Road Safety Campain: हरिओम गौड़.मुरैना। वाहनों को तेज रफ्तार में चलाने का जुनून जीवन पर भारी पड़ रहा है। जितने भी सड़क हादसे हो रहे हैं, उनमें से 90 फीसद से ज्यादा तेज रफ्तार के कारण हो रहे हैं। हादसों के कारण काली सड़कें किस कदर खून से लाल हो रही हैं, यह जानेंगे तो आपकी रूह कांप जाएगी। बीते तीन साल में तेज रफ्तार में वाहन चलाने के कारण 2600 से ज्यादा हादसे हुए हैं, जिनमें 742 लोगों की जान जा चुकी है, ढाई हजार से ज्यादा घायल हुए, जिनमें से डेढ़ हजार से ज्यादा ऐसे हैं, जो जीवनभर के लिए अपाहिज हो चुके हैं।

मुरैना यातायात पुलिस का रिकार्ड खंगालने पर सामने आया कि जनवरी 2020 से लेकर 31 अक्टूबर 2022 तक जिलेभर में 2786 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें से 2600 से ज्यादा हादसे तेज रफ्तार के कारण हुए हैं, ऐसे मामलों में पुलिस हादसे के जिम्मेदार ड्राइवर पर आइपीसी की धारा 279 के तहत केस करती है, इसी से हादसे का कारण तेज रफ्तार को बताया जाता है। चिंता की बात यह है कि सरकार ने सड़क हादसों व सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 10 फीसद की कमी करने का लक्ष्‌य बनाकर बीते तीन साल से काम शुरू किया है। इस लक्ष्‌य व प्रयासों की हकीकत डरावनी है, क्योंकि हर साल हादसों व मौतों का ग्राफ आसमान की ओर बढ़ता जा रहा है। ओवरस्पीड वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस के पास इंटरसेप्टर वाहन व स्पीड रडार भी हैं, लेकिन इनके उपयोग की रस्म अदायगी हो रही है। एक दिन में दो वाहनों पर भी ओवर स्पीड की कार्रवाई नहीं हो पा रही।

जगह-जगह टूटे पड़े डिवाइडर, संकेतक बोर्ड भी नहीं दिखतेः

मुरैना से नेशनल हाइवे 44 व नेशनल हाइवे 252 गुजरे हैं, इन पर 12 ब्लैक पाइंट हैं, जहां आए दिन हादसे हो रहे हैं। मुरैना शहरी क्षेत्र में हाइवे पर वाहन चलाने की गति ट्रकों के लिए 60 व कारों के लिए 70 किमी प्रति घंटे की तय है। हादसों के लिए चिन्हित ब्लैक पाइंट पर रफ्तार बताने वाले संकेतक व पीली बत्ती भी दिखती हैं, लेकिन हाइवे की अन्य जगह जहां हादसे होना आम बात है, वहां कोई संकेतक, ब्रेकर, रिफ्लेक्टर नजर नहीं आते। 60 किमी नेशनल हाइवे 44 पर 60 से ज्यादा जगह डिवाइडर व उसकी रेलिंग टूटी पड़ी है, कहीं से भी कोई भी वाहन व राहगीर अचानक सामने आने से भिड़ंत की घटनाएं हो रही हैं।

रोज 45 हजार वाहन निकल रहे, कार्रवाई दो पर भी नहीं:

तेज रफ्तार में चलने वाले वाहनों पर अंकुश इसलिए नहीं लग पा रहा, क्योंकि कार्रवाई ही नहीं हो रही। इसीलिए वाहन चालकों को तेज गति में वाहन चलाने पर पुलिस कार्रवाई का डर नहीं रहता। इसे ऐसे समझिए कि नेशनल हाइवे 44 पर हर रोज 45 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। इनमें से हर रोज 2 वाहनों पर भी ओवर स्पीड की कार्रवाई नहीं हो पा रही। क्योंकि मुरैना यातायात पुलिस ने इस साल इंटरसेप्टर वाहन के जरिए तेज गति में चलने वाले 471 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 4 लाख 72 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला। इनमें से 55 वाहनों पर चालानी कार्रवाई भी की। इसी तरह स्पीड रडार के माध्यम से महज 45 वाहनों पर कार्रवाई की जिनसे 46 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला गया है। यानी कुल 526 तेज रफ्तार वाहनों के चालकों पर कार्रवाई हुई है, जबकि इस दौरान हाइवे से 4 लाख 70 हजार से ज्यादा वाहन गुजरे हैं।

बाक्स

साल - हादसे - घायल - मृतक

2020 - 894 - 794 - 228

2021 - 975 - 893 - 273

2022 - 917 - 868 - 241

कुल - 2786 - 2555 - 742

नोट : 2022 के आंकड़े यातायात पुलिस के हैं, जो 1 जनवरी से लेकर 31 अक्टूबर तक के हैं।

यह सही है कि अधिकांश हादसे ओवरस्पीड के कारण होते हैं। ऐसे वाहनों पर हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हाइवे पर स्पीड ब्रेकर बनाने का प्राविधान नहीं है, इसलिए हम हाइवे से जुड़ी अन्य सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बनाते हैं, जिससे हाइवे पर आने से पहले वाहनों की गति थम जाए। हर संवेदनशील जगह पर स्पीड बताने के लिए संकेतक, ब्लेक पाइंट पर पीली बत्तियां व चेतावनी के बोर्ड भी हैं।

अखिल नागर,यातायात प्रभारी, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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