Swadesh Darshan 2.0: हरिओम गौड़, मुरैना। केन्‍द्र सरकार द्वारा वर्ष 2013 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना को नए स्वरूप स्वदेश दर्शन 2.0 में फिर से लांच किया गया है। इसमें मुरैना के बटेश्वरा, पड़ावली और मितावली को शामिल किया गया है। इसके तहत इन स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने व पर्यटकों को रिझाने वाले कार्य हर स्तर पर किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए ठहरने, खाने, आवागमन व सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वर्तमान में इन ऐतिहासिक व पर्यटन महत्व के स्थलों पर पानी, छांव, ठहरने और आवागमन की सुविधा नहीं है।

इसलिए खास हैं ये स्थल

बटेश्वरा मंदिर समूह : ग्वालियर से 35 किलोमीटर दूर नूराबाद क्षेत्र में आठवीं से 10वीं शताब्दी के बीच गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के शासनकाल में यहां 200 मंदिरों का समूह बनाया गया था। पुरातत्व विभाग के अनुसार 13वीं शताब्दी में ये मंदिर नष्ट हो गए। साल 2005 में इनके संरक्षण का काम शुरू किया गया और बिखरे पड़े पत्थरों को बीन-बीनकर 60 मंदिरों को उनके पुराने स्वरूप में खड़ा किया गया। अभी भी 140 से ज्यादा मंदिर खंडहर व पत्थरों के ढेर में हैं।

मितावली चौसठ योगिनी मंदिर : यह ग्वालियर से लगभग 30 किलोमीटर की दूर मितावली गांव की पहाड़ी पर है। कहा जाता है कि मुरैना के चौसठ योगिनी मंदिर के डिजाइन पर ही देश का प्रथम संसद भवन 1920 में बना था। इसमें 64 कमरे और बीच में एक खुला हुआ मंडप है। 13वीं सदी में बना यह मंदिर तंत्र विद्या का गुरुकुल कहा जाता था।

पड़ावली की गढ़ी : ग्वालियर से करीब 35 किलोमीटर दूर व बटेश्वरा मंदिर समूह से करीब एक किलोमीटर दूरी पर है। छोटी सी पहाड़ी पर बने इस छोटे किले में खूबसूरत नक्काशी व कलाकृति के मंदिर हैं, जो आज भी मजबूत स्थिति में हैं। माना जाता है कि इसका निर्माण 10 से 11वीं सदी के बीच हुआ है।

इनका कहना है

चंबल के बटेश्वरा, मितावली व पड़ावली को स्वदेश दर्शन 2.0 में शामिल किया गया है। योजना के तहत इन पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए विकसित किया जाएगा।

- विवेक क्षोत्रिय, अतिक्ति महाप्रबंधक, मप्र पर्यटन विभाग।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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