फोटो 7ए। अंचल में सरसों की फसल, जिसमें है माहू का प्रकोप।

मुरैना। सरसों की फसल का दुश्मन एक छोटा सा कीट है। इस कीट को माहू कहा जाता है। इस कीट की उपस्थिति सरसों की सेहत के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। वहीं इस साल माहू की अच्छी खासी आमद सरसों के खेत में है। खेत से उड़कर यह कीट शहर तक आ रहे हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन सवारों को खासी परेशानी हो रही है। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि सरसों के जिन पौधों में फली आ गई हैं, उन्हें माहू कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। वहीं जहां फूल आ रहे हैं, वहां माहू की मौजूदगी ठीक नहीं।

बीत दो दिनों में माहू के प्रकोप में इजाफा हुआ है। खेतों में सरसों के पौधों पर अच्छी खासी संख्या में माहू बैठी हुई नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों की मानें तो माहू सरसों के पौधे पर बैठकर फूलों का रस पी जाती है और पौधा काला पड़कर नष्ट हो जाता है। माहू की संख्या अच्छी खासी हो तो एक ही दिन में सरसों को पूरा खेत साफ हो सकता है। इस लिहाज से माहू को किसान ज्यादा घातक मानते हैं। सड़कों पर माहू की संख्या देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेतों में इसका कितना प्रकोप होगा। दोपहिया वाहन सवार माहू से बचने के लिए आंखों पर चश्मा लगाकर या फिर हेलमेट पहनकर बाहर निकल रहे हैं।

पिछैती बोवनी की सरसों पर संकट

सरसों का रकबा जिले में 1 लाख 50 हजार हैक्टेयर है। इसमें से 50 फीसदी फसल में फली आ चुकी है। बाकी 50 फीसदी फसल में फूल हैं। ऐसे में जाहिर है कि माहू का खतरा पिछैती बोवनी वाली 50 फीसदी फसल पर मंडरा रहा है। माहू इन फूलों को चटकर जाएगी तो फूल फली नहीं बन पाएंगे और फसल का उत्पादन प्रभावित होगा।

दवा का छिड़काव करें लोग

इस मामले में कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि अगर खेतों में माहू का प्रकोप दिखाई दे तो किसान बिना देर किए कीटनाशकों का छिड़काव कर सकते हैं। इसके लिए किसान किसी भी कीटनाशक दुकान से कृषि सलाहकार और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार दवाएं ले सकते हैं, ताकि उनकी फसलें प्रभावित न हों।

Posted By: Nai Dunia News Network

fantasy cricket
fantasy cricket