- राजकीय सम्मान व गार्ड ऑफ ऑनर के अंतिम संस्कार, राजस्थान के सीएम गहलोत पहुंचे, मप्र के सीएम ने फोन पर व्यक्त की संवेदनाएं।

Dr. SN Subba Rao: मुरैना, नईदुनिया प्रतिनिधि। गांधीवादी डॉ. एसएन सुब्बाराव की पार्थिव देह गुरुवार केा जौरा के गांधी सेवा आश्रम में पंचतत्व में विलीन हो गई। सुब्बाराव का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान व गार्ड ऑफ ऑनर सम्मान के साथ उनके बहनोई मेजर ईश्वर जॉयस पाराशरन ने किया। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फोन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं, वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और आत्मसर्पिद दस्यु भी जौरा के गांधी सेवा आश्रम में श्रद्घांजलि देने पहुंचे।

गौरतलब है कि चंबल के बीहड़ों में आतंक का पर्याय बन चुके 654 डकैताें सामूहिक आत्मसर्पण कराने वाले गांधीवादी, समाजसेवी डॉ. सेलम नाजुदुईया (एसएन) सुब्बाराव था, का 92 साल की उम्र में बुधवार की सुबह 6 बजे जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया था। गुरुवार की सुबह 10 बजे जौरा के गांधी सेवा आश्रम में अंतिम दर्शनों के लिए रखी। सुब्बाराव को श्रद्धांजलि देने मप्र ही नहीं बल्कि, राजस्थान, यूपी, बिहार, झारखण्ड, पंजाब, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडू आदि राज्यों से समाजसेवी आए। दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकिन, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संवेदना संदेश के साथ श्रद्धांजलि देने आए। वहीं भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह, गिर्राज डण्डोतिया, पूर्व सांसद अशोक अर्गल, जिला अध्यक्ष योगेशपाल गुप्ता, वहीं कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह, जीतू पटवारी, लाखन सिंह यादव, विधायक रविन्द्र सिंह तोमर, बैजनाथ कुशवाह, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराज, पूर्व विधायक सत्यभानू सिंह चौहान, महेशदत्त मिश्रा आदि आए। इनके अलावा भोपाल से सीनियर आईपीएस, एडीजीपी अनुराधा शंकर, 5वीं वाहिनी कमाडेंट विनीत जैन भी गुरुवार की सुबह ही गांधी सेवा आश्रम पहुंच गए। क्षेत्रीय विधायक सूबेदार सिंह की गैर हाजिरी जौरा की जनता में ही चर्चाओं का विषय बनी रही। राजकीय सम्मान के तहत कलेक्टर बी कार्तिकेयन व एसपी ललित शाक्यवार ने डॉ. सुब्बाराव की पार्थिव देह पर तिरंगा चढ़ाया। उसके बाद सर्वधर्म सभा हुई पंडितों ने मंत्रोच्चारण किए, एक मुस्लिम युवती ने फतिहा पढ़ा तो सिख समाज के गुरुओं व ईसाई समाज के पादरी ने आत्मशांति की प्रार्थना की। शाम 4 बजे आश्रम परिसर में ही अंतिम संस्कार की रस्में हुईं। इस दौरान परिसर में मौजूद हजारों लोग डॉ. सुब्बाराव के भजन गाते रहे व सुब्बाराव अमर रहे के नारे लगाते रहे। डॉ. सुब्बाराव के चश्मा, टोपी व झोले को गांधी सेवा आश्रम के संग्रहालय में रखा जाएगा।

छुट्टी नहीं दी तो नौकरी से इस्तीफ देकर आ गया

पंजाब के चंढ़ीगढ़ के रहने वाले आकाश सिंह चार पहिया वाहनों के टायरों की रिम बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता है। आकाश भी श्रद्धांजलि देने जौरा के गांधी सेवा आश्रम में पहुंचा और माइक पर बोलते-बोलते रो पकड़ा। आकाश ने कहा कि मैं बहुत घमंडी था, एक बार सुब्बारावजी के शिविर में गया वहां से पूरा जीवन बदल गया। बुधवार को इनके निधन की खबर मिलते ही मैं छुट्टी मांगने सुपरवाईजर के पास गया तो उन्होंने छुट्टी नहीं दी। तत्काल में इस्तीफा लेकर जीएम के पास पहुंचा और यहां आ गया। अगर मैं आज अंतिम दर्शन नहीं कर पाता और चरणों में शीश नहीं झुका पाता तो जीवनभर दुखी रहता।

जौरा के अधिकांश बाजार बंद, कस्बे में पसरा मातम

डॉ. सुब्बाराव 50 साल से ज्यादा समय से जौरा के गांधी सेवा आश्रम से जुड़े थे। उन्होंने ही इस आश्रम की नींव रखी और कईयों साल यहां गुजारे। उनके निधन की खबर ने जौरा में मातम पसरा दिया। गुरुवार को कईयों बाजार दिनभर बंद रहे। दुकानदारों से लेकर क्षेत्रीय रहवासी भी सुब्बाराव को श्रद्धांजलि देने व उनके अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे। इस दौरान कस्बे में पुलिस की कड़ी व्यवस्था रही। जिलेभर के अधिकांश थाना प्रभारियों को जौरा में जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर दिया गया।

