फोटो 4ए- पूर्व आशा पर आरोप लगाती मरीज लौंगश्री।

-शिकायतों के चलते सुबह अस्पताल पहुंचे थे सीएमएचओ

-महिला मरीज से पुलिस को दिलवाया आवेदन और आशाओं को जाने दिया

मुरैना। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा दलाली करने की शिकायतें अधिकारियों को मिल रही थीं। इन शिकायतों के परीक्षण के लिए बुधवार को सीएमएचओ डॉ. विनोद गुप्ता जब खुद यहां पहुंचे तो उन्होंने शिकायतों को सत्य पाया। यहां से उन्होंने दो पूर्व आशाओं को पैसे लेकर अल्ट्रासाउंड करवाते हुए पकड़ लिया। हालांकि विभाग ने न तो आशाओं को पुलिस के हवाले किया और न ही आशाओं से साठगांठ करने वाले कर्मचारियों पर ही कार्रवाई की।

जिला अस्पताल में शासन की ओर से अल्ट्रासाउंड पूरी तरह से मुफ्त है, लेकिन यहां लंबे समय से कुछ पूर्व और कुछ वर्तमान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मरीजों से पैसे लेकर उनके अल्ट्रासाउंड करवाए जाने की शिकायतें सीएमएचओ डॉ. विनोद गुप्ता को मिल रही थीं। बुधवार को सीएमएचओ ने आरएमओ डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता और डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर के साथ अल्ट्रासाउंड सेक्शन का निरीक्षण किया। यहां उनके पहुंचते ही आरोपित पूर्व आशा कार्यकर्ता अर्चना परमार व सुनीता यादव मौके से भाग गईं। इस पर सीएमएचओ को संदेह हुआ। उन्होंने यहां मौजूद मरीजों से पूछा कि यह महिलाएं किस मरीज को लेकर आईं थीं।

70 वर्षीय महिला ने कहा मुझसे लिए थे पैसे

डॉक्टरों के पूछने पर 70 वर्षीय मरीज लौंगश्री पत्नी मंगल सखवार ने बताया कि वह लगातार दो दिन से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए आ रही थीं। लेकिन नंबर अधिक होने से उनकी बारी नहीं आ रही थी। इस पर आरोपित आशाओं ने उससे 300 रुपए लिए और आज अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा।

भागने से पहले महिला को लौटा गईं 200 रुपए

महिला लौंग श्री ने बताया कि जैसे ही आरोपित पूर्व आशा कार्यकर्ताओं ने सीएमएचओ और आरएमओ को देखा, वैसे ही उन्होंने 300 में से 200 रुपए महिला को वापस किए और वहां से चलीं गई।

मेडिकल पर बैठी मिलीं आरोपित पूर्व आशाएं

सीएमएचओ ने बताया कि आशाओं का पीछा करते हुए वे और उनकी टीम अस्पताल के प्रवेश द्वार पर स्थित एक मेडिकल शॉप तक पहुंच गए। यहां उन्होंने उन दोनों पूर्व आशाओं को रोक लिया। महिला ने भी पूर्व आशाओं की पहचान कर ली। जिसके बाद अधिकारियों ने मेडिकल संचालक को निर्देश दिए कि अगर आगे से आशाएं उसकी दुकान पर बैठी दिखीं तो वह कार्रवाई करेंगे।

कार्रवाई पर यह सवाल

-अधिकारियों ने पूर्व आशाओं को रंगे हाथों पकड़े जाने पर भी पुलिस के हवाले नहीं किया।

-अधिकारियों ने खुद एक्शन लेने की बजाय एक आवेदन महिला मरीज से अस्पताल चौकी पुलिस को देकर मामला खत्म कर दिया।

-पूर्व आशाएं किस तरह से पैसे लेकर मरीजों के नंबर जल्दी लगवा देती थीं, इसकी जांच भी अधिकारियों ने नहीं की।

-अस्पताल के कौन से डॉक्टर और कर्मचारी पूर्व आशाओं से मिले हैं, इसकी भी जांच अधिकारियों ने नहीं करवाई।

यहां सामने आ रही विफलता

-अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी वेटिंग को अधिकारी कम नहीं कर पा रहे।

-जिन आशाओं की सेवा समाप्त हो चुकी है, वे मरीजों के साथ अस्पताल में आ रही हैं।

-पैसे का लेन देने होने पर भी अल्ट्रसाउंड विभाग के डॉक्टर और कर्मचारी यह बात अधिकारियों को नहीं बता पाए।

कथन

हमने अल्ट्रसाउंड सेक्शन की विजिट की। इस दौरान दो पूर्व आशाएं वहां से भागीं। एक मरीज ने बताया कि उन्होंने उससे अल्ट्रसाउंड के लिए पैसे लिए थे। हमने महिला से एक आवेदन पुलिस को दिलवाया है। हम प्रयास कर रहे हैं कि इस तरह के लोग परिसर में न आ पाएं। हमारे कर्मचारियों की इसमें कोई मिलीभगत नहीं है। फिर भी हम दिखवा लेंगे।

डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमएचओ मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network