मुरैना। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य से सैलानियों को जोड़ने वाली चंबल सफारी 15 अक्टूबर तक शुरू नहीं हो पाएगी। इसके लिए सैलानियों को नवंबर का भी इंतजार करना पड़ सकता है। नदी में बार-बार घट बढ़ रहे जलस्तर के कारण हर साल 1 अक्टूबर से शुरू हाने बोट क्लब की शिफ्टिंग का काम फिलहाल रोक दिया गया है।

चंबल नदी में इस बार आई बाढ़ ने नदी तक पहुंचने वाले कच्चे रास्ते को बर्बाद कर दिया है। जिस पक्के चबूतरे पर सफारी के काउंटर आदि बनाए जाते हैं वह भी पानी में डूबा हुआ है। नदी में बोट क्लब के प्लेट फार्म को बनाने के लिए भी ठोस जगह उपलब्ध नहीं है।

आम तौर पर 1 अक्टूबर से चंबल सफारी के लिए जरूरी स्ट्रेक्चर तैयार करने का काम शुरू हो जाता था और बोट को 15 अक्टूबर से नदी में उतार दिया जाता था। इस बार रास्तेे कच्चे और जल स्तर अधिक होने के कारण यह काम नहीं हो पाएगा।

नदी उतरने के बाद, रखेंगे नजर

अधिकारियों के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता कि नदी में पानी घटते ही तत्काल प्लेटफार्म तैयार कर दिया जाए, क्योंकि नदी में दो बार ऐसा हो चुका है कि जल स्तर घटने के बाद कोटा बैराज से फिर पानी छोड़ दिया गया और नदी में उफान आ गया, इसलिए नदी उतरने के बाद भी नदी की लगातार निगरानी की जाएगी।

राजस्थान की सफारी से ज्यादा क्रेज

मध्यप्रदेश की चंबल सफारी के अलावा नदी के सामने वाले घाट पर राजस्थान का चंबल बोट क्लब भी है, लेकिन मध्यप्रदेश की चंबल सफारी में अधिक बोट और नदी किनारे पर रेत होने के कारण सैलानी एमपी की तरफ आना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में सैलानियों को चंबल सफारी शुरू होने का इंतजार रहता है। सैलानियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वोट क्लब को शुरू होेने में नवंबर का पहला हफ्ता लग सकता है।

इनका कहना है

नदी में जल स्तर सामान्य नहीं है। बीच में पानी कम हुआ, लेकिन फिर डैम से पानी छोड़ दिया गया। इसलिए हम 15 अक्टूबर तक सफारी की शुरूआत नहीं कर पाएंगे। इसके लिए हम पूरी तसल्ली के बाद सफारी को ओपन करेंगे। इसमें नवंबर तक का समय लग सकता है।

पीडी गेब्रियल, डीएफओ मुरैना