मुरैना। कैलारस कस्बे के अयोध्या बस्ती में एक महीने पहले हुए अंधे कत्ल का पुलिस ने गुरुवार को खुलासा कर दिया। पुलिस ने इस अंधे कत्ल का षडंयत्र रचने वाले दो आरोपित व दो कत्ल करने वालों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि अभी इस षडयंत्र को रचने वाला मास्टरमांइड पुलिस गिरफ्त से बाहर ही है। जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। यहां आरोपित मृतक के परिचित ही है, जिन्होंने मृतक के खेत बेचने के बाद मिले पैसों के लालच में इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

जानकारी के मुताबिक गत 12 दिसंबर को अयोध्या बस्ती निवासी गिर्राज नामदेव की हत्या हो गई थी। यहां बता दें कि गिर्राज ने 10 दिन पहले कुछ लोगों पर उसकी मारपीट करने तथा हत्या करने का आरोप भी लगाया था। हत्या के बाद पुलिस ने इस मामले में तफ्तीश शुरू की, जिसमें काल डिटेल सहित गिर्राज की हत्या से किसे फायदा होने वाला था, इसके बारे में जानकारियां जुटाई। जिसमें सामने आया कि गिर्राज नामदेव व उसका भाई उमाशंकर दोनों ही अविवाहित है और इनका कोई रिश्तेदार भी नहीं है। मृतक गिर्राज के भाई उमाशंकर ने कुछ समय पहले अपना सुजानगढ़ी गांव का साढे तीन बीघा खेत संजय कुशवाह को 13 लाख 30 हजार रुपये में बेचा था। इसके बाद उमाशंकर गायब हो गया। इस मामले में उसके परिचित हरेन्द्र सिकरवार व लालू सिकरवार निवासी बड़ा गांव ने गिर्राज से न्यायालय में खेत पर दीवानी केस दायर कराया। इसके बाद उससे सिखाकर थाने में जमीन खरीदने वाले संजय कुशवाह व अन्य पर मारपीट का मामला दर्ज कराया। इसके ठीक 10 दिन बाद 12 दिसंबर को गिर्राज नामदेव की हत्या हो गई। षडयंत्र था कि इसका शक मारपीट करने वालों पर जाएगा, लेकिन पुलिस ने इस गुत्थी का सुलझा दिया। दरअसल इस मामले में मास्टरमाइंड सैमई गांव निवासी बनवारी लाल शर्मा था, जो कि गिर्राज का परिचित भी था। उसने इस षड़यंत्र में सैमई के राजा धाकड़ को शामिल किया। इसके साथ ही बड़ा गांव के हितेन्द्र सिकरवार व लालू सिकरवार को भी शामिल किया। चारों ने मिलकर गिर्राज व उमाशंकर नामदेव के खेत बचने से आए पैसों को हड़पने की साजिश रची। इन चारों ने कैलारस के रहने वाले अनिल वाल्मीकि व विनोद वाल्मीकि को एक लाख रुपये का लालच गिर्राज की हत्या करने का दिया। जिस पर दोनों ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दे दिया। पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में अनिल वाल्मीकि, विनोद वाल्मीकि, हितेन्द्र सिकरवार व लालू सिकरवार को गिरफ्तार कर लिया है। जिन्होंने हत्याकांड को भी कबूल कर लिया है। वहीं मास्टर माइंड बनवारी शर्मा व राजा धाकड़ दोनों ही पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।

उमाशंकर के साथ ही साथ रहते थे षडयंत्रकारीः

चारों षड़यंत्रकारियों ने उमाशंकर को अपने विश्वास में ले रखा था। उमाशंकर ने ही अपना खेत बेचा था। जिसके लगभग 10 लाख रुपये आने थे। ऐसे में जमीन खरीदने वालों को फंसाकर वह इस 10 लाख रुपये का हड़पना चाहते थे, इसमें उमाशंकर की जान को भी खतरा था। जिस पर पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में पहले ही कर लिया। जिससे वह सुरक्षित बच जाए। गिर्राज व उमाशंकर के आगे पीछे कोई नहीं था। इसी वजह से यह पूरा षड़यंत्र रचा गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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