मुरैना। नईदुनिया प्रतिनिधि। मुरैना जिले के कई गांवों में श्मशान नहीं या फिर दबंगों का कब्जा है, इन गांवों में बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करना सबसे बड़ी मुसीबत का काम हो जाता है। ऐसा ही मामला अंबाह क्षेत्र के कटारे का पुरा गांव में सामने आया जहां मंगलवार को मृतक का शव अंतिम संस्कार के लिए 12 घंटे से ज्यादा समय तक घर मंे रखना पड़ा। बारिश नहीं थमी तो खेत में बुधवार को ग्रामीणों ने खेत में टिनशेड बनाया, जिसमें पार्थिव देह का अंतिम संस्कार हुआ।

अंबाह जनपद की पलपुरा पंचायत के कटारे का पुरा गांव में मंगलवार की दोपहर 56 वर्षीय नत्थी सिंह पुत्र मलखान सिंह का निधन हो गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां हो गई थीं, लेकिन उसी समय तेज बारिश शुरू हो गई। गांव में श्मसान के नाम पर खाली मैदान है, जहां बारिश का पानी घुटने-घुटने गहरा भर गया। रास्ता भी कीचड़ व पानी में डूब गया। देर शाम तक बारिश नहीं रुकी और रात में अंतिम संस्कार होता नहीं, इसलिए इसे बुधवार के लिए टाल दिया। बुधवार की अल सुबह से फिर बारिश शुरू हो गई।

उधर 12 घंटे से भी ज्यादा समय से रखी मृतक की पार्थिव देह खराब होने लगी। आनन-फानन में ग्रामीणों ने पास ही खेत में अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। गांव के युवाओं ने बारिश के बीच खेत के एक किनारे पर अस्थायी टिनशेड तैयार किया। टीनशेड के नीचे करीब एक फीट ऊंचा मिट्टी का चबूतरा बनाया, क्योंकि पूरे खेत में पानी भरा हुआ था। चबूतरा बनाने व टीनशेड लगाने के बाद शव का अंतिम संस्कार बारिश के बीच हुआ।

जौरा के गैपरा में तिरपाल लगाकर हुआ अंतिम संस्कार

12 जुलाई को पहाड़गढ़ जनपद की गैपरा पंचायत में 75 साल की गौरा बाई का निधन हो गया। बारिश से बचने के लिए श्मशान में टीनशेड तक नहीं था। ऐसे में एक तिरपाल मंगवाई गई। गांव के 5-6 युवा रस्सियों से बांधकर तिरपाल को ऊंचा करके पकड़े रहे, उसके बाद शव का अंतिम संस्कार हुआ।

इनका कहना है

मेरी जानकारी में यह मामला अभी तक नहीं आया, ना ही किसी ग्रामीण ने श्मशान को लेकर कोई शिकायत मुझसे की है। जनपद पंचायत हर गांव में पक्का श्मशान बनवा रही है। मैं जांच करवाता हूं कि पलपुरा-कटारे पुरा में क्या परेशानी है। अगर श्मशान या रास्ते पर अतिक्रमण होगा तो उसे हटाया जाएगा।

ललित चौधरी, जनपद सीईओ, अंबाह

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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