हमारी गैंग के सरदार ने बात नहीं मानी, वो इनकाउंटर में मारा गया

श्योपुर के बर्धा जिले के रामविलास गुर्जर भी आत्मसर्पित दस्यु हैं, जिन्हों डॉ. सुब्बाराव के कहने पर हथियार डाले थे। जौरा आए रामविलास ने बताया कि गांव के दबंगों की प्रताड़ना से तंग आकर 1966 में डकैत बन गया था, उनकी गैंग में 40 लोग थे। कईयों अपहरण, लूट-पाट कीं। जब सुब्बाराव मिले तो पूरी गैंग हथियार डालने तैयार हो गई, पर हमारी गैंग का सरदार सोबरन सिंह और एक अन्य साथी कश्मीर सिंह ने एन वक्त पर मना कर दिया और आत्मसर्पण नहीं किया। हम को पांच साल बाद रिहा हो गए, जेल से बाहर आए उससे दो साल पहले ही सरदार सोबरन सिंह व कश्मीर सिंह को पुलिस ने मार गिराया। सुब्बारावजी ने मेरे जैैसे कई डकैतों का जीवन बचाया और बदल दिया।

मुझ पर 135 केस लगे, सुब्बारावजी ने कहा तो बंदूकें छोड़ दीं

सुब्बाराव को भीगी आंखों से श्रद्धांजलि देने पहुंचे आत्मसमर्पित डकैत सोनेराम सिंह ने बताया कि पुलिस के एक मुखबिर ने उसे इतना प्रताड़ित किया, कि 24 साल की उम्र में डकैत बन गया। वह माधव सिंह की गैंग का साथी था, जिसकी दहशत से पूरी चंबल कांपती थी। सोनेराम सिंह ने बताया कि उस पर 135 केस लगे। लेकिन जब उनके अड्डे पर सुब्बाराव आए, फिर जयप्रकाश व बिनाेवा भावे ने भरोसा दिलाया कि किसी को फांसी नहीं होगी तो पूरी गैंग ने हथियार डाल दिए। डा. सुब्बाराव ने डकैताें को सरेंडर के बाद सरकार से सुविधाएं दिलाईं, बच्चों के पढ़ने व नौकरी की व्यवस्थाएं करवाईं। उन्होंने चंबल क्षेत्र के साथ डकैतों का जीवन भी बदल दिया।

सेना की वर्दी छोड़ डकैत बना, सुब्बारावजी फिर घर ले आए

रींझोनी गांव रहने वाले आत्मसमर्पित डकैत बहादुर सिंह ने बताया, कि 19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गया। छुट्टी पर आया तो गांव के दबंगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। मुझे बहुत प्रताड़ित किया, इसीलिए बंदूक लेकर बीहड़ में कूद गया। तीन साल तक माधौसिंह व हरिविलाश कुशवाह की गैंग में रहा। कईयों बाद पुलिस से मुढभेड़ हुई। कूनों नदी पर पुलिस ने छह गिरोहों को घेर लिया, मेरे कंधे में एक गोली लगी, तब भी डकैती नहीं छोड़ी। लेकिन डॉ. सुब्बारावजी, द्वार तुम्हारे आया हूं.. भजन गाते हुए हम लोगों के पास आए तो ऐसा ह्दय परिवर्तन हुआ, कि उसी दिन बंदूकें छोड़ दीं। बाद में 654 डकैतों के साथ मैंने भी हथियार डाल दिए।

सम्मान में जौरा बंद, हर ओर मातमः डाक्टर सुब्बाराव भले ही कर्नाटक के बेंगलुरु के थे, लेकिन उनका प्रभाव जौरा के जन-जन पर है, जो उनके निधन के बाद दिख रहा है। जौरा और आसपास के क्षेत्रों में मातम पसरा हुआ है। सुब्बाराव के निधन से दुखी जौरा के व्यापारियों ने आज अपना कारोबार थामकर बाजार बंद कर दिया है।

अस्पताल में हुआ निधनः प्रख्यात गांधीवादी नेता और चंबल की धरती को डकैतों के आतंक से मुक्ति दिलाने वाले डा एसएन सुब्बा राव का बुधवार काे तड़के 4:00 बजे जयपुर के अस्पताल में निधन हुआ है। बीती शाम काे उनकी पार्थिव देह मुरैना पहुंच गई थी। डा एसएन सुब्बा राव का पूरा जीवन समाजसेवा काे समर्पित रहा है। डा सुब्बा राव ने 14 अप्रैल 1972 काे गांधी सेवा आश्रम जाैरा में 654 डकैताें का समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण एवं उनकी पत्नी प्रभादेवी के सामने सामूहित आत्मसमर्पण कराया था। इनमें से 450 डकैताें ने जाैरा के आश्रम में, जबकि 100 डकैताें ने राजस्थान के धाैलपुर में गांधीजी की तस्वीर के सामने हथियार डालकर समर्पण किया था। ग्वालियर चंबल संभाल में डा सुब्बा राव साथियाें के बीच भाईजी के नाम से प्रसिद्ध थे। डा सुब्बा राव ने जाैरा में गांधी सेवा आश्रम की नींव रखी थी, जो अब श्योपुर तक गरीब व जरूरतमंदों से लेकर कुपोषित बच्चों के लिए काम कर रहा है। डा सुब्बा राव ने श्याेपुर के त्रिवेणी संगम घाट पर गांधी जी की तेरहवी का आयाेजन शुरू करवाया था।

Posted By: vikash.pandey

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