आदित्य सिंह महू (इंदौर)। Pithampur Industrial Area पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए नर्मदा का पानी मिलना अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। इस साल जब पानी शुरू हुआ तो उद्योगों को राहत मिली। दावा है कि नर्मदा का पानी यहां पहुंचने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में आने वाले 30 वर्षों तक पानी की कमी नहीं होगी। शासन ने अब उद्योगों को पानी देने के लिए अलग कंपनी बनाई है। यह औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एकेवीएन) के तहत काम करेगी, लेकिन इसकी बैंलेंस सीट एकेवीएन से अलग होगी। अब पानी का हिसाब-किताब पीथमपुर जल प्रबंधन कंपनी के पास होगा। यही इस योजना में आई लागत की भरपाई भी करेगी। पीथमपुर के उद्योगों के लिए नर्मदा का पानी देने के लिए पीथमपुर जल प्रबंधन कंपनी बनाई गई है।

यह पहली बार है जब देश में किसी औद्योगिक क्षेत्र को इस तरह से एक अलग कंपनी बनाकर पानी दिया जा रहा है। अब तक पीथमपुर के उद्योगों को दिया जाने वाले पानी का हिसाब-किताब एकेवीएन को ही रखना पड़ता था, लेकिन अब यह काम पीथमपुर जल प्रबंधन कंपनी करेगी। इस वर्ष से कंपनी की बैलेंस शीट बननी शुरू हो गई है। एकेवीएन के एमडी कुमार पुरुषोत्तम ही पीथमपुर जल प्रबंध्ान समिति के भी एमडी हैं। उनके अनुसार अलग कंपनी बनाने से उद्योगों की पानी से जुड़ी हर तरह की समस्याएं प्राथमिकता से सुलझाई जाएंगी। छोटी-बड़ी करीब दो हजार इकाइयों वाले पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को रोजाना उपयोग के लिए 30 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। इसके लिए यह उद्योग एकेवीएन को यूजर चार्ज के रूप में दो से ढाई करोड़ रुपए हर महीने देते हैं। यह करीब 85-90 प्रश तक ही वसूली है, लेकिन अब पीथमपुर जल प्रबंधन कंपनी का सौ प्रश के आसपास यूजर चार्ज ले रही है।

ऐसे में कंपनी को करीब तीन करोड़ रु. महीने मिलेंगे, वहीं गर्मी में पानी की मांग बढ़ने से यूजर चार्ज से राजस्व भी बढ़ेगा। इससे कंपनी को सालाना करीब चालीस करोड़ रुपए मिलेंगे। इसी तरह पीथमपुर के उद्योगों को नर्मदा का पानी देने के लिए खर्च किए गए तीन सौ करोड़ रुपए की लागत भी पूरी होगी। पीथमपुर में नर्मदा का पानी रंगवासा के पास बने एक ट्रीटमेंट प्लांट से पहुंच रहा है। यह प्लांट अपने आप में खास है। यह रोशनी के लिए केवल सौर ऊर्जा का ही उपयोग करता है। इस तरह करीब सवा लाख रुपए की मासिक बचत हो जाती है।

फार्मा कंपनियों को मिल रहा फायदा

पीथमपुर में बड़े निवेशकों के आने का एक कारण नर्मदा पानी का पहुंचना भी है। इस योजना को आने वाले करीब तीस वर्षों की जरूरत के हिसाब से बनाया गया था। फिलहाल करीब 30 एमएलडी पानी पहुंचा रही इस योजना से जरूरत के मुताबिक 60 एमएलडी और एक अन्य प्लांट बनाने के बाद करीब 90 एमएलडी तक पानी पहुंचाया जा सकता है। यह फार्मा उद्योगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। पीथमपुर के फार्मा उद्योगों के अनुसार नर्मदा का पानी आने से पानी की कठोरता खत्म करने में होने वाला उनका खर्च काफी कम हुआ है ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी फार्मा कंपनियां यहां आ रही हैं। पहले पीथमपुर के उद्योगों में फरवरी-मार्च में पानी खत्म हो जाता था और इसके चलते बहुत से प्लांट बंद करने पड़ते थे, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ।

हमारा लक्ष्य उद्योगों को मिलने वाले पानी का बेहतर प्रबंधन है। इसलिए एक अलग कंपनी बनाई गई है। इससे मिलने वाली राशि से योजना की लागत भी पूरी हो सकेगी। - कुमार पुरुषोत्तम, एमडी पीथमपुर जल प्रबंधन समिति

Posted By: Prashant Pandey

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