मुरैना। मार्च महीने में रजिस्ट्रार विभाग पूरे जिले की जमीनों की कीमत सरकारी दरों पर तय करता है। इस बार भी विभाग दरों को तय कर रहा है। अुनमान है कि इस बार जमीनों की कीमतों में सरकारी गाइड लाइन में 10 से 15 फीसदी का इजाफा हो सकता है। हालांकि पिछले साल गाइड लाइन में जमीन की कीमतों को उतना नहीं बढ़ाया गया है। बताया जाता है कि शासन स्तर से ऐसे आदेश हैं कि अधिक राजस्व वसूल करना है। इसलिए गाइड लाइन में दाम बढ़ सकते हैं। साथ ही मार्च के महीने में रजिस्ट्रार विभाग अधिक से अधिक राजस्व कमाने के लिए अधिक से अधिक रजिस्ट्री करने का प्रयास कर रहा है। आगामी 1 अप्रैल से नई गाइड लाइन जारी हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि रजिस्ट्रार विभाग हर साल जिले के सभी क्षेत्रों की जमीनों की कीमतों को तय करता है। यानी तब जमीन की सरकारी स्तर पर कीमत तय हो जाती है तो उससे कम पर बेचा नहीं जा सकता। साथ ही सरकारी दर के हिसाब से ही रजिस्ट्री कराने पर सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है।

ऐसे समझें सरकारी गाइड लाइन में जमीनों की कीमत को

मान लीजिए शहर के बाजार या आसपास जमीनों की कीमत कितनी होनी चाहिए, इसका आकलन करने के लिए प्रशासन उस जगह की लोकेशन को देखते हुए कीमत फिक्स करता है। बेशक उस जमीन की बाजारू कीमत कितनी भी हो। शासन द्वारा तय की गई कीमत से कम पर वह जमीन नहीं बिक सकती। मसलन शहर के बीच में एमएस रोड पर जमीन की कीमत 20 हजार प्रति वर्ग मीटर रजिस्ट्रार विभाग ने तय की है। अब सरकारी दर से कम पर कोई जमीन नहीं बिक सकती।

इसलिए कीमतों में बढ़ोत्तरी करने से बचा रजिस्ट्रार विभाग

- 2016 में 8 नवंबर तक जिलेभर में भूमि व भवनों की खूब रजिस्ट्री हुई। 8 नवंबर के बाद पूरे दिसंबर भर जमीन व भवनों की रजिस्ट्री नहीं हुई। इसके बाद अब रजिस्ट्री हो भी रही हैं तो काफी कम।

- 2018-2019 में रजिस्ट्री अधिक हुईं। इसके पीछे बताया जा रहा है कि प्रॉपर्टी के काम में धीरे-धीरे बूम आ रहा है।

- 2019-2020 के बीच में भी रजिस्ट्री होने से अच्छा राजस्व मिला है। अंचल में प्रॉपर्टी के मामले में थोड़ी तेजी आ रही है। इसलिए भी राजस्व बढ़ा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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