दिवस पर नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां सेना से जुड़े तमाम सैन्य संस्थानों ने अपनी उन्नात तकनीक का प्रदर्शन आईडिया इनोवेशन मेला में किया। महू छावनी के सैन्य संस्थान मिलेट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग ने यहां टिरिल यानी टेक्टिकल इन्फ्रारेड इल्यूमिनेटर का प्रदर्शन किया। यह उपकरण संचालन प्रभावशीलता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके बारे में संस्थान के प्रमुख ले.ज. एमएम नरवणे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी सहित कार्यक्रम में पहुंचे अन्य गणमान्य अतिथियों ने कांबेट प्रभावशीलता बढ़ाने वाले इस उपकरण को काफी सराहा और एमसीटीई के ले.कर्नल अनंत भट्ट और उनकी टीम की सराहना की। भट्ट को प्रधानमंत्री द्वारा श्रेष्ठता का प्रमाण पत्र भी दिया गया। ले.कर्नल भट्ट आईआईटी खड़गपुर से एमटेक हैं और आफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ हैं। टिरिल पुकारे जाने वाले इस उपकरण के अलावा भी एमसीटीई ने पोर्टेबल रिमोट आईईडी डेटोनेशन इक्विपमेंट बनाकर भी अपनी तकनीकी और प्रौद्योगिकी दक्षता को साबित किया है। इसका प्रदर्शन 23 दिसंबर 2019 दिल्ली में आयोजित आर्मी टेक्नोलॉजी सेमिनार में हुआ था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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