मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। चंबल की धरती चार साल पहले एक सकारात्मक मुहिम के चलते देशभर में चर्चा का विषय बनी थी। चंबल किनारे पर झोंपड़ी में रहने वाले एक संत ने इस धरती पर शराब बंद का आगाज कर दिया। संत की मुहिम का असर यह हुआ कि 250 गांवों में शराब बंदी का कानून सामाजिक स्तर पर बन गया। स्थिति यह बनी कि इस कानून को तोड़ने वाले पर जुर्माने तक किए गए। खासबात यह है कि इस मुहिम में जिस मानपुर पृथ्वी गांव में जहरीली शराब कई लोगों की जान ली। वह भी इस महापंचायत का हिस्सा रहा था। जिस शराब बंदी के लिए चंबल को देशभर में पहचान मिली। अब उसी शराब की वजह से देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

4 मार्च 2017 के दिन चंबल किनारे झोंपड़ी बनाकर रहने वाले संत हरिगिरी महाराज ने समाज में फैली शराब जैसी बीमारी को दूर करने के लिए हल्ला बोल दिया था। उन्होंने इसके लिए शनिश्चरा से पैदल यात्रा अपने शिष्यों के साथ शुरू की, जिसमें उन्होंने गांव - गांव जाकर सर्वसमाज से शराब बंदी का आव्हान किया। इस यात्रा का असर यह हुआ कि कई गांवों में पंचायतें आयोजित कर शराब बंदी का फैसला कर लिया गया। इसके बाद संत हरिगिरी ने इस मुहिम को और तेजी प्रदान की।

इसके लिए चंबल के घाट पर ही लगभग 200 के करीब गांवों की महापंचायत का आयोजन किया, जिसमें संत हरिगिरी महाराज के नेतृत्व गांवों के लोगों ने सामूहिक शराब बंदी का फैसला लिया। इसके साथ ही शराब पीने वालों पर जुर्माने का भी कानून बनाया गया। इसके बाद जोधा बाबा मंदिर पर भी सैंकड़ों गांवों के लोग इकट्ठा हुए। जहां इस कानून में सख्ती लाने और शराब ठेकों को छोड़ने का आव्हान किया गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि गुर्जर समाज के जितने भी शराब ठेकेदार थे, उन्होंने इस धंधे से तौबा कर लिया। संत के आव्हान ने लोगों को शराब के लिए लामबंद कर दिया। लेकिन समय के साथ यह मुहिम कुछ कमजोर पड़ी तो अवैध शराब कारोबारियों ने ग्रामीण इलाकों में अपने पैर फिर से पसार लिए।

मानपुर पृथ्वी में भी प्रेरणा लेकर हुई थी शराब बंदी

संत हरिगिरी के आव्हान के बाद सर्वसमाजों ने इससे प्रेरणा ली, जिसमें मानपुर पृथ्वी गांव में भी पंचायत कर शराब बंदी का निर्णय लिया गया था। इसी तरह क्षत्रिय समाज ने भी कई गांवों में पंचायतें कर इस शराब से तौबा करने का निर्णय लिया था। इस कुरीति से दूर रहने के लिए लगभग हर समाज ने ही इसमें बढ़कर भागीदारी की। निगरानी टोलियां भी बनाई गई, लेकिन अवैध शराब के इस कारोबार ने गांवों में इस मुहिम को बट्टा लगाने का काम किया।

कई लोगों पर हो चुका था जुर्माना

शराब बंदी के दौरान निगरानी टीमों ने कई लोगों को शराब का सेवन करते हुए पकड़ा। जिन पर 11000 हजार रुपये लेकर 2 लाख रुपये से अधिक तक का जुर्माना भी वसूला गया। पंचायतों ने सामूहिक रूप से यह जुर्माने लगाए। नूराबाद, शिवलाल पुरा में इस तरह के लोगों पर सामाजिक पंचायतों में यह जुर्माने किए गए। जुर्माना न देने पर समाजिक वहिष्कार का प्रावधान था। जिससे ज्यादातर ने जुर्माना दिया। इसके साथ ही गुर्जर समाज के जितने भी शराब ठेकेदार था, उन्होंने अपने वैध ठेकों तक को छोड़ दिया। जो आज भी इस पर कायम हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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