-कलेक्टर-कमिश्नर के फेसबुक पेज पर सिर्फ फेसबुक लाइव और उपलब्धियां

-कमिश्नर ने कहा-लोगों की समस्याओं के लिए है पेज, फिर कहा-लोगों में शिकायत का नशा

मुरैना। शहर के आम लोग अधिकारियों से सहज संपर्क में रहें। गांव से लेकर शहर तक की समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचा सकें। इन सभी उद्देश्यों के लिए शासन ने अधिकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय रहने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग अधिकारी अपनी दैनिक गतिविधियों की सूचनाएं और फेसबुक लाइव जैसे विकल्पों के लिए कर रहे हैं। लोगों की शिकायतों और सूचनाओं पर कार्रवाई करना तो दूर, उन्हें उत्तर तक नहीं मिल पा रहा है।

कलेक्टर मुरैना और चंबल कमिश्नर नाम से प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने फेसबुक पेज बनाए हुए हैं। इसके अलावा ट्वीटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी अधिकारियों के पदनाम से प्लेटफार्म बनाए गए हैं। इन पेज पर शासन की गतिविधियां और योजनाओं की जानकारी का प्रचार प्रसार तो हो रहा है, लेकिन जनता की सुनवाई नहीं हो पा रही है। अधिकारी खुद इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि इन प्लेटफार्म को जनता की सुलभता और उनकी समस्याओं को समझने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए बनाया गया था। जब अधिकारियों से पूछा गया कि शिकायतों की पोस्ट पर कार्रवाई तो दूर उनके उत्तर भी लोगों को नहीं मिलते हैं। इस पर अधिकारियों ने जो उत्तर दिए, वे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के उद्देश्यों से मेल नहीं खाते।

कलेक्टर मुरैना पेज की स्थिति

इस पेज पर आर्मी के सूबेदार वीके दुबे ने करीब 7 दिन पहले पोस्ट की कि वे देश की पश्चिमी सीमा पर तैनात हैं। उन्होंने खसरा-खतौनी ऑनलाइन न होने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि वे 5 जुलाई से तहसीलदार ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं। इस पोस्ट का श्री दुबे को न उत्तर मिला न समाधान हुआ। इसके बाद यह शिकायत कमिश्नर चंबल के पेज पर भी की है। कलेक्टर मुरैना पेज पर इस तरह की कई शिकायतें हैं, जिनमें लोग जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

कमिश्नर चंबल पेज का हाल

आर्मी के जवान धर्मसिंह तोमर ने पेज पर पोस्ट की है कि गांव में उनकी जमीन पर कब्जा है और वे बार-बार इस विवाद के चलते छुट्टी लेकर नहीं आ पा रहे हैं। इस बात की शिकायत वे कलेक्टर से भी कर चुके हैं। इससे पहले इसी जवान ने कलेक्टर के फेसबुक पेज पर भी अपनी शिकायत भेजी थी। जवान कलेक्टर से मिल भी चुका है। फिर भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। फेसबुक पेज पर इस तरह की गई शिकायतें हैं।

कथन

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आने का उद्देश्य यह था कि लोग आसानी से अधिकारियों से संपर्क कर सकें और अपनी समस्या बता सकें, लेकिन मुरैना में तो लोगों में शिकायत करने का चलन है। शिकायत बढ़ा-चढ़ाकर की जाती हैं। लोग बार-बार शिकायतें पोस्ट करते रहते हैं। वैसे हमारे पास समय की कमी रहती है। पीआरओ ही हमारा पेज चलाते हैं। मैं भी समय निकालकर लोगों की पोस्ट पढ़ लेती हूं।

रेनू तिवारी, कमिश्नर चंबल संभाग