Madhya Pradesh News : मुरैना। नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में किडनी की बीमारी से पीड़ित एक युवक की मौत हो गई। मौत कब हुई इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन कठघरे में हैं क्योंकि मौत का पता गुरुवार सुबह उस समय चला जब शव से दुर्गंध आने पर वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों ने शिकायत की। मरीजों का यहां तक कहना है कि शव में कीड़े भी पड़ गए थे।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि युवक की मौत गुरुवार की सुबह ही हुई है। युवक अज्ञात के रूप में अस्पताल के बाहर मिला था। इस दौरान कोई परिजन कभी अस्पताल नहीं आया। मौत के बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मुरैना में उसकी बहन का पता लगाकर बुलवाया। प्रबंधन ने शव बिना पोस्टमार्टम के उन्‍हें सौंप दिया।

यूपी के फीरोजाबाद निवासी 35 वर्षीय देवेन्द्र पुत्र रामबाबू को किडनी की बीमारी थी। मुरैना के गणेशपुरा में उसकी बहन रहती है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 31 जुलाई को जिला अस्पताल के बाहर से उसे गंभीर हालत में अज्ञात के रूप में भर्ती कराया गया था। पुलिस को भी सूचना दी। उसके कोई परिजन इस दौरान अस्पताल नहीं आए।

उधर बताया जाता है कि अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ ने भी उसकी सुध नहीं ली। गुरुवार को मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज व उनके परिजनों को जब दुर्गंध आई तो उन्‍होंने अस्पताल वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स से शिकायत की। मरीज का शव बेड पर था। आनन फानन में उसे पीएम हाउस भेजा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दी और उन्हें बुलाया। परिजन पीएम हाउस पहुंचे और शव को बिना पीएम के लिए ले गए।

पता नहीं चला युवक की मौत कब हुई

वार्ड में भर्ती मरीजों का कहना है कि युवक में उन्होंने दो दिन से कोई हलचल नहीं देखी थी। न तो उसके पास कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टॉफ नजर आया और न ही कोई उसका परिजन। मरीजों का यह भी कहना था कि जिस हालत में शव था, उसमें कीड़े भी नजर आ रहे थे।

ड्यूटी डॉक्टरों व स्टॉफ पर उठ रहे सवाल

अस्पताल के मेडिकल वार्ड में सुबह शाम डॉक्टर राउंड लेते हैं। हर मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी ली जाती है। वार्ड में मरीजों की देखरेख, दवा व इंजेक्शन देने के लिए स्टाफ नर्स भी ड्यूटी देती हैं। नर्सों की इंचार्ज भी नजर रखती हैं। युवक के मामले में सामने आया कि किसी नर्स ने युवक को न तो दवाई दी और न ही इंजेक्शन दिया। कोई उसके पास तक नहीं गया कि युवक जिंदा या मुर्दा।

इनका कहना है

युवक को अज्ञात के रूप में भर्ती किया गया था। युवक की हालत खराब हो रही थी। वार्ड की सिस्टर रोजाना सिविल सर्जन को युवक को दूसरे अस्पताल में भर्ती या रेफर करने के लिए पत्र लिख रही थी। 4 अगस्त को ही उसे मर्सी होम या अन्य किसी जगह के भर्ती के लिए रेफर किया गया था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। कल शाम को मरीज जीवित था। युवक की सुबह मौत हो गई।

डॉ. नागेन्द्र ऋषिश्वर, एमडी, जिला अस्प्ताल मुरैना

युवक मानसिक रूप से भी विक्षिप्त था और डॉ. नागेन्द्र ऋषिश्वर ने भी देखा था। युवक की हालत को देखते हुए उसे ग्वालियर भी रेफर किया गया था। कोई परिजन नहीं आया। जहां तक कीड़े पड़ने का सवाल है तो उसके संभवत: मरते समय लेट्रिंग हो गई थी, जिसकी वजह से कीड़े आ गए हों। मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस उसके परिजनों को लेकर आई।

डॉ. अशोक गुप्ता, सीएस, जिला अस्पताल मुरैना

मृतक मेरा साला था, घर ज्यादा आना जाना नहीं था। मुरैना में एक ढाबे पर काम करता था पर अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी हमें नहीं थी। फीरोजबाद में भी सास-ससुर कोई नहीं है। सुबह पुलिस ने उसकी मौत की जानकारी दी। जिसके बाद हमने शव को ले जाकर अंतिम संस्कार किया।

यतेन्द्र, मृतक का जीजा

यदि बॉडी में बदबू आने लगी थी, इसका मतलब युवक की मौत कुछ समय पहले हो गई होगी, क्योंकि आम तौर पर सर्दियों के समय 24 घंटे बाद बॉडी डी कंपोज होना शुरू हो जाती है, मौसम इन दिनों जैसा बारिश का है तो 3 से 4 घंटे बाद डी कंपोज होना शुरू होती है। इस तरह की गंभीर बीमारी की स्थिति में उसके बाद से ही दुर्गंध देना शुरू होती है।

ओपी शुक्ला, रिटायर्ड सीएमएचओ

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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