फोटो 9ए। मेडिकल वार्ड, जहां पर रखे गए कोरोना के संदिग्ध मरीज। फाइल फोटो

मुरैना। अंचल में कोरोना पॉजिटिव मरीज पहले 12 थे। मंगलवार को 1 मरीज और बढ़ गया। वहीं जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग के अफसर काम कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि आगामी समय में आने वाली रिपोर्टों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में और इजाफा हो जाएगा। क्योंकि जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में कोरोना संदिग्ध ऐसे मरीजों को साथ-साथ रखा जा रहा है, जिनमें कोरोना के लक्षण भी हैं और कुछ में लक्षण नहीं हैं। ऐसे में जिस मरीज में कोरोना वायरस हुआ, वह वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को भी संक्रमित कर सकता है। जबकि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की सीधी गाइड लाइन है कि अस्पताल में केवल कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को ही रखा जाएगा और बाकी के संदिग्धों को क्वारंटाइन केंद्रों पर रखा जाएगा। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर केवल अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर थोपने और परेशानी से बचने के लिए सभी मरीजों को एक साथ अस्पताल में रखवा रहे हैं।

ऐसे समझें

मंगलवार को दुबई से लौटे कोरोना युवक सुरेश बरेठा के साथ ताश खेलने वाले पड़ोसी सफी मोहम्मद की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। सफी मोहम्मद सुरेश के क्लोज कॉन्टेक्ट में था। उसे व उसके साथ 76 और लोगों को एक साथ मेडिकल वार्ड में रखा गया था। सफी मोहम्मद सहित वार्ड में भर्ती अन्य लोग सुरेश के परिवार, रिश्तेदार व परिचित थे। इनमें से अधिकतर को कोरोना वायरस के लक्षण नहीं हैं। इसके बावजूद सभी को मेडिकल वार्ड में रखा गया था। चूंकि सफी मोहम्मद इसी वार्ड में था, इसलिए वह वार्ड में सभी के क्लोज कॉन्टेक्ट में रहा। ऐसे में वार्ड में भर्ती अन्य ऐसे मरीज जिनमें केवल कोरोना वायरस होने की आशंका है, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है तो हो सकता है कि सफी मोहम्मद के कॉन्टेक्ट में आने से इनमें से भी कुछ लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हों।

इसलिए रखा गया अस्पताल में बिना लक्षण लोगों को

युवक के परिवार, रिश्तेदार व संपर्क में आए ऐसे लोग जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं, उन्हें एसएएफ लाइन के पास छात्रावास में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर पर रखा जाना था। इन सेंटरों पर क्वारंटाइन किए गए लोगों की व्यवस्था सीएमएचओ कार्यालय स्तर से की जानी है। जबकि अस्पताल में रहने वाले मरीजों की खाने पीने व सुरक्षा व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन को करनी है। ऐसे में सीएमएचओ व उनके कार्यालय के लोग अपनी जिम्मेदारी को अस्पताल प्रबंधन पर थोप रहे हैं। इससे कोरोना वायरस के फैलने का खतरा बढ़ रहा है।

यह है गाइड लाइन

- गाइड लाइन के मुताबिक जिन मरीजों में कोरोना के लक्षण हैं या फिर रिपोर्ट में उन्हें पॉजिटिव बताया गया है, उन्हें ही अस्पताल में भर्ती रखा जा सकता है।

- जिन लोगों में कोरोना से संक्रमित होने की आशंका है और लक्षण नहीं हैं, उन्हें क्वारंटाइन सेंटरों पर रखा जाना है। क्वारंटाइन सेंटर से इन मरीजों को केवल सैंपल देने के लिए अस्पताल आना है और वापस उन्हें क्वारंटाइन सेंटर भेजा जाना है या फिर क्वारंटाइन सेंटर से ही इनके सैंपल कलेक्टर किए जाने हैं।

यहां भी हो रही है लापरवाही

- स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में ही एक डॉक्टर को सैंपल लेने के लिए लगा रखा है। ऐसे में कोरोना वायरस के संदिग्धों के सैंपल केवल जिला अस्पताल में डॉक्टर ले रहे हैं। इससे कोरोना संदिग्ध मरीज का मूवमेंट हो रहा है, इससे भी संक्रमण बढ़ने का खतरा पैदा हो रहा है।

- अभी तक सीएमएचओ कार्यालय स्तर से ब्लॉक स्तर या जिला स्तर पर पैथोलॉजिस्ट व तकनीशियनों की टीमों को तैयार नहीं किया गया है। जिससे ये लोग ब्लॉक स्तर या जिला स्तर पर जाकर संदिग्ध के सैंपल ले सकें, जिससे डॉक्टरों के सिर से लोड कम हो सके। साथ ही मरीजों का मूवमेंट न हो।

इसलिए भी बढ़ा है खतरा

जिला अस्पताल में दुबई से लौटे कोरोना पॉजिटिव युवक सुरेश बरेठा के रिश्तेदार लगातार अस्पताल से भाग रहे हैं और भागने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में इन लोगों से संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अस्पताल में कर्मचारियों के साथ-साथ ये लोग बाहर के दूसरे लोगों के संपर्क में आएंगे। ऐसे में कोरोना के संक्रमण के फैलने का संकट पैदा हो रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस