मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरैना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी बदहाल हैं कि घायल और मरीजों को इलाज कराने के लिए यातना सी झेलनी पड़ रही है। हादसों में घायलों को पलंग नहीं मिल रहे, इसलिए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर पर भर्ती कर उनकी मरहमपट्टी व इलाज चल रहा है। सामान्य बीमारी से भर्ती मरीजों को इंजेक्शन व ड्रिप (बोतल) लगवाने के लिए डॉक्टर व नर्सों को ढूंढना पड़ता है।

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत, इस घटनाक्रम से जानिए कि बुधवार की देर रात जतावर गांव की पुलिया के पास तेज रफ्तार दो बाइक आमने-सामने से टकरा गईं। इस हादसे में एक बाइक पर सवार छीतरियापुरा निवासी महेन्द्र गुर्जर, रघुवीर गुर्जर और विद्याराम गुर्जर घायल हो गए तो दूसरी बाइक पर सवार खांडोली गांव निवासी गिर्राज सिकरवार घायल हो गया। चारों घायलों को देर रात जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन इन्हें भर्ती करने के लिए सर्जिकल वार्ड में पलंग नहीं मिला। ऐसे में घायल गिर्राज सिकरवार व महेन्द्र गुर्जर को स्ट्रेचर पर रातभर भर्ती कर इलाज दिया गया। दूसरी ओर घायल रघुवीर गुर्जर को तो व्हीलचेयर पर बैठाकर इलाज दिया जा रहा है। सर्जिकल वार्ड में तैनात ड्यूटी नर्स ने कहा कि 90 मरीजों को भर्ती करने के लिए पलंग हैं, जबकि वर्तमान में 140 से ज्यादा मरीज हैं। दूसरे वार्ड में इन मरीजों का भती कर देंगे तो वहां डॉक्टर इन्हें देखने नहीं जाते।

बुजुर्ग को व्हील चेयर पर चढ़ी ड्रिप, बेटा बना ड्रिप स्टैंडः

मेडिसिन के महिला व पुरुष वार्ड के अलावा सर्जिकल वार्ड की हालत यह है कि यहां भर्ती मरीजों को समय पर इंजेक्शन व ड्रिप भी नहीं लग पा रहीं। जिन भर्ती मरीजों के हाथ की नसों में लगी ड्रिप खत्म हो जाती है तो ड्रिप बदलवाने या उसकी निडिल को बाहर निकलवाने के लिए मरीज या उसके स्वजनों को डॉक्टर या नर्सों को ढूंढना पड़ता है। पुरुष मेडिसिन वार्ड में भर्ती दीपक कुमार ने बताया कि दो दिन से वह इंजेक्शन लगवाने के लिए नर्सों के स्टाफ रूम के बाहर जाते हैं, वहां इंजेक्शन लगता है। गुरुवार को ओपीडी में आई 80 साल की बुजुर्ग महिला को डॉक्टर ने अस्पताल में भर्ती कर इंजेक्शन व ड्रिप लिखे, लेकिन चार घंटे बाद भी उन्हें इंजेक्शन या ड्रिप नहीं लगे। उक्त बुजुर्ग के बेटे नर्स के पास गए तो नर्स ने उन्हें स्टाफ रूम में ही आने की कह दिया। इसके बाद बुजुर्ग महिला को व्हील चेयर पर बैठाकर नर्सो के स्टाफ रूम के पास लाया गया, जहां उन्हें ड्रिप लगाई गई और इस दौरान एक घंटे से ज्यादा समय तक बुजुर्ग महिला का बेटा ड्रिप को पकड़कर स्टैण्ड की तरह खड़ा रहा।

वर्जन

यहां मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। डॉक्टर आते हैं और जो इंजेक्शन व दवाएं लिख जाते हैं वह नर्सें समय पर नहीं देतीं। ड्रिप लगवाने के लिए मरीज को नर्सों के पास ले जाना पड़ता है। नर्स चलकर आसानी से आ सकती हैं, पर वह बुजुर्ग व बीमारों की मजबूरी समझे बिना ही अपने कुर्सी से नहीं हिलतीं, यह गलत है।

राजकुमार सिंह गुर्जर,घायल मरीज का स्वजन

Posted By: Nai Dunia News Network

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