Coronavirus Morena News: हरिओम गौड़, मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 332 गांव कोरोना के खिलाफ जंग में अनूठी भूमिका निभा रहे हैं। यह संभव हुआ है महिलाओं द्वारा गांव-गांव में चलाए गए 'कोरोना से लड़ने व्यवहार बदलो" अभियान से। जिले के स्वसहायता समूहों से जुड़ीं साढ़े चार हजार से ज्यादा महिलाएं ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों से लेकर युवाओं व बच्चों की उन आदतों को बदल रही हैं, जिनके कारण कोरोना हावी हो सकता है। शहरों के बाद ग्रामीण इलाकों में कोरोना के बढ़ते खतरे को इन महिलाओं ने भांपा और सरकार के 'किल कोरोना अभियान" से पहले ही आदतें बदलने गांव-गांव में दस्तक दे दी।

मार्च के बाद कोरोना बढ़ने से शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे श्रमिक घर लौटे। इसके अलावा शादियों की खरीदारी व फसल बेचने के लिए भी ग्रामीणों का शहरों व बाजारांे में आवागमन बढ़ गया। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया। इसे समझते हुए जिले के 4550 स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 'कोरोना से लड़ने व्यवहार बदलोे" अभियान चलाया।

इसमें 332 गांवों के 49 हजार से ज्यादा घरों के अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिलाओं की पंचायत बुलाकर, समर्थन मूल्य खरीद केंद्रों पर जाकर किसानों को कोरोना फैलने के कारण, उसके नुकसान के साथ-साथ इससे बचने के लिए आदतों में बदलाव की नसीहत दी। ग्रामीणों में साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनने की आदत नहीं थी। महिलाओं ने बार-बार समझाइश देकर ग्रामीणों की आदत बदलवाई। खेतों व मंडी में फसल लेकर जाने वाले किसानों को मास्क व सैनिटाइर का उपयोग उनकी आदत में शामिल करवाया।

लोगों को शादियों में मेहमानों की भीड़ नहीं जुटाने, खरीदारी के लिए बार-बार बाजार जाने की आदत बदलने का आग्रह किया। इनकी समझाइश पर अंबाह, जौरा व कैलारस क्षेत्र के गांवों में तो दर्जनों लोगों ने शादियों को ही टाल दिया है। इसके अलावा शहरों से जो मजदूर गांवों में लौटकर आ रहे हैं, उन्हें घर व गांव से अलग 10 दिन के लिए क्वारंटाइन भी किया ताकि किसी को संक्रमण हो तो वह गांवों में नहीं फैले।

अफवाहों को रोककर टीकाकरण के लिए किया जागरूक

स्वसहायता समूहों ने यह अभियान 16 अप्रैल से शुरू किया। इसके तहत 167 से ज्यादा ग्रामीण कार्यशाला हो चुकी हैं। इसके अलावा गांवों में गीत, भजन, नुक्कड़ नाटक आदि कई गतिविधि चलाकर महिलाएं सबसे महत्वपूर्ण काम कोरोना वैक्सीन को लेकर कर रही है। वे वैक्सीन के बारे में चल रही अफवाहों से ग्रामीणों को सचेत कर रही हैं। अफवाहों की हकीकत व वैक्सीन के फायदे बताने का असर यह हुआ कि कई गांवों में महिलाएं व बुजुर्ग आगे बढ़कर वैक्सीन लगवाने लगे हैं।

इनका कहना

हम गांवों को महामारी से बचाने हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। स्व सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से जो जागरुकता आई है, उससे सैकड़ों गांव फिलहाल कोरोना से बचे हुए हैं। महिलाओं की समझाइश के बाद गांवांे में टीकाकरण का ग्राफ बढ़ा है।

- रोशन कुमार सिंह, सीईओ, जिला पंचायत, मुरैना

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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