हरिओम भारद्वाज, पहाड़गढ़ (नईदुनिया न्यूज)

मुरैना जिले का इकलौता जंगल पहाड़गढ़ क्षेत्र में हैं, जिसका अस्तित्व लगातार सिमटता जा रहा है। भू-माफियाओं की काली नजर इस जंगल पर ऐसी पड़ी है, कि लगातार हरियाली कम हो रही है। जंगल के पेड़ों को काटकर दबंग भू-माफिया खेत बनाकर उनमें खेती कर रहे हैं। यह खेल सालों से चल रहा है और लगातार जारी है। वन विभाग ने इसे रोकने के लिए ऐसे कोई कदम आज तक नहीं उठाए कि, पहाड़गढ़ का जंगल कटने से बच पाए।

बारिश का सीजन शुरू होते ही पूरा जंगल हरा-भरा हो गया है। यह हरियाली किसी का भी मनमोह लेती है, लेकिन इस हरियाली के आढ़ में भी भू-माफिया, लकड़ी माफिया और दबंगों की तिकड़ी सक्रिय हो गई है। बारिश के कारण जंगल के कई रास्ते बंद हो जाते हैं, इसी का फायदा उठाकर भू-माफिया, लकड़ी माफिया व दबंगों ने पेड़ों को काटकर जंगल की जमीन को खेत बनाना शुरू कर दिया है। धौधा, देवरा, पहाड़गढ़, मानपुर, बहराई के जंगलों में यह खेल अंधाधुंध तरीके से चल रहा है। रविवार की शाम कन्हार वनचौकी को सूचना मिली कि कन्हार के जंगल में पेड़ों को काटकर कुछ दबंग खेत बनाने के काम में लगे हैं। सूचना के बाद कन्हार चौकी प्रभारी कीर्ति शांडिल्य अपनी टीम व एसएएफ जवानों को लेकर गश्त पर निकले को घने जंगल के बीच पेड़ व झाड़िया कटी हुई मिली। पास ही जमीन पर जुताई करने वाला हल व अन्य उपकरण मिले। वनटीम को आता देख पेड़ काट रहे दबंग वहां से भाग निकले, वन विभाग की टीम ने पूरी सामग्री जप्त कर ली। भागे हुए आरोपितों में से दो की पहचान वनकर्मियों ने कर ली, जिनके नाम नीरज पुत्र नत्थाराम जाटव एवं वीरेन्द्र पुत्र नत्थाराम जाटव बताए गए हैं, दोनों के खिलाफ वनचौकी में अपराध दर्ज किया गया है।

गश्ती वाहन महीनों से खराब, कैसे हो जंगल की सुरक्षा

पहाड़गढ़ का जंगल इतना बढ़ा है कि उसके गश्त के लिए कर्मचारियों को वाहन दिए गए हैं, लेकिन यह वाहन खटारा हो गए हैें और महीनों से खराब पड़े हैं। पहाड़गढ़ और कन्हार रेंज के गश्ती वाहन करीब 8 महीने से खराब पड़े हैं, स्थानीय कर्मचारी इन वाहनों की मरम्मत की मांग कईयों बार कर चुके लेकिन एसडीओ व डीएफओ आफिस ने इसे अब तक गंभीरता से नहीं लिया। स्थिति यह है कि जहां सबसे ज्यादा जरूरत है वहां वन विभाग के पास गश्त के लिए वाहन नहीं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर कैलारस रेंज का वाहन बुलाना पड़ता है। कई वनकर्मी ऐसे हैं जो खुद के वाहन से गश्त कर रहे हैं। वन विभाग के पास गश्त का वाहन नहीं होने का फायदा भू-माफिया व दबंग उठा रहे हैं।

देवरा में जंगल उजाड़ कर की जा रही खेती

पहाड़गढ़ क्षेत्र में धौंधा के देवरा इलाके में माफिया ने इतना जंगल उजाड़ दिया है कि एक कस्बा उसमें बस सकता है। लगभग पांच सौ बीघा जमीन पर खड़ा जंगल काट दिया गया है, अब इस जमीन पर खेती की जा रही है। यह खेती जंगलों को पहले काटा गया, इसके बाद शुरू हुई है। लगभग आठ साल से यहां लकड़ी काटने और खेती करने का काम किया जा रहा है। दरअसल इसकी वजह है कि इस जमीन को कोई धनी-धौरी नहीं है। राजस्व विभाग और वन विभाग दोनों ही इस जमीन को लेकर गफलत में है। दरअसल राजस्व विभाग कहता है कि इस जमीन को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है, वहीं वन विभाग इस जमीन की सुपुर्दगी न होने की बात कह देता है। जिसका फायदा यहां माफिया उठा रहा हैं यहां से पूरे जंगल काट दिए और जमीन पर हर साल गेहूं और सरसों की खेती कर रहा है। लेकिन इसके बावजूद इसे कोई देखने वाला नहीं है। जबकि यह 500 बीघा के करीब जमीन है। जंगल में खैर की लकड़ी काटना प्रतिबंधित है। बताया जाता है कि इस खैर की लकड़ी का उपयोग कत्था बनाने में उपयोग किया जाता है। इसकी सुरक्षा के लिए पहाड़गढ़ में वन विभाग की सब रेंज बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद यहां माफियाओं की धर पकड़ के मामले शायद ही कभी सामने आए हों। जबकि यहां से एक बार पुलिस ने ही लकड़ियों से भरी ट्रॉली पकड़ ली, लेकिन वन विभाग इस ओर ध्यान तक नहीं देता। जिसकी वजह से लगातार जंगल क्षेत्र से यह लकड़ी काटी जा रही है। आलम यह है कि जंगल के कई इलाके ऐसे हैं जहां से पेड़ पूरी तरह से गायब ही हो गए है। कई बीघा में महज इनके ढूंढ़ ही खड़े दिखाई देते हैं। इसके यहां बैल गाड़ियों और ट्रालियों से भरकर क्विंटलों लकड़ी ले जाई जा रही है। यह क्रम लगातार यहां सालों से चला आ रहा है। जिससे यह जंगल पूरी तरह से उजाड़ हो रहे हैं। इसको रोकने के लिए जिम्मेदार यहां कोई ठोस कार्रवाई कभी कर नहीं सके हैं।

वर्जन

- यह सही है, कि चौकी कन्हार मे का वाहन आठ महीने से बंद पड़ा हुआ है। विभाग ने हमें सुरक्षा के लिए चार कर्मचारियों का बल दिया है, जिसमें एसएएफ दिया है, वाहन नहीं होने के कारण इन जवानों का उपयोग भी जंगल की सुरक्षा में नहीं कर पा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर कैलारस रेंज की गाड़ी बुलाते हैं। हां रविवार शाम को दो आरोपितों पर कार्रवाई हुई है तो जंगल काटकर खेत बना रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

प्रणय श्रीवास्तव

वन विभाग रेंजर, पहाडगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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