Sawan 2021: गौतमपुरा। इंदौर से 60 और उज्जैन से 45 किलोमीटर दूर गौतम ऋषि की तपस्थली गौतमपुरा में भोलेनाथ अचलेश्वर के रूप में विराजित हैं। यहां सात कुंड हैं। कहा जाता है कि सबसे बड़े कुंड में मां शिप्रा प्रकट हुई थीं। इसलिए आसपास के लोग कार्तिक माह और नवरात्रि सहित अन्य पर्वों पर यहां पर स्नान करने आते हैं।

पौराणिक महत्व

बुजुर्ग बताते हैं कि यहां गौतम ऋषि ने तपस्या करते थे। वे प्रतिदिन शिप्रा नदी में स्नान करने पैदल जाते थे। एक दिन स्वास्थ्य खराब था तो शिष्यों ने उनसे कहा कि आज आप न जाएं। ऋषि ने कहा कि शिप्रा मेरी मां है। वह मेरा प्रण टूटने नहीं देगी। वह स्वयं यहां आएगी। उन्होंने अपने शिष्य को अपना कमंडल देकर उज्जैन पहुंचाया और कहा कि यह कमंडल शिप्रा में डालकर आ जाना। इस पर शिप्रा प्रसन्न् हुई और अचलेश्वर महादेव मंदिर में कुंड में प्रकट हुई।

इसलिए नाम पड़ा उकाला. . .

यहां के जलकुंडों में पानी उकलता यानी गर्म रहता था। इसलिए इस क्षेत्र को उकाला और मंदिर को सात कुंड वाला उकाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। देवी अहिल्याबाई ने यहां पूरे मंदिर एवं सात कुंडों का निर्माण करवाया था। तब उन्होंने दो और शिव मंदिरों गौतमेश्वर महादेव एवं कृष्ण महादेव मंदिर का निर्माण भी कराया था। कहा जाता है कि तभी से इस नगर का नाम गौतमपुरा पड़ा है।

यहां मां शिप्रा प्रकट हुई है इसलिए इस पवित्र कुंड में स्नान का महत्व है। पहले यहां पर 12 माह पानी रहता था, मगर अब खेतों में बोरिंग होने के कारण चार माह ही पानी भरा रहता है। सबसे बड़ा कुंड इसमें मां शिप्रा की धारा प्रकट हुई, उसके पास वाला भगवान को जल चढ़ाने के लिए, एक कुंड भगवान अचलेश्वर महादेव के श्री चरणों में जल चढ़ाने के लिए है। साथ ही एक कुंड पुरुषों के नहाने के लिए, एक कुंड महिलाओं के स्नान के लिए एक कुंड पुरोहित के लिए एवं आखिरी कुंड कपड़े धोने के लिए बने हुए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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