मुरैना। झाबुआ में आयोजित राज्य स्तरीय पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में 72 किला वर्ग में मुरैना की ईशा सिंह ने गोल्ड मेडल जीता है। इसी के साथ उन्होंने पॉवर वूमन ऑफ एमपी का खिताब भी अगले एक साल के लिए अपने नाम कर लिया। नईदुनिया ने ईशा से बातचीत की और दो साल के भीतर ही इस मुकाम को पाने की पूरी कहानी जानी। इस कहानी में ईशा एक आम लड़की की तरह अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने जिम पहुंचीं थीं, लेकिन उसी दौरान आयोजित हुए पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता ने उनकी जिंदगी बदल दी।

ईशा सिंह के पिता डॉ. एएस गेहलोत पीजी कॉलेज में केमिस्ट्री विभागाध्यक्ष हैं। ईशा ने बताया कि साल 2017 में वे ओल्ड हाउसिंग बोर्ड स्थित जिम ज्वाइन करने के लिए गई थीं। तब उनका वजन 88 किलो हुआ करता था। ईशा के मुताबिक उनका एक ही मकसद था और वह था अपना बढ़ा हुआ वजन कम करना। इसी दौरान जिम के कोच अजय शर्मा व अरुण शर्मा ने एक पावर लिफ्टिंग कांटेस्ट आयोजित किया।

इसे देखकर ईशा ने भी पॉवर लिफ्टिंग शुरू करने की सोची। प्रैक्टिस के दौरान ईशा ने पहली बार साल 2017 में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 185 किलो वजन उठाकर गोल्ड जीता। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब तक वह 124 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। ईशा का वजन अब 69 किलो है और वे 72 किलो वर्ग में पॉवर लिफ्टिंग करती हैं।

छोड़ दी नौकरी

ईशा दिल्ली में स्पाइस जेट कंपनी में एयर हास्टेस थीं। साल 2017 में जब अपने जीवन का पहला गोल्ड जीता तो उन्होंने 6 महीने बाद ही नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उनके परिवार ने भी उनका सपोर्ट किया और आज ईशा मध्यप्रदेश की सबसे शक्तिशाली लड़की बन चुकी हैं। ईशा के मुताबिक वे जल्दी ही पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय प्रतियोगता में भाग लेंगी ।

दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणा

ईशा मुरैना की दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। जिस चंबल अंचल में लड़कियों पर कई तरह के सामाजिक प्रतिबंध हैं। उस चंबल में ईशा का दो साल में ऊंचाइयां छूना चमत्कार से कम नहीं। ईशा ने बताया कि उसकी तरह दूसरी लड़कियां भी पॉवर लिफ्टिंग में आना चाहती हैं, लेकिन उनके परिवार सपोर्ट नहीं करते। ईशा के मुताबिक उनकी डाइट का मासिक खर्चा ही 40 से 50 हजार रुपए है। जो परिवार के सहयोग के बिना संभव नहीं।

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Posted By: Hemant Upadhyay