Morena Massacre: मुरैना (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या के बाद जिले के लेपा गांव में सन्नाटा पसरा है। हत्याकांड को किसी ने करीब से तो किसी ने बहुप्रसारित हुए वीडियो में देखा है। उस मंजर को अपने करीब का ही देख पूरे गांव में डर का ऐसा माहौल है कि सब कुछ शांत हैं और ऐसे में रह-रहकर गजेंद्र सिंह के घर से उठ रहीं परिवार के सदस्यों की चीख पुकार इस सन्नाटे को चीर रही है।

गांव के हर मोहल्ले में चौपाल हैं, कहीं बरगद तो कहीं नीम के पेड़ पर चबूतरे बने हैं, जहां गांव के लोग मिलजुकर बैठते थे। इन चौपालों पर दिनभर चहलकदमी व शोर सुनाई देता था, लेकिन शुक्रवार की सुबह साढ़े 9 बजे जब गजेंद्र सिंह के परिवार के सदस्यों को गोलियों से भूना गया, तब से हालत यह है कि लोग घरों से बाहर निकलकर पड़ोसी से भी बात नहीं कर रहे। गांव की जिन दुकानों पर युवाओं का जमावड़ा रहता था, ऐसी कुछ दुकानें दो दिन से बंद हैं। मृतक गजेंद्र सिंह के स्वजन व रिश्तेदारों के रोने की आवाजें ही सुनाई दे रही हैं। जो रिश्तेदार आ रहे हैं वह भी गांव के बाहर से रोते-बिलखते हुए आ रहे हैं।

मातम के शोर में दबीं शादी की खुशियां

शुक्रवार की रात लेपा गांव के कल्याण सिंह तोमर के बेटे विपिन सिंह तोमर के लगुन-फलदान का कार्यक्रम था। सुबह से ही रसोई बनाने के लिए हलवाई लग गए थे। कई तरह की मिठाई व अन्य पकवान तैयार हो चुके थे, लेकिन जैसे ही गांव में छह लोगों की हत्या की खबर फैली तो इस परिवार में चल रहीं शादी की खुशियां भी दब गईं। लड़की पक्ष से कुछ लोग पहुंचे और घर के अंदर लगुन चढ़ाने की औपचारिकता पूरी की। गांव में पुलिस तैनात: बदले की आग में हुए हत्याकांड के बाद गांव में पुलिस तैनात हैं, हालाकि गजेंद्र तोमर के परिवार के तीन पुरुष सदस्यों की मौत हो चुकी है, और दो लोग ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार में ज्यादातर पुरुष सदस्य रिश्तेदार ही घर पर मौजूद हैं, वहीं पड़ोस में रहने वाले आरोपित पक्ष की घर में केवल दो बुजुर्ग महिलाएं हीं हैं। दोनों पक्ष एक ही जाति के हैं। इसीलिए कोई भी किसी के पक्ष में आक्रोश व्यक्त नहीं कर रहा है। गांव में अभी भी 80 से 90 पुलिसकर्मी गांव में तैनात हैं।

एक और मर्डर चर्चा में

सामूहिक हत्याकांड में पुलिस की जांच में सामने आया है कि 2013 में मारे गए सोबरन सिंह का बड़ा बेटा और छह लोगों की हत्या में शामिल भूपेंद्र सिंह का भाई राधे तोमर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह साल 2011-12 में सीमा सुरक्षा बल के जवान के रूप में असम में पदस्थ था। पहले से शादीशुदा राधे ने उत्तराखंड की युवती से शादी कर ली थी, और जब वह गर्भवती हुई परिवार से मिलाने के बहाने मुरैना लाकर सिहोनिया के पास गला दबाकर हत्या की व शव आसन नदी में फेंक दिया था। इस मामले के बाद बीएसएफ से नौकरी होने के बाद से वह गांव में रह रहा था। बताया जाता है कि राधे के डर से ही गजेंद्र सिंह का परिवार गांव में नहीं आता था। राधे को जब दो माह पहले उम्रकैद हो गई, तब गजेंद्र के परिवार ने गांव में आने की योजना बनाई। पुलिस की शक की सुई इस एंगल पर भी घूम रही है, कि कहीं राधे ने ही जेल में बैठकर इस हत्याकांड की योजना त ोनहीं बनाई है, जिन बंदूक व कट्टों से यह सामूहिक हत्याएं हुई हैं, उनका इंतजाम भी राधे ने करवाया हो।

मासूमों ने दी मुखाग्नि: किसी ने मां, किसी ने पिता को दी विदाई

हत्याकांड में कई बच्चों के सिर से माता या पिता का साया उठ गया। 10 साल के मासूम शिवा तोमर की मां केशकली की गोली लगने से मौत हो गई और पिता वीरेंद्र नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। मासूम शिवा ने जब अपनी मां केशकली के शव को मुखाग्नि दी तो देखने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। 12 साल के सचिन ने पिता संजू सिंह और चाचा सत्यप्रकाश को मुखाग्नि दी। सुनील सिंह ने पिता गजेंद्र और छह माह की गर्भवती पत्नी मधू के शव का अंतिम संस्कार किया। नरेंद्र सिंह ने पत्नी बबली का अंतिम संस्कार किया।

Posted By: anil tomar

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