महू। आपदा के इस दौर में कोरोना योद्घाओं के साथ ही महिलाओं ने सभी प्रकार की हिंसाओं का सामना करते हुए तन, मन और उत्साह से परिवार की सेवा और स्वास्थ्य की रक्षा की है। महिलाओं के संघर्ष को हमेशा से ही अनदेखा किया गया है।

यह बात डॉ. आंबेडकर विवि में जेंडर संवेदनशीलता और संबंधित मुद्दों पर चल रही वेब अकादमिक गतिविधि 'कोविड 19 महिलाओं के विरुद्घ हिंसा' विषय पर संगोष्ठी में शिक्षाविद् प्रो. पुष्पिता अवस्थी नीदरलैंड ने कही। मुख्य अतिथि प्रो. अन्नापूर्णा नोटियाल, कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, लेकिन वर्तमान कोविड-19 के दौर में हमें सुरक्षित रहने के लिए अलगाव अपनाना पड़ रहा है। समाज में महिला और पुरुष के लिए शक्ति और नियंत्रण के अलग-अलग मूल्य निर्धारित हैं। महामारी के दौर में महिलाओं को शारीरिक, मानसिक एवं मौखिक हिंसा का सामना करना पड़ा है। यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. अर्चना ठाकुर ने महिलाओं एवं बालिकाओं के कल्याण और बेहतरी के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा की जा रही पहल के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील होकर कार्य करने का है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रो. रीता सिंह ने कोरोना काल में बढ़ता लैंगिक विभेद एवं हिंसा विषय पर कहा कि लॉकडाउन के दौरान समाज से अलग परिवार में रहते हुए महिलाओं को हिंसा का सामना करना पड़ा है। प्रो. रेखा पांडे ने कहा कि महिलाओं को वर्तमान में दोहरी महामारी कोविड-19 और महिला हिंसा का सामना करना पड़ा है। सामाजिक संरचना के कारण घरों में भी महिलाएं पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं रह पाईं। डॉ. वत्सला शुक्ला ने फिल्मों में महिलाओं के प्रति दिखाए जाने वाले दृश्यों में महिला हिंसा को वर्णित करने वाले विषयों की जानकारी दी। डॉ. अवंतिका शुक्ला ने कोविड 19 के कारण महिला हिंसा बढ़ने के विभिन्ना कारणों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने इसको रोकने के लिए चलाए जा रहे सरकारी प्रयासों का भी वर्णन किया। कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि वर्तमान महामारी के दौर में पूरी मानवता चक्रव्यूह में है, जिसके मध्य में स्त्री है। इस चुनौती के समय में महिलाओं के प्रति हिंसा और असुरक्षा के साथ ही उनकी घरेलू भूमिका भी बढ़ी है। यह वेबिनार भारतीय संदर्भ में महिलाओं की भूमिका और जेंडरगत विभेद के विविध पहलुओं पर गंभीर विचार के साथ सकारात्मक हल तलाशेगी। आभार डॉ. मनीषा सक्सेना ने माना। संचालन वेबिनार संयोजक डॉ. मनोज गुप्ता ने किया।

लॉकडाउन के बाद बदला शिक्षा का परिदृश्य

महू। स्थानीय भेरूलाल पाटीदार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एक दिनी राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का विषय 'लॉकडाउन के बाद बदलता परिदृश्य कक्षा से परे शिक्षा' था। वेबिनार में 239 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें डीएवीवी की कुलपति डॉ. रेणु जैन, इंदौर संभाग में उधा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. सुरेश सिलावट मौजूद रहे। मुख्य वक्ता निरमा विवि अहमदाबाद की रत्ना राव थीं। अतिथि स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शोभा जैन ने किया। डॉ. रत्ना राव ने कहा कि कोरोना बीमारी और उसके कारण हुए लॉकडाउन ने पूरी मानव जाति और उसकी जीवन शैली को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जीवन का कोई क्षेत्र इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहा है। इस बदलाव का अनुभव सेक्शन क्षेत्र में भी किया गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पहल के साथ हमें अपने विद्यार्थियों को कौशल विकास के लिए भी तैयार करना होगा। डॉ. राव के व्याख्यान के मुख्य पहलू रचनात्मकता, मीडिया साक्षरता और संचार कौशल रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को आउट ऑफ द बॉक्स सोचने के लिए कहा। वेबिनार में अतिथि परिचय डॉ. रंजना वर्मा ने दिया। संचालन डॉ. स्वागत गुप्ता ने दिया। डॉ. प्रवीण ओझा को-ऑर्डिनेटर रहे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को तकनीकी मदद दे रहे आनंद इंगले और प्रीतम सिंह का आभार जताया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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