मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जींगनी गांव के तालाब की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए गुरुवार को प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। जहां से इस तालाब की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई। जिसमें तालाब किनारे बने मकानों को थ्रीडी मशीन चलाकर हटवाया गया, लेकिन इस कार्रवाई से ग्रामीण असंतुष्ट नजर आए। ग्रामीणों का आरोप था कि जहां तक सीमांकन किया गया था, वहां से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। महज तालाब के पास के एक दो मकान हटाकर प्रशासन ने कार्रवाई में इतिश्री कर ली है। जबकि अतिक्रमण पूरा यहां खड़ा हुआ हैं वहीं प्रशासन का तर्क था कि सीमांकन जहां तक किया गया है, वहां तक अतिक्रमण को हटाया गया है।

उल्लेखनीय है कि माताबसैया रोड पर जींगनी गांव में तालाब की जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। जिसकी वजह से इस तालाब का जीर्णोद्धार पूरी तरह से नहीं हो पा रहा था। पंचायत ने इस तालाब में खुदाई भी शुरू करा दी, लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि अतिक्रमण के बाद जितनी जगह बची है उसी में इसका जीर्णोद्वार हो रहा है। जबकि तालाब की पूरी जमीन पर कबर कर जीर्णोद्वार होना चाहिए। जिसको लेकर ग्रामीण पिछले दिनों में लगभग दो से तीन बार कलेक्ट्रेट पहुंचकर तालाब का सीमांकन कराने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंप गए। जिसके बाद यहां सीमांकन की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई। जिसके बाद इसके दायरे में आने वाले अतिक्रमण को हटाने के लिए गुरूवार को प्रशासनिक अमला जींगनी गांव मे पहुंचा। इस दौरान एसडीएम आरएस वाकना सहित नायब तहसीलदार, आरआई पटवारी व माता बसैया थाना पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया। जिससे अतिक्रमण हटाने में कोई अवरोध उत्पन्ना न हो। थ्रीडी मशीन से इस तालाब के आस पास बने दो से तीन मकानों को जेसीबी मशीन से जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई से शिकायतकर्ता संतुष्ट नजर नहीं आए। इसकी वजह बताते हुए ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन ने जितना सीमांकन किया था उस पूरी जगह को खाली नहीं कराया है। इसके लगभग 30 से 40 फीट अंदर तक यह कार्रवाई की गई है। जबकि प्रशासन का कहना था कि जहां तक यह सीमांकन किया गया है उस पूरी जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है।

कार्रवाई के दौरान बनती रही विवाद की स्थितिः

अतिक्रमण हटाने के दौरान यहां विवाद की स्थिति बनती रही। ग्रामीण यहां आरआई पर ठीक से सीमांकन न करने की बात कह रहे थे। ग्रामीणों का कहना था तालाब 4 बीघा 16 बिस्वा का है। वहीं पटवारी व आरआई ने कब यह सीमांकन किया किसी को नहीं पता है। अपनी मनमर्जी से सीमांकन कर दिया होगा। जिसकी वजह से यह तालाब पूरी तरह से संकरा हो गया है। वर्तमान में महज दो से तीन बीघा जमीन में ही तालाब बचा है। ग्रामीण यहां सीमांकन व कार्रवाई ठीक से न होने का आरोप लगाते हुए हंगामा भी करते रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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